भारत मंडपम में शुरू हुआ टूल्स एंड इक्विपमेंट एक्सपो 2026, MSME के लिए क्या है इसमें खास, देखें

आने वाले समय में भारत में एमएसएमई को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है. तकनीकी तौर पर एमएसएमई को और मजबूत करने के लिए दिल्ली के भारत मंडपम में ‘टूल्स एंड इक्विपमेंट एक्सपो 2026’ शुरू हुआ है जिसमें शीर्ष उद्योग दिग्गज और सरकारी अधिकारी भविष्य की रूपरेखा पर बातचीत कर रहे हैं. इसमें भारत के विनिर्माण क्षेत्र को डिजिटल एकीकरण और ‘इंडस्ट्री 4.0’ की ओर ले जाने की महत्वपूर्ण जरूरत पर जोर दिया जा रहा है.
‘इन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया’ द्वारा आयोजित ‘टूल्स एंड इक्विपमेंट एक्सपो 2026’ (TAEE) में हैंड टूल्स, पावर टूल्स, कटिंग एवं वेल्डिंग तकनीक और स्मार्ट ऑटोमेशन से जुड़े लेटेस्ट समाधान पेश किए जा रहे हैं. इस प्रदर्शनी में जर्मनी, चीन, ताइवान और हांगकांग ने भागीदारी की है जो भारत को तकनीकी तौर पर मजबूती देने में मदद कर रहे हैं.
इस यदु कुमार यादव, उप निदेशक, एनपीसी-डीपीआईआईटी, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार ने बताया कि भारत के विनिर्माण विकास का अगला चरण एमएसएमई को और भी ऊंचाइयों पर ले जाएगा. यह लीन मैन्युफैक्चरिंग से इंडस्ट्री 4.0 और आईओटी आधारित प्रणालियों की ओर ले जाने पर निर्भर करेगा. पिछले एक दशक में लीन मैन्युफैक्चरिंग के माध्यम से एमएसएमई के उत्पादों, प्रक्रियाओं और प्रणालियों को जोड़ने पर ध्यान दिया गया था लेकिन अब ध्यान डिजिटल एकीकरण के अगले स्तर की ओर बढ़ रहा है. एमएसएमई मंत्रालय की ‘रैंप’ (RAMP) योजना के तहत गुजरात में 750 से अधिक इकाइयों को वर्तमान में इंडस्ट्री 4.0 ईकोसिस्टम से जोड़ा जा रहा है, और देश भर में ऐसे ही ईकोसिस्टम की परिकल्पना की गई है.
वहीं पीजी सुब्रमण्यम, कार्यकारी सचिव, इंडियन कटिंग टूल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ने कहा कि देश में बढ़ते विनिर्माण बाजार के दम पर भारतीय कटिंग टूल उद्योग एक परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है. वैश्विक कटिंग टूल बाजार वर्तमान में लगभग 23 बिलियन अमेरिकी डॉलर का है और 2030 तक इसके लगभग 30 बिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि उद्योग के अनुमानों के अनुसार भारत की हिस्सेदारी वर्तमान में इस बाजार में केवल 15% के आसपास है. यह स्थिति भारतीय विनिर्माताओं के लिए घरेलू और निर्यात दोनों बाजारों में विस्तार के व्यापक अवसर छोड़ती है. इसके साथ ही, एमएसएमई को इस क्षेत्र के लिए उपलब्ध लगभग 40 सरकारी योजनाओं जिसमें स्टार्टअप्स के लिए समर्थन भी शामिल है उसके प्रति अधिक जागरूकता और आसान पहुंच की जरूरत है.
टूल्स एंड इक्विपमेंट एक्सपो 2026 एमएसएमई के लिए नई तकनीकों को खोजने और तकनीकी उन्नति को गति देने का एक महत्वपूर्ण मंच है. प्रदर्शनी सहायता और वित्तीय योजनाओं के माध्यम से सरकारी समर्थन जिसमें पात्र एमएसएमई के लिए ₹100 करोड़ तक का कोलैटरल-फ्री ऋण शामिल है.
