Rajasthan

UGC के मुद्दे ने BJP को दिया झटका, अगड़ी जातियों का वोट बैंक निर्दलीयों को हुआ शिफ्ट

जयपुर. राजस्थान में श्री राजपूत करणी सेना और अगड़ी जातियों के संगठनों की ओर से यूजीसी एक्ट को लेकर चलाए गए रोल बैक आंदोलन ने राज्य में बीजेपी को निकाय चुनाव में बड़ा झटका दे दिया है. न सिर्फ राजपूत बहुल इलाकों में बीजेपी का वोट बैंक गिरा, बल्कि पार्टी के कई दिग्गजों के इलाकों में भी वह पिछड़ गई है. करणी सेना ने दावा किया कि यूजीसी आंदोलन और उनके बीजेपी को वोट नहीं देने की अपील का नतीजा रहा कि बड़ी संख्या में निर्दलीय जीते. हालांकि बीजेपी ने इस दावे को खारिज किया है.

जयपुर में तीन अगस्त को श्री राजपूत करणी सेना के बैनर तले अगड़ी जातियों ने यूजीसी रोल बैक के मुद्दे पर विरोध मार्च किया था. इससे पहले श्री राजपूत करणी सेना के मुखिया महिपाल सिंह मकराना की अगुवाई में बीकानेर के देशनोक से जयपुर तक यूजीसी रोल बैक मुद्दे पर 18 दिन की पदयात्रा निकाली गई थी. इसके बाद श्री राजपूत करणी सेना ने निकाय चुनाव में बीजेपी के बजाय निर्दलीयों को वोट देने की राजपूतों समेत अगड़ी जातियों को अपील की थी.

करनी सेना प्रमुख महिपाल सिंह मकराना ने किया बड़ा दावानिकाय चुनाव के नतीजों में जिस तरह से बीजेपी राजपूत बहुल और अगड़ी जातियों के इलाकों में पिछड़ी इससे सवाल खड़ा हुआ कि क्या यूजीसी का मुद्दा बीजेपी पर निकाय चुनाव में भारी पड़ गया. श्री राजपूत करणी सेना के मुखिया महिपाल सिह मकराना ने दावा किया कि निकाय चुनाव में उनकी अपील और निर्दलीयों को वोट देने के लिए प्रचार का असर रहा कि 30 फीसदी निर्दलीय जीत कर आए. बीजेपी के दिग्गजों के इलाकों में बीजेपी बहुमत से दूर हो गई. मकराना ने दावा किया कि जिन निर्दलीयों ने यूजीसी मुद्दे पर उनकी मांग के समर्थन में शपत्र पत्र भरा वो जीते या फिर बीजेपी को हरा दिया.

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल के संसदीय क्षेत्र बीकानेर में बीजेपी हार गई
अब सवाल यह कि करणी सेना के इस दावे में कितना दम है. करणी सेना ने बीकानेर के देशनोक से यूजीसी रोल बैक की यात्रा शुरू की थी. केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल के संसदीय क्षेत्र बीकानेर में बीजेपी हार गई. बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिला है. यह यात्रा सीकर होते हुए जयपुर पहुंची थी. सीकर में भी बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा. फिर आंदोलन का अखाड़ा बना था जयपुर. जयपुर में उप मुख्यमंत्री दीया कुमारी का विधाधर नगर और उद्योग मंत्री राज्य वर्धन राठौड़ का झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र राजपूत बहुल है. इन दोनों इलाकों में बीजेपी का प्रदर्शन के उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा.

बीजेपी को जयपुर के राजपूत बहुल इलाकों में लगा तगड़ा झटकाविधाधर नगर में बीजेपी के जीते वार्डों का आंकड़ों पिछली बार के 64.3 फीसदी से घटकर 60 फीसदी रह गया. यहां बीस फीसदी वार्ड निर्दलीय जीतने में कामयाब रहे. जबकि झोटवाड़ा विधानसभा क्षेत्र में जीते वार्डों का आंकड़ा पिछली बार की तुलना में 63 फीसदी से घटकर 53 फीसदी रह गया. झोटवाड़ा में 23 फीसदी निर्दलीय जीते. बीजेपी को ये झटका जयपुर के दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में भी लगा. लेकिन इन दो विधानसभा क्षेत्रों के मुकाबले कम. कांग्रेस दावा कर रही है कि यूजीसी के मुद्दे पर जिस तरह जयपुर में पुलिस लाठीचार्ज हुआ उसका खामियाजा बीजेपी को भुगतना पड़ा है.

दो चुनाव में बीजेपी कांग्रेस और निर्दलीय को मिले मत2021 चुनावभाजपा – 35.11कांग्रेस – 40.30निर्दलीय – 24.59

2026 चुनावभाजपा – 36.11कांग्रेस – 35.14निर्दलीय – 27.75

गजेंद्र सिंह शेखावत जोधपुर में अपना बूथ भी हार गए
केवल जयपुर, बीकानेर और सीकर ही नही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर में तो नगर निगम में निर्दलीय सबसे अधिक जीते. बीजेपी और कांग्रेस निर्दलीयों से ही संख्या में पिछड़ गई. जोधपुर में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ना केवल नगर निगम में बीजेपी को बहुमत नहीं दिला पाए बल्कि अपना वार्ड और बूथ भी हार गए. अजमेर में भी केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी और विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी जैसे दिग्गजों के बावजूद बीजेपी कांग्रेस से ही नगर निगम में पिछड़ गई.

अगड़ी जातियों के मतदाताओं ने कांग्रेस के बजाय निर्दलीयों को चुना
राजस्थान में 2273 निर्दलीय पार्षद का चुनाव जीते है. जबकि बीजेपी 4179 और कांग्रेस 3613 पार्षद जीते हैं. हालांकि यूजीसी आंदोलन का फायदा कांग्रेस को भी नहीं मिला. बीजेपी से नाराज अगड़ी जातियों के मतदाताओं ने कांग्रेस के बजाय निर्दलीयों को चुना. यही वजह है कि जहां बीजेपी का बहुमत नहीं मिला उनमें अधिकतर में कांग्रेस भी बहुमत से दूर है. राजस्थान में 2021 और 2026 के नतीजों से तुलना करते हैं तो लग रहा है कि बीजेपी को सत्ता में होने का निकाय चुनाव में खास फायदा नहीं मिला. कांग्रेस को वोट शेयर पिछले चुनाव से घटा लेकिन निर्दलीयों का करीब दो फीसदी बढ़ गया.

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