दिव्यांगता नहीं रोक पाई सपनों की डोली, 50 जोड़ों ने थामा एक-दूसरे का हाथ, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ विवाह

उदयपुर: उदयपुर में 50 जोड़ों ने एक-दूसरे का हाथ थामकर सात फेरे लिए. इनमें कई ऐसे युवक-युवतियां शामिल रहे, जिन्होंने जिंदगी में मुश्किलों का सामना करते हुए अपनी नई शुरुआत की.किसी ने बैसाखी के सहारे जीवन आगे बढ़ाया तो किसी ने कृत्रिम अंग के जरिए चलना सीखा. अब इन्हीं जोड़ों ने साथ मिलकर अपना घर बसाने का सपना पूरा किया.
दरअसल, नारायण सेवा संस्थान के सेवा महातीर्थ, बड़ी में 19 और 20 सितंबर को 47वां दिव्यांग एवं निर्धन सामूहिक विवाह समारोह आयोजित किया गया. इसमें देश के अलग-अलग राज्यों से आए 100 वर-वधू 50 जोड़ों के रूप में विवाह बंधन में बंधे. वैदिक मंत्रोच्चार और मंगलगीतों के बीच सभी ने सात फेरे लिए और एक-दूसरे का जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया.
जहां इलाज के लिए पहुंचे, वहीं मिला जीवनसाथीइस सामूहिक विवाह की खास बात यह रही कि कई वर-वधुओं का इलाज, ऑपरेशन, कृत्रिम अंग या सहायक उपकरण और कौशल प्रशिक्षण नारायण सेवा संस्थान में ही हुआ है.कभी इलाज और पुनर्वास के लिए संस्थान पहुंचे ये युवक-युवतियां अब उसी परिसर से जीवनसाथी का हाथ थामकर नई जिंदगी की ओर रवाना हुए. कई लोगों ने दुर्घटना के बाद खुद को दोबारा खड़ा किया तो कुछ ने जन्मजात दिव्यांगता के बावजूद आत्मनिर्भर बनने की कोशिश की. विवाह के दौरान उनकी पहचान उनकी दिव्यांगता से नहीं, बल्कि दूल्हा-दुल्हन के रूप में थी.
सिर्फ शादी नहीं, घर बसाने की भी तैयारीसंस्थान की ओर से नवदंपतियों को गृहस्थी शुरू करने के लिए जरूरी सामान भी दिया गया. इसमें पलंग, गद्दा, बिस्तर, अलमारी, गैस चूल्हा-सिलेंडर, किचन सेट, प्रेशर कुकर, तवा-कढ़ाई, पंखा, सिलाई मशीन और ट्रॉली बैग समेत रोजमर्रा की जरूरत का सामान शामिल रहा.जरूरत के अनुसार व्हीलचेयर और अन्य सहायक उपकरण भी दिए गए. संस्थान अध्यक्ष प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि दिव्यांगजनों को दया नहीं, बल्कि सम्मान और अवसर की जरूरत है.उन्होंने बताया कि पिछले 22 वर्षों में संस्थान के माध्यम से 2,582 दिव्यांग युवक-युवतियों के विवाह कराए जा चुके हैं. उन्होंने कहा कि इस समारोह में ऐसे जोड़े भी हैं, जिनमें किसी दिव्यांग ने सक्षम व्यक्ति को और किसी सक्षम व्यक्ति ने दिव्यांग को जीवनसाथी चुना है.
50 जोड़ों ने दिया बराबरी का संदेशदो दिवसीय समारोह में भजन-कीर्तन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विवाह संपन्न हुए. संत-महात्माओं, समाजसेवियों, जनप्रतिनिधियों और देश-विदेश से आए अतिथियों ने नवदंपतियों को आशीर्वाद दिया. कई अतिथि कन्यादान में भी सहभागी बने. समारोह में जोधपुर के स्वतंत्रता सेनानी परिवार की सुशीला परिहार को सेवा भावना के लिए सम्मानित किया गया.इस दौरान यश मेहता, पलक अग्रवाल, निदेशक वंदना अग्रवाल, सहसंस्थापिका कमला देवी अग्रवाल मौजूद रहे.संस्थापक कैलाश मानव ने भी नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया.
विश्वास से नई शुरुआत की जा सकतीइन 50 जोड़ों ने सात फेरे लेकर सिर्फ अपना नया जीवन शुरू नहीं किया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि जिंदगी में परिस्थितियां कितनी भी मुश्किल क्यों न हों, साथ और विश्वास से नई शुरुआत की जा सकती है.



