Jodhpur News: डॉक्टर से लेकर फैक्ट्री तक बदल देगा एआई, आईआईटी जोधपुर बना रहा स्मार्ट सहायक

Last Updated:September 16, 2026, 12:54 IST
IIT जोधपुर में ऐसा स्मार्ट AI सहायक विकसित करने पर शोध चल रहा है, जो मेडिकल रिपोर्ट, तस्वीर, आवाज, दस्तावेज और सेंसर डेटा को एक साथ समझ सकेगा. यह तकनीक डॉक्टरों को मरीज की स्थिति समझने और उद्योगों में मशीनों की खराबी के संकेत पहले पहचानने में मदद कर सकती है. खास बात यह है कि इसे भारतीय जरूरतों के मुताबिक कम संसाधनों में तेज और किफायती बनाने पर जोर दिया जा रहा है.
जोधपुर. कल्पना कीजिए, डॉक्टर के सामने मरीज की पुरानी रिपोर्ट, मेडिकल तस्वीरें और जांच से जुड़ी तमाम जानकारियां एक साथ मौजूद हों और सिस्टम इन सभी को समझकर डॉक्टर के सामने जरूरी निष्कर्ष रख दे या फिर किसी फैक्ट्री की मशीन में खराबी आने से पहले ही उसके संकेतों को पहचानकर चेतावनी मिल जाए। ऐसी ही तकनीक को हकीकत के करीब लाने के लिए आईआईटी जोधपुर में शोध चल रहा है। संस्थान ऐसा स्मार्ट सहायक विकसित करने पर काम कर रहा है, जो तस्वीर, दस्तावेज, आवाज, रिपोर्ट और सेंसर से मिले आंकड़ों को एक साथ समझ सकेगा. खास बात यह है कि इसे भारतीय परिस्थितियों और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए छोटा, तेज और कम खर्चीला बनाने पर जोर दिया जा रहा है.
आईआईटी जोधपुर की मशीन इंटेलिजेंस लैब में कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. दिव्या सक्सेना के नेतृत्व में यह शोध किया जा रहा है. तकनीक को तीन प्रमुख आधारों मल्टीमॉडल लर्निंग, कुशल कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्मार्ट एजेंट्स पर विकसित किया जा रहा है. इसका उद्देश्य ऐसे बड़े और महंगे सिस्टम पर निर्भरता कम करना है, जिनके संचालन के लिए भारी कंप्यूटिंग संसाधनों और लगातार तेज इंटरनेट की जरूरत होती है. शोधकर्ता इसे कम संसाधनों में प्रभावी ढंग से काम करने योग्य बनाने पर फोकस कर रहे हैं.
स्वास्थ्य से लेकर उद्योग तक बदल सकता है काम करने का तरीकास्वास्थ्य क्षेत्र में यह प्रणाली मरीज की पुरानी रिपोर्ट, मेडिकल तस्वीरों और डॉक्टर के नोट्स को एक साथ समझकर चिकित्सकों को निर्णय लेने में मदद कर सकती है. वहीं औद्योगिक क्षेत्र में मशीन की तस्वीर, सेंसर डेटा, लॉग फाइल और तकनीकी जानकारी का विश्लेषण कर खराबी के संभावित संकेत पहले ही पहचानने में सहायता मिल सकती है. इससे मशीनों के अचानक बंद होने से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
शिक्षा और शोध में भी उपयोग की बड़ी संभावनाएंशिक्षा के क्षेत्र में जटिल दस्तावेज, रिसर्च पेपर और अध्ययन सामग्री को समझकर विद्यार्थियों के लिए उपयोगी निष्कर्ष तैयार किए जा सकेंगे. भारत में इसके उपयोग की संभावनाएं भी बड़ी हैं, यूडीआईएसई प्लस 2024-25 के अनुसार देश में 14.71 लाख स्कूल और 24.69 करोड़ विद्यार्थी हैं, जबकि उच्च शिक्षा में 4.46 करोड़ विद्यार्थी हैं. डॉ. दिव्या सक्सेना के अनुसार लक्ष्य ऐसी व्यावहारिक सहायता प्रणाली तैयार करना है, जो केवल जानकारी न दे, बल्कि लोगों और संस्थानों के काम को समझकर उपयोगी समाधान उपलब्ध कराने में मदद करे.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Jodhpur,Rajasthan
First Published :
September 16, 2026, 12:54 IST



