खुदाई में निकला था एक ही पत्थर में गणेश-हनुमान का रूप, आज भी दर्शन के लिए उमड़ते हैं श्रद्धालु

Last Updated:September 16, 2026, 22:33 IST
Naguar Famous Temple : नागौर के भाकल इच्छा शक्ति हनुमान गणेश मंदिर में एक ही पत्थर पर गणेश और हनुमानजी की प्रतिमाएं उभरी हैं. यह अनोखा स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है. ऐसे में एक ही पत्थर पर दोनों देवताओं का स्वरूप भक्तों के लिए ज्ञान और शक्ति के संगम का प्रतीक बन जाता है.
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नागौर. राजस्थान के नागौर में आस्था और इतिहास से जुड़ी एक ऐसी कहानी सामने आती है, जिसे सुनकर हर कोई हैरान रह जाता है. यहां भगवान गणेश और हनुमानजी की प्रतिमाएं एक प्राकृतिक पत्थर पर उभरी हुई हैं. ये पत्थर पर उभरी हुई प्रतिमाएं अलग-अलग नहीं, बल्कि एक ही पत्थर पर उकेरी हुई हैं. खास बात यह है कि प्रतिमा को सामने से देखने पर ऐसा प्रतीत होता है, जैसे गणेशजी और हनुमानजी एक साथ उड़ रहे हों. ये प्रतिमाएं नागौर के बख्तासागर तालाब के पास स्थित भाकल इच्छा शक्ति हनुमान गणेश मंदिर में मौजूद हैं. यह अनोखा स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए आस्था का विशेष केंद्र बना हुआ है.
स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस मंदिर का इतिहास नागौर के बख्तासागर तालाब के निर्माण से जुड़ा है. जानकारी के मुताबिक, विक्रम संवत 1730 में राजा बख्तावर सिंह ने बख्तासागर तालाब के निर्माण का कार्य शुरू करवाया था. इसी दौरान तालाब की खुदाई की जा रही थी. खुदाई के बीच एक पत्थर सामने आया, जिस पर भगवान गणेश और हनुमानजी का स्वरूप उकेरा हुआ था. इस अनोखी प्रतिमा को देखकर लोगों में श्रद्धा का भाव जागा और बाद में इसी स्थान पर प्रतिमा की स्थापना कर मंदिर का निर्माण कराया गया. तभी से यह स्थान श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र माना जाता है.
एक ही पत्थर में ज्ञान और शक्ति का संगमइस प्रतिमा की सबसे बड़ी खासियत इसका स्वरूप है. भगवान गणेश को जहां बुद्धि, ज्ञान और शुभारंभ का प्रतीक माना जाता है, वहीं हनुमानजी शक्ति, साहस और भक्ति के प्रतीक माने जाते हैं. ऐसे में एक ही पत्थर पर दोनों देवताओं का स्वरूप भक्तों के लिए ज्ञान और शक्ति के संगम का प्रतीक बन जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणेश और हनुमान ऐसे देव स्वरूप माने जाते हैं, जिन पर नवग्रहों का प्रभाव नहीं पड़ता. इसी वजह से मान्यता है कि भक्त जीवन की बाधाओं और परेशानियों से मुक्ति की कामना लेकर इस स्वरूप की पूजा करते हैं.
प्रतिमा को देखकर नजरें ठहर जाती हैं
मंदिर में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह प्रतिमा अपने आप में कौतूहल का विषय है. पत्थर पर उकेरे गए दोनों देवताओं का स्वरूप ऐसा है कि पहली नजर में ही लोगों का ध्यान आकर्षित करता है. खासकर प्रतिमा की बनावट देखकर ऐसा आभास होता है, मानो गणेश और हनुमान एक साथ आकाश की ओर गतिमान हों. गणेश और हनुमान के संयुक्त स्वरूप को लेकर धार्मिक परंपराओं में भी विशेष उल्लेख मिलता है. चेन्नई में स्थित एक प्रसिद्ध मंदिर में इसी संयुक्त स्वरूप को आद्यंत महाप्रभु के नाम से पूजा जाता है. नागौर का यह मंदिर भी इसी तरह के दुर्लभ स्वरूप के कारण श्रद्धालुओं और धर्म में रुचि रखने वाले लोगों के लिए खास आकर्षण रखता है.
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आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…
Nagaur,Nagaur,Rajasthan
First Published :
September 16, 2026, 22:33 IST



