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भारतीय लोगों को कैसा घर पसंद है? इस सर्वे ने खोला राज, बजट से लेकर लोकेशन का भी खुलासा

भारतीय लोगों को कैसा घर पसंद है, इस सर्वे में हुआ खुलासा.

भारतीय लोगों को कैसा घर पसंद है, इस सर्वे में हुआ खुलासा.

अहमदाबाद में 3BHK घरों की पसंद सबसे अधिक 57% रही. इसके बाद चेन्नई और दिल्ली-एनसीआर में 53-53% और हैदराबाद में 52% लोगों ने 3BHK को पसंद किया. बेंगलुरु और कोलकाता में यह आंकड़ा 46% रहा, जबकि पुणे में 47% लोगों की पसंद 3BHK रही. वहीं, 39% के साथ एमएमआर (MMR) में सर्वे में शामिल शहरों के बीच 3BHK की पसंद सबसे कम रही.

बड़े घरों की ओर बढ़ते रुझान के साथ अब होमबायर्स ज्यादा बजट वाले घरों की ओर भी रुख कर रहे हैं. 90 लाख रुपये से 1.5 करोड़ रुपये का सेगमेंट अब सबसे पसंदीदा बजट सीमा बन गया है. इससे पता चलता है कि खरीदार बेहतर जगह, बड़े आकार और घर की बेहतर गुणवत्ता के लिए ज्यादा राशि खर्च करने को तैयार हैं. सर्वेक्षण में यह भी सामने आया है कि 45 लाख रुपये से कम कीमत वाले घरों की पसंद पिछले कुछ वर्षों में काफी घटी है, जबकि ज्यादा कीमत वाले घरों को चुनने वाले खरीदारों की हिस्सेदारी बढ़ी है.

यह रुझान लगातार बढ़ती आवास कीमतों के बीच खास तौर पर देखने को मिल रहा है. इससे पता चलता है कि प्रीमियम घरों की ओर बढ़ती पसंद केवल कुछ निवेशकों तक सीमित नहीं है, बल्कि घर खरीदने वाले आम ग्राहकों की मांग में भी यह बदलाव तेजी से दिखाई दे रहा है.

एनारॉक ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा, “H1 2026 के आंकड़े बताते हैं कि घरों की मांग में प्रीमियम सेगमेंट की ओर रुझान लगातार बना हुआ है. 3BHK की मजबूत पसंद, ज्यादा बजट वाले घरों और 4BHK व उससे बड़े घरों में बढ़ती दिलचस्पी से साफ है कि अधिक कीमत के बावजूद खरीदार घर में ज्यादा जगह और बेहतर क्वालिटी को प्राथमिकता दे रहे हैं. खास बात यह है कि इस ट्रेंड को एंड-यूजर्स आगे बढ़ा रहे हैं. इसका मतलब है कि बड़े घरों को अब सिर्फ प्रीमियम खरीदारी के तौर पर नहीं, बल्कि लंबे समय की लाइफस्टाइल और वैल्यू के लिहाज से भी देखा जा रहा है. डेवलपर्स के लिए चुनौती और अवसर दोनों यही हैं कि बड़े घरों की इस मांग को सही लोकेशन, बेहतर कॉन्फिगरेशन और कीमत के हिसाब से सही वैल्यू के साथ पूरा किया जाए.”

सर्वे पर डेवलपर्स की क्या है राय

भारतीय लोग अब 3 बीएचके फ्लैट पसंद कर रहे हैं.

भारतीय लोग अब 3 बीएचके फ्लैट पसंद कर रहे हैं.

व्हाइटलैंड कॉरपोरेशन के डायरेक्टर-स्ट्रेटजी सुदीप भट्ट कहते हैं, ‘बड़े घरों के लिए बढ़ती पसंद आज के होमबायर्स की बदलती इच्छा को दर्शाती है. एनारॉक H1 2026 के सर्वे में करीब आधे लोगों ने 3BHK को अपनी पसंद बताया है, जबकि दिल्ली-NCR में 53% लोगों ने 3BHK को प्राथमिकता दी है. इससे साफ है कि खरीदारों के लिए अब ज्यादा जगह, आराम और भविष्य को ध्यान में रखकर तैयार की गई लाइफस्टाइल की अहमियत बढ़ रही है.’

पायनियर अर्बन लैंड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ऋषभ पेरीवाल कहते हैं, “अब मांग ऐसे घरों की ओर बढ़ रही है, जहां आज के परिवारों के लिए ज्यादा जगह, बेहतर सुविधा और आराम मिल सके. पायनियर अर्बन में हम इस बदलाव को गुरुग्राम में भी साफ तौर पर देख रहे हैं. होमबायर्स अब ऐसे अच्छी तरह प्लान किए गए घरों की तलाश कर रहे हैं, जहां बड़े लिविंग स्पेस के साथ प्रीमियम सुविधाएं और बेहतर लाइफस्टाइल का अनुभव मिले.’

