20 साल वालों को निगल रही 50 की उम्र वाली बीमारी, जानिए कैसे कैंसर का गढ़ बन रहा गुटका कैपिटल कानपुर?

Last Updated:September 16, 2026, 13:41 IST
Oral Cancer Symptoms : कानपुर में मुंह का कैंसर अब 40-50 साल की उम्र के बजाय 20-30 साल के युवाओं को भी अपना शिकार बना रहा है. जेके कैंसर संस्थान में 20 से 30 साल की उम्र के मरीज भी मुंह के कैंसर की जांच और इलाज के लिए पहुंच रहे हैं. ओंकोलॉजिस्ट डॉ. जितेंद्र वर्मा ने बताया कि गुटखा, सुपारी और पान मसाला को घंटों मुंह में रखने से केमिकल रिलीज होते हैं. इससे जीभ और गाल की त्वचा में घाव बनने लगते हैं. अगर ऐसे घाव लंबे समय तक बने रहें, तो कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. साल 2012 में गुटखे पर प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन कानपुर में आज भी पान मसाला और तंबाकू अलग-अलग पाउच में बिक रहे हैं. गड़रियन पुरवा के दुकानदार रमेश कहते हैं कि छोटे दुकानदारों के लिए पान मसाला बेचना मजबूरी है. इससे घर चलता है.
कानपुर. कभी मुंह का कैंसर 40 से 50 साल की उम्र में अधिक देखने को मिलता था, लेकिन अब यह बीमारी युवाओं को भी अपना शिकार बना रही है. कानपुर के जेके कैंसर संस्थान में 20 से 30 साल की उम्र के मरीज भी मुंह के कैंसर की जांच और इलाज के लिए पहुंच रहे हैं. डॉक्टरों का कहना है कि गुटखा, सुपारी और तंबाकू को लंबे समय तक मुंह में दबाकर रखने से अंदर की त्वचा को नुकसान पहुंचता है. शुरुआत में छोटे छाले और घाव बनते हैं, जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले सकते हैं. लोकल 18 ने पनकी, सचेंडी समेत ग्रामीण परिवेश वाले इलाकों में गुटखे की बिक्री की जमीनी हकीकत देखी. दुकानों पर पान मसाला और तंबाकू के अलग-अलग पाउच आसानी से बिकते मिले. विशेषज्ञों से बातचीत में सामने आया कि कम उम्र में मुंह के कैंसर के मामले चिंता बढ़ा रहे हैं.
15 दिन बाद घातक
जेके कैंसर संस्थान में पिछले 13 साल से कार्यरत वरिष्ठ ओंकोलॉजिस्ट डॉ. जितेंद्र वर्मा ने बताया कि पहले 40 से 60 साल की उम्र के मरीज मुंह के कैंसर के लिए आते थे. अब 20 से 35 साल की उम्र के मरीज भी बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं. गुटखा, सुपारी और पान मसाला को घंटों मुंह में रखने से केमिकल रिलीज होते हैं. इससे जीभ और गाल की त्वचा में घाव बनने लगते हैं. मुंह में छाला या घाव 15 दिन में ठीक नहीं हो रहा है, तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसे में तुरंत कैंसर विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए. समय रहते बीमारी पकड़ में आने पर इलाज आसान हो सकता है.
जीभ पर लगातार चोट भी ठीक नहीं
जीएसवीएम मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि गुटखा मुंह के कैंसर का अहम कारण है. गुटखा, खैनी, सुपारी और लंबे समय तक शराब का सेवन करने से भी मुंह का कैंसर हो सकता है. लगातार गुटखा खाने से मुंह के अंदर सबम्यूकस फाइब्रोसिस बन जाता है. इससे गालों के किनारे और जीभ पर लाल और सफेद पैच दिखाई देने लगते हैं. कई बार नुकीले दांतों से जीभ पर लगातार चोट लगने से भी घाव बनते हैं. अगर ऐसे घाव लंबे समय तक बने रहें, तो कैंसर का खतरा बढ़ सकता है. प्राचार्य ने कहा कि मुंह में किसी भी तरह का घाव या बदलाव दिखे तो बिना देरी के डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए.
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
मुंह में छाला 15 दिन से ज्यादा रहे.
जीभ या गाल पर लाल या सफेद पैच दिखे.
मुंह खुलने में परेशानी हो.
घाव से खून आए या दर्द बना रहे.
अलग-अलग पाउच में गुटखा
साल 2012 में गुटखे पर प्रतिबंध लगाया गया था, लेकिन आज भी पान मसाला और तंबाकू अलग-अलग पाउच में बिक रहे हैं. पनकी जवाहरपुरम निवासी दुकानदार आशीष विश्वकर्मा ने बताया कि थोक विक्रेता से पूरा माल मिलता है, जिसमें गुटखा भी शामिल होता है. ग्राहक मांगते हैं तो उन्हें दे देते हैं. अगर इस पर लगाम लगे तो सभी जगह बिक्री बंद हो जाएगी. गड़रियन पुरवा के दुकानदार रमेश ने कहा कि छोटे दुकानदारों के लिए पान मसाला बेचना मजबूरी है. इससे घर चलता है. सहायक खाद्य आयुक्त द्वितीय संजय प्रताप सिंह ने बताया कि समय-समय पर पान मसाला के नमूने लिए जाते हैं. पिछले छह माह में शहर के 50 स्थानों से सैंपलिंग कराई गई है. उन्होंने कहा कि गुटखे की बिक्री पर बैन नहीं है, इसलिए पान मसाला और तंबाकू अलग-अलग पाउच में बिकते हैं.
About the AuthorPriyanshu Gupta
प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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Kanpur Nagar,Uttar Pradesh
First Published :
September 16, 2026, 13:41 IST