यह उद्यमों को आधुनिक संयंत्र और मशीनरी अपनाने, क्षमता विस्तार करने और प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार करने में सक्षम बना सकता है. 9.5 करोड़ से अधिक एमएसएमई भारत की जीडीपी में 30% से अधिक का योगदान देते हैं और 42 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं. ऐसे में एमएसएमई-आधारित विनिर्माण को मजबूत करना तकनीकी प्रगति और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
अन्य विशेषज्ञों ने बताया कि टूल्स और उपकरण हर विनिर्माण उद्योग की रीढ़ होते हैं, जो ऑटोमोटिव सहित विभिन्न क्षेत्रों के कारखानों की उत्पादकता और उत्पादन में सहयोग करते हैं. जैसे-जैसे भारत उपभोग-आधारित अर्थव्यवस्था से विनिर्माण-आधारित विकास की ओर बढ़ रहा है, एक प्रतिस्पर्धी इकोसिस्टम के निर्माण के लिए प्रौद्योगिकी और प्रतिभा दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण होंगे. भारत के पास तकनीक, मशीनों और कलपुर्जों के स्थानीयकरण का बेहतरीन अवसर है, लेकिन जब तक हम एक कुशल कार्यबल के माध्यम से क्षमताओं का स्थानीयकरण नहीं करते, तब तक हमारी आपूर्ति श्रृंखला सही मायने में आत्मनिर्भर नहीं बन सकती. इसलिए भारत के विनिर्माण इकोसिस्टम को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए प्रौद्योगिकी अपनाने के साथ-साथ कौशल और प्रतिभा विकास को मजबूत करना अनिवार्य होगा.
इस बारे में दिल्ली सरकार की ओर से बताया गया कि टूल्स और उपकरणों का सीधा संबंध व्यावसायिक सुरक्षा से है, क्योंकि लगभग हर औद्योगिक गतिविधि में मशीनें, उपकरण या टूल्स शामिल होते हैं.उचित डिजाइन, रखरखाव और सुरक्षित उपयोग श्रमिकों की सुरक्षा करने के साथ-साथ उत्पादकता में सुधार कर सकता है, जबकि असुरक्षित उपकरण या कार्यप्रणाली दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं. ‘ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड, 2020’ के तहत दुर्घटना निवारण, खतरों की पहचान, जोखिम मूल्यांकन और सुरक्षित कार्यस्थलों पर अधिक बल दिया जा रहा है. सुरक्षा को उपकरणों के डिजाइन में बाद में जोड़ने के बजाय शुरुआत से ही उसमें शामिल किया जाना चाहिए, जिससे उद्योग दुर्घटनाओं पर केवल प्रतिक्रिया देने के बजाय जोखिमों के उत्पन्न होने से पहले ही उनकी पहचान और नियंत्रण करने की दिशा में आगे बढ़ सके.
इस टूल्स एंड इक्विपमेंट एक्सपो में 300 से अधिक प्रदर्शक आए हैं. भारत को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण केंद्र के रूप में उभारने के लिए भारत को निर्यात, बड़े पैमाने पर उत्पादन, लीन मैन्युफैक्चरिंग और क्लस्टर-आधारित विकास पर अपना ध्यान केंद्रित करना होगा. चीन का विनिर्माण अनुभव यह दिखाता है कि किस प्रकार उत्पादन का बड़ा पैमाना, कुशल उत्पादन प्रणालियां और एक मजबूत इकोसिस्टम वैश्विक प्रतिस्पर्धा का निर्माण कर सकते हैं. भारतीय उद्योगों को वैश्विक बाजारों की जरूरतों को पूरा करने के लिए निरंतर सरकारी प्रयासों, मजबूत बुनियादी ढांचे और बड़े पैमाने, क्लस्टर-आधारित व लीन मैन्युफैक्चरिंग की दिशा में सोच बदलकर उत्पादकता और प्रतिस्पर्धा में सुधार करना होगा. इन क्षमताओं के साथ भारत में सभी उत्पाद श्रेणियों में एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरने की पूरी क्षमता है.
ऐसे समय में जब भारत का टूल्स और इक्विपमेंट क्षेत्र विकास के एक महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर रहा है, प्रदर्शकों, आगंतुकों और उद्योग हितधारकों की मजबूत भागीदारी के साथ ‘टूल्स एंड इक्विपमेंट एक्सपो 2026’ की शुरुआत देखना बेहद उत्साहजनक हुई है. वर्तमान में भारत का हैंड और पावर टूल्स का निर्यात लगभग 1 बिलियन अमेरिकी डॉलर है, और 2035 तक इसे 25 बिलियन डॉलर से अधिक तक बढ़ाने की क्षमता है; ऐसे में भारत की विनिर्माण और निर्यात क्षमताओं को मजबूत करने का अवसर बहुत बड़ा है.



