दुश्मन की छाती पर उतरेंगे टैंक और तोपें, IAF को मिलेंगे 60 बाहुबली, C-130J सुपर हरक्यूलिस से भी तगड़ी ताकत

नई दिल्ली. दुश्मनों की हर नापाक हरकत को नेस्तनाबूद करने के लिए भारतीय वायुसेना अब अपनी आसमानी ताकत में महा-विस्फोट करने जा रही है. सरहदों पर चीन और पाकिस्तान की हर चालबाजी को धूल चटाने के लिए रक्षा मंत्रालय ने करीब 1 लाख करोड़ रुपए के मेगा प्लान पर मुहर लगाने की तैयारी कर ली है. इसके तहत सोवियत दौर के पुराने पड़ चुके एएन-32 विमानों को हमेशा के लिए रिटायर कर उनकी जगह 60 बेहद घातक और आधुनिक मीडियम ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट (एमटीए) खरीदे जाएंगे. वियतनाम टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक यह डील न केवल भारतीय आसमान को अभेद्य बनाएगी, बल्कि भारत के घरेलू एयरोस्पेस इकोसिस्टम में ऐतिहासिक क्रांति लेकर आएगी.
इस महापरियोजना के तहत 12 विमान सीधे उड़ने के लिए तैयार हालत में मिलेंगे, जबकि 48 भारी-भरकम विमानों का निर्माण सीधे ‘मेक इन इंडिया’ के तहत भारत की धरती पर ही किया जाएगा. यह फैसला विदेशी ताकतों पर निर्भरता खत्म कर देश को सैन्य शक्ति का महाबली बनाने की दिशा में सबसे करारा प्रहार माना जा रहा है.
18 से 30 टन वजन उठाकर सीमा पर उतरेंगे नए बाहुबलीलद्दाख की दुर्गम चोटियों से लेकर रेगिस्तान के आखिरी छोर तक हथियारों और सैनिकों को झटके में उतारने की रणनीति अब बदल चुकी है. नए विमान 18 से 30 टन तक का भारी सैन्य साजो-सामान और भारी तोपें पलक झपकते ही युद्धक्षेत्र में पहुंचाने में सक्षम होंगे. पुराने एएन-32 के मुकाबले यह नया बेड़ा तेज रफ्तार, लंबी रेंज और अत्याधुनिक एवियोनिक्स से लैस होगा, जिससे एयरलिफ्ट ऑपरेशन कई गुना घातक हो जाएंगे.
सुपर हरक्यूलिस जैसी घातक क्षमता और ‘मेक इन इंडिया’ का वारयह मेगा डील केवल विमानों की खरीद नहीं, बल्कि भारत में रक्षा विनिर्माण का सबसे बड़ा सेंटर खड़ा करने का मास्टरस्ट्रोक है. वर्तमान में वायुसेना के पास मौजूद सी-130जे सुपर हरक्यूलिस 20 टन तक वजन उठा सकता है, लेकिन नए विमान इससे भी बड़ी चुनौती से निपटने के लिए तैयार होंगे.
देश में ही बनेंगे 48 विमानभारत में बनने वाले 48 विमानों में स्वदेशी कलपुर्जों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होगा. इससे देश का विमानन उद्योग पूरी तरह आत्मनिर्भर बनेगा और जंग के वक्त तुरंत सपोर्ट मिलेगा.
वहीं ब्राजील की एयरोस्पेस कंपनी एम्ब्रेयर का सी-390 मिलेनियम विमान भी इस कार्यक्रम का एक संभावित दावेदार माना जा रहा है. यह जेट इंजन-आधारित नई पीढ़ी का सैन्य परिवहन विमान है, जिसकी अधिकतम भार वहन क्षमता 26 टन है. रिपोर्ट के अनुसार, सी-390 का उपयोग केवल सैन्य रसद ढुलाई तक सीमित नहीं है. यह सैनिकों और माल की ढुलाई, मेडिकल निकासी, खोज एवं बचाव अभियान, अग्निशमन और मानवीय सहायता मिशनों जैसे कई कार्यों को अंजाम दे सकता है. इसकी एक खासियत यह भी है कि यह अस्थायी या बिना पक्के रनवे पर भी संचालन कर सकता है.
सी-390 ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी तेजी से पहचान बनाई है और कई नाटो सदस्य देशों ने इसे अपनाया है. इससे यह मध्यम श्रेणी के सैन्य परिवहन विमानों में प्रमुख विकल्पों में शामिल हो गया है. भारत के लिए इस परियोजना का औद्योगिक महत्व भी है. रिपोर्ट के अनुसार, एम्ब्रेयर ने भारतीय कार्यक्रम के लिए महिंद्रा डिफेंस के साथ साझेदारी की है. इस प्रस्ताव के तहत भारत में विनिर्माण और रखरखाव सुविधाएं विकसित करने की भी योजना है.
कार्यक्रम का महत्व भारत की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए और बढ़ जाता है. देश की उत्तरी और पूर्वोत्तर सीमाएं दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण सैन्य परिचालन क्षेत्रों में गिनी जाती हैं. ऐसे क्षेत्रों में सैनिकों, हथियारों, रसद सामग्री और राहत उपकरणों की तेजी से आपूर्ति के लिए आधुनिक परिवहन विमान बेहद महत्वपूर्ण हैं.
सैन्य उपयोग के अलावा ये विमान अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहायता अभियानों में भी भारत की भूमिका को मजबूत करेंगे. रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि जून 2026 में वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद चलाए गए ‘ऑपरेशन अमिस्ताद’ के दौरान भारतीय वायुसेना के सी-17 ग्लोबमास्टर III विमानों ने राहत और चिकित्सा सहायता पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उस अभियान में दो सी-17 विमान भारतीय सेना के 60 पैरा फील्ड हॉस्पिटल की 41 सदस्यीय मेडिकल टीम, चिकित्सा उपकरण, राहत सामग्री और दो भीष्म क्यूब पोर्टेबल अस्पतालों को वेनेजुएला लेकर गए थे.



