Jodhpur News: साल में सिर्फ 12 घंटे खुलता है ये मंदिर, दर्शन के लिए उमड़ा 40 हजार भक्तों का सैलाब

Last Updated:September 15, 2026, 12:13 IST
Uchchhishta Ganapati Temple: जोधपुर का अनोखा उच्छिष्ट गणपति मंदिर साल में सिर्फ एक दिन और महज 12 घंटे के लिए श्रद्धालुओं के लिए खुलता है. गणेश चतुर्थी पर मंदिर के कपाट खुले तो दर्शन के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा. करीब 30 से 40 हजार श्रद्धालुओं ने भगवान गणेश के दर्शन किए। रिद्धि के साथ विराजमान उच्छिष्ट गणपति के दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में खास आस्था और उत्साह देखने को मिला.
जोधपुर. साल में सिर्फ एक दिन और महज 12 घंटे के लिए खुलने वाला जोधपुर का अनोखा उच्छिष्ट गणपति मंदिर, गणेश चतुर्थी पर इसके कपाट खुले तो दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. करीब 30 से 40 हजार श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन किए. मंदिर की खासियत है कि यहां गणपति रिद्धि के साथ विराजमान हैं और मान्यता है कि यहां विशेष पूजा-अर्चना लोक कल्याण के लिए की जाती है. गणेश चतुर्थी की शाम विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद मंदिर के पट खुले और अगले 12 घंटे तक श्रद्धालुओं को भगवान गणेश के दर्शन का अवसर मिला.
मंदिर के कपाट खुलते ही गणपति बप्पा मोरया के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा. रातभर बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते रहे और सुबह मंदिर के पट बंद होने तक भक्तों का आना जारी रहा. मंदिर से जुड़े पंडित कमलेश दवे और अजय दवे ने बताया कि इस बार भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उच्छिष्ट गणपति के दर्शन किए और लोगों में भगवान के प्रति विशेष आस्था और उत्साह देखने को मिला.
पंडित कमलेश दवे बोले- लोक कल्याण के लिए 12 घंटे खुलते हैं मंदिर के पटपंडित कमलेश दवे ने जानकारी देते हुए बताया कि मंदिर में विराजमान मूर्ति का नाम उच्छिष्ट गणपति है और नव गणपति परंपरा में इनका विशेष स्थान माना जाता है. उन्होंने बताया कि यह प्रतिमा रिद्धि के साथ विराजमान है और इसके साथ कवच, यंत्र और मंत्र की विधि से पूजा की जाती है. मंदिर में तांत्रिक विधि से पूजा का उद्देश्य लोक कल्याण और श्रद्धालुओं को लाभ पहुंचाना है. पंडित दवे के अनुसार शास्त्रों में उच्छिष्ट गणपति की इस प्रतिमा के दर्शन सामान्य रूप से कराने का उल्लेख नहीं है और गणेश चतुर्थी के दिन ही इसके कपाट खोलने की परंपरा है.
उन्होंने बताया कि इस विषय पर ‘उच्छिष्ट गणपति’ नाम से पुस्तक भी प्रकाशित है. पंडित दवे ने मंदिर और प्रतिमा के इतिहास की जानकारी देते हुए बताया कि मंदिर करीब 35 वर्ष पुराना है, जबकि प्रतिमा लगभग 60 से 70 वर्ष पुरानी बताई जाती है, जिसे उनके गुरु शिवनारायण जी ने यहां स्थापित किया था. उन्होंने बताया कि श्रद्धालुओं की मान्यता है कि भगवान के दर्शन से संतान, धन और मनोकामनाओं की प्राप्ति होती है, इस बार करीब 30 से 40 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन का लाभ लिया.
दिल्ली से पहुंचीं श्रद्धालु गणेश चतुर्थी के अवसर पर जोधपुर के अलावा दिल्ली सहित दूसरे शहरों से भी श्रद्धालु इस विशेष मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे. दिल्ली से आईं श्रद्धालु र्मेगा ने बताया कि उन्होंने इस मंदिर के बारे में कई बार सुना था और यहां की तस्वीरें भी देखी थीं, लेकिन मंदिर साल में केवल एक दिन खुलता है, इसलिए दर्शन का अवसर नहीं मिल पाया था. इस बार गणेश चतुर्थी पर विशेष रूप से जोधपुर पहुंचीं और भगवान उच्छिष्ट गणपति के दर्शन किए. उन्होंने कहा कि लंबे समय से मन में दर्शन की इच्छा थी, जो इस बार पूरी हो गई. मंदिर का वातावरण और यहां श्रद्धालुओं की आस्था देखकर वह काफी खुश नजर आई और उन्होंने इसे अपने लिए बेहद खास अनुभव बताया.
12 घंटे के दर्शन बने यादगार जोधपुर के श्रद्धालु हेमंत ने बताया कि पूरे साल मंदिर बंद रहने और केवल गणेश चतुर्थी पर दर्शन मिलने की वजह से यहां दर्शन करने की उत्सुकता बनी रहती है. परिवार के साथ मंदिर पहुंचकर भगवान गणेश के दर्शन किए तो मन को बेहद शांति मिली. उन्होंने कहा कि इतने कम समय के लिए मंदिर खुलने के बावजूद हजारों लोगों का यहां पहुंचना भगवान गणेश के प्रति लोगों की आस्था को दर्शाता है. 12 घंटे पूरे होने के बाद मंदिर के कपाट फिर बंद कर दिए गए और अब श्रद्धालुओं को अगले साल गणेश चतुर्थी का इंतजार रहेगा. मंदिर की यही अनोखी परंपरा इसे जोधपुर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में एक अलग पहचान देती है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
और पढ़ेंLocation :
Jodhpur,Rajasthan
First Published :
September 15, 2026, 12:13 IST



