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Horse Hoof Disease: घोड़े के खुर में दिखे ये संकेत तो हो जाएं सावधान, छोटी लापरवाही पड़ सकती है भारी

Last Updated:September 20, 2026, 19:35 IST

Horse Hoof Disease: घोड़े के खुरों में दरार, संक्रमण, सड़न, चोट या जरूरत से ज्यादा बढ़ना उसकी चाल और सेहत पर सीधा असर डाल सकता है. जानिए खुरों की समस्याओं के प्रमुख संकेत, बचाव के आसान उपाय और कब पशु चिकित्सक की सलाह लेना जरूरी है.

घोड़ों के खुरों में होने वाली समस्याएं पशुपालकों के लिए बड़ी चिंता का कारण बन सकती हैं. खुरों में दरार पड़ना, ज्यादा बढ़ जाना, संक्रमण होना, चोट लगना या सड़न जैसी दिक्कतें देखी जाती हैं. गीली और गंदी जगह पर लंबे समय तक रहने से खुरों में संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है. वहीं बहुत सूखी और कठोर जमीन पर लगातार चलने से खुरों में दरार या चोट हो सकती है. समय पर ध्यान नहीं देने पर छोटी समस्या भी गंभीर रूप ले सकती है.

खुरों की बीमारी का सीधा असर घोड़े की चाल और सामान्य सेहत पर पड़ता है। खुर में दर्द होने पर घोड़ा ठीक से चलने में परेशानी महसूस कर सकता है और लंगड़ाकर चल सकता है। दर्द के कारण वह कम चलना-फिरना पसंद करता है, जिससे उसकी शारीरिक गतिविधि घट सकती है। कुछ मामलों में लगातार दर्द और गलत चाल के कारण पैरों के दूसरे हिस्सों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। इसलिए घोड़े के खुरों में किसी भी तरह का बदलाव दिखाई दे तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

खुरों की परेशानी से बचाव के लिए साफ-सफाई सबसे जरूरी उपायों में शामिल है. पशुपालकों को नियमित रूप से घोड़े के खुरों की जांच करनी चाहिए और उनमें फंसी मिट्टी, पत्थर या गंदगी को सावधानी से साफ करना चाहिए. अस्तबल और घोड़े के खड़े रहने की जगह को साफ तथा जरूरत के अनुसार सूखा रखना भी जरूरी है. घोड़े को बहुत गीली, कीचड़ वाली जगह पर लंबे समय तक खड़ा रखने से बचना चाहिए. साथ ही खुरों की नियमित कटाई और सही आकार बनाए रखना जरूरी होता है.

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घोड़े के खुरों की देखभाल के लिए प्रशिक्षित व्यक्ति या पशु चिकित्सक की सलाह लेना उपयोगी रहता है. खुर बहुत लंबे होने, उनमें गहरी दरार दिखने, बदबू आने, सूजन होने या घोड़े के लंगड़ाने पर खुद से इलाज करने के बजाय विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए. जरूरत पड़ने पर खुर की सफाई, कटाई या नाल लगाने का काम प्रशिक्षित व्यक्ति से कराया जाना चाहिए. घोड़े के रहने की जगह और जमीन की स्थिति के अनुसार खुरों की देखभाल की अवधि भी तय की जा सकती है.

पशुपालक थोड़ी सावधानी बरतकर खुरों से जुड़ी कई परेशानियों को समय रहते पहचान सकते हैं. घोड़ा चलते समय असामान्य चाल दिखाए, किसी पैर पर कम वजन डाले, बार-बार पैर उठाए या खुर में गर्माहट, सूजन और दुर्गंध दिखाई दे तो इसे सामान्य नहीं मानना चाहिए. संतुलित आहार, साफ पानी, नियमित व्यायाम, साफ-सुथरा आश्रय और खुरों की नियमित जांच घोड़े की अच्छी सेहत बनाए रखने में मदद करते हैं. गंभीर दर्द या संक्रमण की स्थिति में पशु चिकित्सक से उपचार कराना जरूरी है.

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September 20, 2026, 19:35 IST

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