Two Trees Wedding News: न दूल्हा था, न दुल्हन… फिर भी हुई धूमधाम से शादी, इस अनोखे विवाह में 200 से ज्यादा थालियां लेकर पहुंचे लोग

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न दूल्हा था, न दुल्हन… फिर भी हुई धूमधाम से शादी, कहां हुआ ये अनोखा विवाह
Last Updated:September 15, 2026, 20:15 IST
Unique Wedding News: पुडुकोट्टई में ग्रामीणों ने पीपल और नीम के पेड़ों की शादी कराई, जिन्हें शिव-पार्वती का स्वरूप माना गया. हजारों श्रद्धालु शामिल हुए, 200 से अधिक थालियों का जुलूस निकला.तमिलनाडु के पुडुकोट्टई जिले में ऐसा ही एक अनोखा धार्मिक आयोजन हुआ (फोटो: लोकल 18)
निवेथा जे
पुडुकोट्टई: शादी के लिए इंसान तो आपने कई देखे होंगे लेकिन क्या आपने कभी पीपल और नीम के पेड़ों की शादी होते देखी है? तमिलनाडु के पुडुकोट्टई जिले में ऐसा ही एक अनोखा धार्मिक आयोजन हुआ जहां ग्रामीणों ने पूरे पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पीपल और नीम के पेड़ों का विवाह कराया. इस समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और 200 से ज्यादा पूजा की थालियां सजाकर भव्य जुलूस निकाला गया.
यह आयोजन अरंथांगी के पास मेलमंगलम साउथ गांव के सेल्वा विनायक मंदिर में कराया गया. ग्रामीणों ने पहले बाकायदा निमंत्रण पत्र छपवाए और आसपास के लोगों को समारोह में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया.
200 से ज्यादा पूजा की थालियां लेकर निकला जुलूससमारोह के लिए ग्रामीण कोप्पियम्मन मंदिर के मैदान में एकत्र हुए. यहां से 200 से ज्यादा पूजा की थालियां तैयार कर भव्य जुलूस निकाला गया. इन थालियों में नारियल, पान के पत्ते, सुपारी, केले और अन्य फल रखे गए थे. इसके अलावा रेशमी धोती और साड़ियां भी पूजा सामग्री में शामिल थीं. पारंपरिक संगीत और लोक उत्सव के माहौल के बीच श्रद्धालु इन पूजा की थालियों को सिर पर रखकर पीपल और नीम के पेड़ों के पास पहुंचे.
पेड़ों को माना शिव-पार्वती का स्वरूपधार्मिक मान्यता के अनुसार, इस समारोह में पीपल और नीम के पेड़ों को भगवान शिव और देवी पार्वती के प्रतीक के रूप में पूजा गया. इसके बाद विशेष हवन और पूर्णाहुति की गई. अभिषेक के बाद दोनों पेड़ों को नए कपड़े पहनाए गए और फूलों की मालाओं से सजाया गया. फिर विवाह की रस्म पूरी करने के लिए दोनों पेड़ों को पवित्र धागा यानी ‘थाली’ बांधी गई. इसके बाद विशेष दीपाराधना की गई और पूजा-अर्चना संपन्न हुई.
कुंवारे लड़के-लड़कियों की शादी से भी जुड़ी मान्यताइस अनोखी शादी के पीछे सिर्फ धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की कई मान्यताएं भी जुड़ी हैं. ग्रामीणों का मानना है कि इस तरह की रस्म से कुंवारे पुरुषों और महिलाओं की शादी में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और उनके विवाह के योग बनते हैं. इसके अलावा लोगों का यह भी विश्वास है कि इस पूजा से बारिश होती है, खेती में समृद्धि आती है और संतान का आशीर्वाद मिलता है.
हजारों श्रद्धालु हुए शामिलमेलमंगलम साउथ और आसपास के गांवों से हजारों श्रद्धालु इस धार्मिक समारोह में पहुंचे. पूरे आयोजन को गांव के लोगों ने मिलकर आयोजित किया. पेड़ों की शादी के दौरान पारंपरिक संगीत, पूजा-पाठ और उत्सव का माहौल बना रहा. हालांकि, कुंवारे लड़के-लड़कियों की शादी या बारिश होने जैसी मान्यताएं धार्मिक आस्था और स्थानीय विश्वास पर आधारित हैं, इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जा सकता.
About the Authorअरुण बिंजोला
अरुण बिंजोला वर्तमान में हिंदी में एसोसिएट एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में वह करीब 19 वर्षों से काम कर रहे हैं, जिसमें 13 वर्षों से अधिक समय डिजिटल मीडिया में बी…
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First Published :
September 15, 2026, 20:15 IST
200 से ज्यादा पूजा की थालियां लेकर निकला जुलूससमारोह के लिए ग्रामीण कोप्पियम्मन मंदिर के मैदान में एकत्र हुए. यहां से 200 से ज्यादा पूजा की थालियां तैयार कर भव्य जुलूस निकाला गया. इन थालियों में नारियल, पान के पत्ते, सुपारी, केले और अन्य फल रखे गए थे. इसके अलावा रेशमी धोती और साड़ियां भी पूजा सामग्री में शामिल थीं. पारंपरिक संगीत और लोक उत्सव के माहौल के बीच श्रद्धालु इन पूजा की थालियों को सिर पर रखकर पीपल और नीम के पेड़ों के पास पहुंचे.
पेड़ों को माना शिव-पार्वती का स्वरूपधार्मिक मान्यता के अनुसार, इस समारोह में पीपल और नीम के पेड़ों को भगवान शिव और देवी पार्वती के प्रतीक के रूप में पूजा गया. इसके बाद विशेष हवन और पूर्णाहुति की गई. अभिषेक के बाद दोनों पेड़ों को नए कपड़े पहनाए गए और फूलों की मालाओं से सजाया गया. फिर विवाह की रस्म पूरी करने के लिए दोनों पेड़ों को पवित्र धागा यानी ‘थाली’ बांधी गई. इसके बाद विशेष दीपाराधना की गई और पूजा-अर्चना संपन्न हुई.
कुंवारे लड़के-लड़कियों की शादी से भी जुड़ी मान्यताइस अनोखी शादी के पीछे सिर्फ धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की कई मान्यताएं भी जुड़ी हैं. ग्रामीणों का मानना है कि इस तरह की रस्म से कुंवारे पुरुषों और महिलाओं की शादी में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और उनके विवाह के योग बनते हैं. इसके अलावा लोगों का यह भी विश्वास है कि इस पूजा से बारिश होती है, खेती में समृद्धि आती है और संतान का आशीर्वाद मिलता है.
हजारों श्रद्धालु हुए शामिलमेलमंगलम साउथ और आसपास के गांवों से हजारों श्रद्धालु इस धार्मिक समारोह में पहुंचे. पूरे आयोजन को गांव के लोगों ने मिलकर आयोजित किया. पेड़ों की शादी के दौरान पारंपरिक संगीत, पूजा-पाठ और उत्सव का माहौल बना रहा. हालांकि, कुंवारे लड़के-लड़कियों की शादी या बारिश होने जैसी मान्यताएं धार्मिक आस्था और स्थानीय विश्वास पर आधारित हैं, इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जा सकता.
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