अनहद डेवलपर्स के सीईओ आदिल अल्ताफ कहते हैं, “बड़े घरों के लिए बढ़ती पसंद बताती है कि आज के होमबायर्स अपने रहने की जगह को लेकर पहले से ज्यादा स्पष्ट हैं. करीब आधे लोगों की पहली पसंद 3BHK है, जबकि दिल्ली-NCR में 53% लोगों ने 3BHK को प्राथमिकता दी है. इससे साफ है कि ज्यादा स्पेस, आराम और बेहतर लाइफस्टाइल देने वाले घरों की मांग लगातार बढ़ रही है.बड़े घर के साथ प्राइवेसी, प्रीमियम सुविधाएं और बेहतर लिविंग एक्सपीरियंस भी खरीदारों की प्राथमिकताओं में शामिल हैं. ज्यादा कीमत वाले घरों की बढ़ती मांग यह भी दिखाती है कि एंड-यूजर्स के बीच प्रीमियम रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स को लेकर स्वीकार्यता बढ़ रही है.’

जबकि कार्यन ग्रुप के डायरेक्टर वरुण गर्ग कहते हैं, “बड़े घरों के लिए बढ़ती पसंद NCR के होमबायर्स की सोच में आ रहे महत्वपूर्ण बदलाव को दिखाती है. दिल्ली-गुरुग्राम ही नहीं गाजियाबाद में भी हमें इसी तरह का बदलाव देखने को मिल रहा है. खास तौर पर एंड-यूजर्स अब बड़े और बेहतर तरीके से प्लान किए गए घरों में अपग्रेड करना चाहते हैं. ज्यादा कीमत वाले घरों की ओर बढ़ता रुझान पूरे क्षेत्र में लोगों की बढ़ती आकांक्षाओं और बदलती लाइफस्टाइल जरूरतों को दर्शाता है.’

बढ़ती कीमतें अभी भी बढ़ा रहीं चिंता घरों की बढ़ती कीमतों के बावजूद बड़े आकार के घरों को लेकर खरीदारों का उत्साह बना हुआ है. हालांकि, सर्वे से यह भी पता चलता है कि बढ़ती कीमतें अब भी खरीदारों के लिए बड़ी चिंता हैं. 65% उत्तरदाता मौजूदा कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर कम से कम मध्यम स्तर की चिंता जताते हैं, जबकि 40% इसे लंबे समय तक जारी रहने वाला ट्रेंड मानते हैं.

इसके बावजूद, 44% खरीदार अपनी तय योजना के अनुसार घर खरीदने की दिशा में आगे बढ़ने का इरादा रखते हैं. इससे पता चलता है कि ऊंची कीमतों ने कुल खरीदारी की इच्छा को बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं किया है. वहीं, 38% खरीदार अपनी खरीदारी में थोड़ी देरी कर सकते हैं, जबकि केवल 18% लोग इसे अनिश्चित समय के लिए टालने या खरीदारी रद्द करने पर विचार कर रहे हैं.

प्रॉपर्टी के सीमित विकल्प भी परेशानी खरीदारी में देरी करने या इसे रद्द करने वाले लोगों के लिए सबसे बड़ी बाधा अफोर्डेबिलिटी यानी घर खरीदने की क्षमता है. 44% लोगों ने इसे मुख्य कारण बताया है. इसके बाद 32% लोगों ने अपने बजट में उपलब्ध प्रॉपर्टी के सीमित विकल्पों को दूसरी बड़ी वजह बताया. बढ़ती कीमतों से प्रभावित खरीदार अब शहर के बाहरी इलाकों में प्रॉपर्टी तलाश रहे हैं, खरीदारी का समय आगे बढ़ा रहे हैं या कुछ समय के लिए किराए के घर में रहने का विकल्प चुन रहे हैं. इससे पता चलता है कि कीमतों में बढ़ोतरी लोगों के अपना घर खरीदने की इच्छा को कम करने के बजाय उनके खरीदारी के तरीके को बदल रही है.

सिक्का ग्रुप के चेयरमैन हरविंदर सिंह सिक्का कहते हैं कि रिपोर्ट में साफ है कि बड़े कॉन्फिगरेशन, बेहतर स्पेस और सुविधाओं वाले घरों की मांग में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. खासकर 3BHK जैसे घर परिवारों की बदलती जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ भविष्य की उपयोगिता को भी ध्यान में रखते हैं. हालांकि कीमतों में बढ़ोतरी के चलते खरीदार बजट और लोकेशन को लेकर अधिक सतर्क हुए हैं, लेकिन घर खरीदने की मूल जरूरत बनी हुई है. ऐसे माहौल में डेवलपर्स के लिए जरूरी है कि वे गुणवत्ता, लोकेशन, सुविधाओं और कीमत के बीच ऐसा संतुलन तैयार करें, जो खरीदारों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप हो.

