1 गेंद, 1 विकेट और 3-0 से क्लीन स्वीप…सांस रोक देने वाले मैच में जीता ऑस्ट्रेलिया

नई दिल्ली. जीत मुट्ठी से जब फिसल जाती है, तो उसका दर्द शब्दों में बयां करना मुमकिन नहीं होता. तीसरे वनडे मैच के आखिरी ओवर में मैदान पर सन्नाटा पसरा था. एक गेंद, एक रन का फैसला और ऑस्ट्रेलिया का आखिरी विकेट. पूरा जिम्बाब्वे जश्न मनाने को बेताब खड़ा था, मेजबान टीम के फैंस की सांसें रुकी हुई थीं और किस्मत का सिक्का हवा में उछल चुका था. जिम्बाब्वे इतिहास रचने की बिल्कुल दहलीज पर था, लेकिन क्या वह उस अंतिम पल में बाजी मार पाया या किस्मत ने आखिरी वक्त पर पासा पलट दिया.
272 रनों के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम की शुरुआत किसी बुरे सपने से कम नहीं रही. कप्तान मिचेल मार्श महज 8 रन और खतरनाक ट्रेविस हेड सिर्फ 6 रन बनाकर पवेलियन लौट गए. इन दोनों ही धाकड़ सलामी बल्लेबाजों को ब्रैड इवांस ने अपनी धारदार गेंदबाजी के जाल में फंसाया. शुरुआती झटकों के बाद टीम मुश्किल में नजर आ रही थी. ऐसे वक्त में जोश इंग्लिस और कूपर कोनोली ने पारी को संभाला. दोनों के बीच तीसरे विकेट के लिए 52 रनों की एक जुझारू अर्धशतकीय साझेदारी देखने को मिली. हालांकि, जब यह जोड़ी सेट होती दिख रही थी, तभी ग्रीम क्रीमर ने कोनोली को 21 रन पर बोल्ड करके जिम्बाब्वे को बड़ी सफलता दिला दी.
जोश इंग्लिस और कैरी की ठोस साझेदारीइसके बाद मैदान पर जोश इंग्लिस का तूफान देखने को मिला. उन्होंने एलेक्स कैरी के साथ मिलकर चौथे विकेट के लिए 85 रनों की बेहद महत्वपूर्ण साझेदारी की. इस पार्टनरशिप में एलेक्स कैरी ने संयम के साथ 34 रनों का योगदान दिया. टीम जब आराम से लक्ष्य की ओर बढ़ रही थी, तभी एक बार फिर ब्रैड इवांस ने अपनी गेंदबाजी का जादू चलाया और कैरी को कैच आउट कराकर इस साझेदारी को तोड़ दिया.
ऑस्ट्रेलियाई मिडिल ऑर्डर ताश के पत्तों की तरह बिखराकैरी के आउट होते ही मैच का रुख अचानक बदल गया. ऑस्ट्रेलियाई मध्यक्रम ताश के पत्तों की तरह ढह गया. एक समय 162 रन पर 3 विकेट गंवाकर मजबूत स्थिति में दिख रही ऑस्ट्रेलियाई टीम अचानक 206 रन पर 7 विकेट गंवाकर गहरे संकट में आ गई. जिम्बाब्वे के गेंदबाजों ने एक के बाद एक विकेट चटकाकर मेजबान टीम के समर्थकों में जीत की नई उम्मीद जगा दी.
शतकवीर इंग्लिस की अनुशासित और संयमित पारीलेकिन इन सब के बीच विकेटकीपर बल्लेबाज जोश इंग्लिस एक चट्टान की तरह एक छोर पर डटे रहे. उन्होंने दबाव की परिस्थितियों में अपनी परिपक्वता का परिचय देते हुए 102 गेंदों में 103 रनों की शतकीय पारी खेली. हैरान करने वाली बात यह रही कि इंग्लिस की इस लाजवाब शतकीय पारी में एक भी छक्का शामिल नहीं था. उन्होंने बिना कोई जोखिम उठाए चौकों और सिंगल-डबल के दम पर स्कोरबोर्ड को चलाए रखा. दिलचस्प बात यह भी रही कि पूरी ऑस्ट्रेलियाई पारी के दौरान केवल मिचेल मार्श ही इकलौते ऐसे बल्लेबाज रहे जिनके बल्ले से एक छक्का निकला.
सिकंदर रजा का झटका और बढ़ता रोमांचजब मैच पूरी तरह रोमांचक मोड़ पर आ चुका था, तब 42वें ओवर की पहली गेंद पर सिकंदर रजा ने शतकवीर जोश इंग्लिस को आउट कर मैच में सबसे बड़ा उलटफेर कर दिया. इंग्लिस के आउट होते ही जिम्बाब्वे के खेमे में गूंज सुनाई देने लगी, क्योंकि ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए अब भी 45 रनों की दरकार थी और उसके पास विकेट नहीं बचे थे. देखते ही देखते 245 के कुल स्कोर पर ऑस्ट्रेलिया का नौवां विकेट भी गिर गया.
एलिस और स्पेंसर का जुझारू संघर्षजिम्बाब्वे अब जीत से केवल एक विकेट दूर था, जबकि ऑस्ट्रेलिया को जीत के लिए करिश्मे की जरूरत थी. ऐसे अति-रोमांचक मोड़ पर नेथन एलिस और स्पेंसर जॉनसन के बीच जो जंग देखने को मिली, उसने इस मैच को इतिहास के पन्नों में दर्ज करा दिया. एलिस ने दबाव को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और 36 रनों की एक अति-महत्वपूर्ण पारी खेली. दूसरी ओर स्पेंसर जॉनसन ने क्रीज पर टिककर उनका पूरा साथ निभाया.
आखिरी गेंद पर ऑस्ट्रेलिया की ऐतिहासिक जीतमैच की अंतिम सांसों तक चले इस संघर्ष में आखिरकार मेहमान टीम ने बाजी मार ली. ऑस्ट्रेलिया ने महज 1 गेंद शेष रहते लक्ष्य हासिल कर लिया और 1 विकेट से यह सांस रोक देने वाला मुकाबला अपने नाम कर लिया. इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही ऑस्ट्रेलिया ने 3 मैचों की इस वनडे सीरीज में जिम्बाब्वे का 3-0 से सूपड़ा साफ कर दिया.
जिम्बाब्वे की पारी और इवांस का प्रदर्शनइससे पहले, मैच में टॉस जीतकर बल्लेबाजी करने उतरी जिम्बाब्वे की टीम ने बोर्ड पर 271 रनों का सम्मानजनक स्कोर खड़ा किया था. मेजबान टीम की ओर से कप्तान सिकंदर रजा ने कप्तानी पारी खेलते हुए 81 रन बनाए थे, जबकि क्रेग एर्विन ने 59 और इनोसेंट काइया ने 55 रनों का योगदान दिया था. गेंदबाजी में जिम्बाब्वे के लिए ब्रैड इवांस सबसे सफल गेंदबाज रहे जिन्होंने 4 विकेट झटके. ग्रीम क्रीमर और सिकंदर रजा ने भी 2-2 विकेट हासिल किए, लेकिन इतने शानदार प्रदर्शन के बावजूद अंत में किस्मत ने जिम्बाब्वे का साथ नहीं दिया.



