भरतपुर में है वो जगह, सड़क किनारे मिले बेसहारा लोगों की बदल जाती है जिंदगी

Last Updated:September 16, 2026, 20:20 IST
Bharatpur Apna Ghar aashram Story : भरतपुर का अपना घर आश्रम बेसहारा, निराश्रित लोगों को छत, भोजन, उपचार और अपनापन देता है. बी.एन. भारद्वाज और उनकी पत्नी ने इसकी स्थापना की. आश्रम में सेवा करने वाले लोग इन लोगों को परिवार का सदस्य मानकर उनकी जरूरतों का ध्यान रखते हैं.
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भरतपुर. भरतपुर में एक ऐसी जगह है, जहां अपनों से बिछड़े और बेसहारा लोगों को सिर्फ छत ही नहीं, बल्कि अपनापन भी मिलता है. यह है अपना घर आश्रम, जो निराश्रित, असहाय और जरूरतमंद लोगों के लिए उम्मीद की एक बड़ी किरण बनकर सामने आया है. यहां आने वाले लोगों के लिए आश्रम परिवार की तरह उनकी देखभाल करता है और उन्हें सम्मान के साथ जिंदगी जीने का अवसर देने का प्रयास करता है.
अपना घर आश्रम में देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसे लोगों को लाया जाता है, जिनका कोई सहारा नहीं होता या जो किसी वजह से अपने परिवार से बिछड़ जाते हैं. इनमें बीमार, बुजुर्ग, मानसिक रूप से परेशान और सड़क किनारे असहाय हालत में मिले लोग भी शामिल होते हैं. ऐसे लोगों को आश्रम में लाकर उनके रहने, खाने और उपचार सहित कई जरूरी सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है.
रहने से लेकर उपचार और भोजन तक की व्यवस्था
आश्रम में जरूरतमंद लोगों के लिए रहने की व्यवस्था के साथ-साथ चिकित्सा सुविधा, भोजन और दैनिक जरूरतों का भी ध्यान रखा जाता है. यहां सेवा का उद्देश्य सिर्फ किसी व्यक्ति की तत्काल जरूरत पूरी करना नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित माहौल, सम्मान और भावनात्मक सहारा देना भी है. यही वजह है कि यहां रहने वाले कई लोगों के लिए यह स्थान धीरे-धीरे घर जैसा बन जाता है. कई किलोमीटर क्षेत्र में फैला अपना घर आश्रम राजस्थान ही नहीं, बल्कि देश के प्रमुख सेवा संस्थानों में अपनी पहचान बना चुका है.
सेवा करने वाले लोग परिवार के सदस्य की तरह रखते हैं ध्यानयहां बड़ी संख्या में निराश्रित लोगों की देखभाल की जाती है. आश्रम में सेवा करने वाले लोग इन लोगों को परिवार का सदस्य मानकर उनकी जरूरतों का ध्यान रखते हैं. अपना घर आश्रम की स्थापना बी.एन. भारद्वाज और उनकी पत्नी ने सेवा की भावना के साथ की. दोनों आश्रम की व्यवस्थाओं और निराश्रित लोगों की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
सेवा, उपचार और अपनापन बनी आश्रम की पहचानआश्रम की पूरी व्यवस्था में सेवा, उपचार और अपनापन इसकी पहचान बन चुके हैं. जहां अपनों का साथ छूट जाता है, वहां अपना घर आश्रम इन लोगों के लिए सहारे की दीवार बनकर खड़ा है. यहां मिलने वाला भोजन, उपचार और सबसे बढ़कर अपनापन उन लोगों की जिंदगी में फिर से उम्मीद जगाने का काम करता है.
About the Authorआनंद पाण्डेयContent Producer
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…
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First Published :
September 16, 2026, 20:20 IST