वहीं एसकेए ग्रुप के निदेशक संजय शर्मा ने कहा, “ANAROCK कंज्यूमर सेंटिमेंट सर्वे से पता चलता है कि घर खरीदारों की पसंद में लगातार बदलाव आ रहा है. बढ़ती कीमतों के कारण ग्राहक अपने बजट, लोकेशन और खरीदारी के समय पर दोबारा विचार कर रहे हैं, लेकिन इससे घर खरीदने की उनकी मूल इच्छा पर कोई खास असर नहीं पड़ा है. 68% लोगों का घर खुद के रहने के लिए खरीदना यह दिखाता है कि आवासीय मांग अभी भी मुख्य रूप से जरूरत पर आधारित है. यह भी स्पष्ट होता है कि घर खरीदारों के लिए गुणवत्ता, लोकेशन, बजट और लंबे समय के मूल्य के बीच सही संतुलन उपलब्ध कराना बेहद महत्वपूर्ण है.

कुल मिलाकर, सर्वे का निष्कर्ष है कि कीमतों में बढ़ोतरी हाउसिंग डिमांड को कमजोर करने के बजाय यह बदल रही है कि खरीदार क्या खरीदें, कहां खरीदें और कब खरीदें.

एंड-यूजर्स से बनी हुई है हाउसिंग डिमांडरेजिडेंशियल रियल एस्टेट में निवेश के प्रति बढ़ते रुझान के बावजूद, खुद रहने के लिए घर खरीदना अब भी सबसे बड़ी वजह बनी हुई है. सर्वे में शामिल 68% उत्तरदाता अपने इस्तेमाल के लिए घर खरीद रहे हैं, जबकि 32% लोग निवेश के उद्देश्य से खरीदारी कर रहे हैं. इससे पता चलता है कि बड़े घरों की मांग सट्टेबाजी के बजाय वास्तविक आवासीय जरूरतों से काफी हद तक जुड़ी हुई है.

रेंटल इनकम भी लोगों के दिमाग में सर्वे में यह भी सामने आया कि खरीदार अब घर को लंबे समय के वित्तीय एसेट के तौर पर भी देख रहे हैं. प्रॉपर्टी की निवेश क्षमता का आकलन करते समय कम से कम 77% लोग रेंटल इनकम यानी किराये से होने वाली आय को महत्वपूर्ण या बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं, भले ही वे घर खुद रहने के लिए खरीद रहे हों. किराये से नियमित आय के साथ प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ने की संभावना भी खरीदारों के लिए एक बड़ा आकर्षण है. वहीं, 67% उत्तरदाताओं ने संभावित रीसेल वैल्यू यानी प्रॉपर्टी के दोबारा बिकने पर मिलने वाली कीमत को महत्वपूर्ण या बहुत महत्वपूर्ण माना है. इससे साफ है कि खरीदार अब घर को खुद रहने की जरूरत के साथ-साथ लंबे समय के वित्तीय एसेट के रूप में भी देख रहे हैं.

न्यू लॉन्च प्रोजेक्ट्स के प्रति बढ़ा आकर्षणबड़े घरों की बढ़ती पसंद का असर नए प्रोजेक्ट्स में भी देखने को मिल रहा है. सर्वे में करीब 34% उत्तरदाता न्यू लॉन्च प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता देते हैं, जबकि 18% लोग रेडी-टू-मूव-इन (RTM) घरों को पसंद करते हैं. H1 2026 में रेडी-टू-मूव घरों और न्यू लॉन्च का अनुपात 18:34 रहा, जबकि H1 2022 में यह 30:25 था.

नए प्रोजेक्ट को चुनने में डेवलपर की साख सबसे अहम कारक रही, जिसे 34% लोगों ने प्राथमिकता दी. इसके बाद 21% लोगों ने शुरुआती कीमत में मिलने वाले फायदे, जैसे अर्ली-बर्ड प्राइसिंग या कम शुरुआती वित्तीय प्रतिबद्धता को महत्वपूर्ण माना.

निवेश के लिए रियल एस्टेट अब भी मजबूत पसंदनिवेश के विकल्प के तौर पर रेजिडेंशियल रियल एस्टेट अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए है. सर्वे में 60% उत्तरदाताओं ने रियल एस्टेट को निवेश के लिए पसंद किया. इसके मुकाबले 20% लोगों की पसंद स्टॉक यानी शेयर बाजार, 11% की गोल्ड और 9% की फिक्स्ड डिपॉजिट रही.

सर्वे में यह भी सामने आया कि रियल एस्टेट के अलावा दूसरे एसेट्स में निवेश करने वाले 44% उत्तरदाताओं की योजना भविष्य में अपने निवेश से होने वाले लाभ का इस्तेमाल घर खरीदने के लिए करने की है.

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