राजा को सपना आया और राजमहल के अखाड़े से प्रकट हुई मूर्ति, रहस्यों से भरी है बैठे हनुमान की स्थापना की कहानी

Last Updated:September 22, 2026, 12:42 IST
Karauli Hindi News: करौली में भद्रावती नदी के तट पर बैठी हुई मुद्रा में विशाल हनुमान जी विराजमान है. हनुमान जी की यह चमत्कारी प्रतिमा अद्वितीय और स्वयंभू है. जो करौली के राजमहलों में बने अखाड़े से सपना को देकर प्रकट हुई थी. जानिए करौली के बेटे हनुमान की प्रकट होने की रहस्यों से भरी कहानी.
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करौली. राजस्थान की धार्मिक नगरी करौली में हनुमान जी के कई प्राचीन मंदिर हैं. लेकिन भद्रावती नदी के तट पर स्थित बैठे हनुमान जी का मंदिर बेहद चमत्कारी और दुर्लभ माना जाता है. सैकड़ों वर्ष प्राचीन इस मंदिर की खासियत इसमें विराजमान हनुमान जी की अद्वितीय स्वयंभू प्रतिमा है. हनुमान जी की यह अद्वितीय प्रतिमा विश्राम मुद्रा में बैठी हुई है. इसी वजह से इन्हें बैठे हनुमान के नाम से जाना जाता है. इस प्रतिमा की ख्याति भी सात समंदर पार तक है. यहां केवल करौली के ही लोग नहीं, बल्कि देशभर सहित विदेशों से भी भक्त दर्शन करने के लिए आते हैं.
बैठे हनुमान की मान्यता भी निराली है. इनके भक्त कहते हैं कि केवल दर्शन मात्र से ही बैठे हनुमान सभी मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं. जो भी एक बार इनके दर्शन कर लेता है, फिर उसका इस प्रतिमा से ऐसा जुड़ाव हो जाता है कि वह इन्हें भूल नहीं पाता है. इस प्रतिमा के प्रकट होने और स्थापना की कहानी भी रहस्यमयी है. आए दिन भक्तों को बैठे हनुमान के चमत्कार भी देखने को मिलते हैं. आइए जानते हैं सबसे पहले क्या कहते हैं बैठे हनुमान के भक्त.
ऐसी विशाल प्रतिमा नहीं है कहींकरौली के बैठे हनुमान मंदिर से बचपन से जुड़े हुए प्रेम स्वरूप शर्मा कहते हैं कि हनुमान जी की बैठी हुई मुद्रा में ऐसी विशाल प्रतिमा यथासंभव ही कहीं देखने को मिल सकती है. वहीं दूसरी ओर बैठे हनुमान को आराध्य देव मानने वाले स्थानीय हरि बल्लभ गुप्ता बताते हैं कि उन्होंने ऐसी प्रतिमा अपने 75 साल के जीवन में कहीं नहीं देखी है. यह विश्राम करते हुए बैठी मुद्रा में बैठे हुए हनुमान जी हैं. यह बेहद चमत्कारी भी है और भक्तों की मनोकामनाओं को दर्शन से ही पूर्ण कर देते हैं. आपद और विपदाओं को केवल दर्शन मात्र से ही टाल देते हैं.
विदेश से भी आते हैं भक्त दर्शन करनेस्थानीय निवासी शिवम शर्मा बताते हैं कि बैठे हनुमान के दर्शन करने देश से ही नहीं, बल्कि विदेश से भी भक्त आते हैं. उन्होंने बताया कि एक बार यहां ऑस्ट्रेलिया से एक भक्त आए थे. उन्होंने भी कहा कि ऐसे हनुमान जी भारत में केवल राजस्थान के करौली में हैं. शिवम शर्मा भी कहते हैं कि उन्होंने अपने जीवनकाल में हनुमान जी की ऐसी बैठी मुद्रा वाली विशाल प्रतिमा केवल करौली में देखी है. लोकल 18 से खास बातचीत में उन्होंने यह भी कहा कि बैठे हनुमान अपने भक्तों को सपने में दर्शन भी देते हैं और आए दिन उनके चमत्कार की कहानियां भी सुनने को मिलती हैं.
पंचमुखी भोलेनाथ की पूजा करने के लिए आया करतीइस मंदिर में शनिवार और मंगलवार के दिन भक्तों की खास भीड़ रहती है. सबसे ज्यादा भीड़ नवरात्रि के दौरान देखने को मिलती है, जब यहां अखंड रामायण के पाठ होते हैं. खासतौर से जो लोग रोजगार के चलते करौली से बाहर रहते हैं, वे दीपावली और दशहरे के दिन इनके दर्शन करने जरूर आते हैं. इस मंदिर की खासियत केवल बैठे हनुमान ही नहीं, यहां पर प्राचीन शिवालय भी है, जो रियासतकाल का बताया जाता है. बैठे हनुमान के विराजमान होने से पहले केवल यहां मनकामेश्वर महादेव ही विराजमान थे. सावन के महीने में यहां रानियां मनकामेश्वर पंचमुखी भोलेनाथ की पूजा करने के लिए आया करती थीं.
राजा को सपना देकर अखाड़े से प्रकट हुए थे बैठे हनुमानकरौली के वरिष्ठ इतिहासकार वेणुगोपाल शर्मा बताते हैं कि करौली के बैठे हनुमान की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है. इनके प्रकट होने की कहानी करौली के राजमहलों से जुड़ी हुई है. वह बताते हैं कि लगभग 1747 के आसपास करौली के सबसे पराक्रमी राजा गोपाल सिंह जी को एक दिन रात में सपना देकर राजमहल में बने अखाड़े से बैठे हनुमान प्रकट हुए थे.
स्थापना की कहानी भी है रहस्यमयी इतिहासकार वेणुगोपाल शर्मा कहते हैं कि बैठे हनुमान के प्रकट होने की कहानी ही नहीं, बल्कि स्थापना की कहानी भी रहस्यमयी है. जब वह अखाड़े से प्रकट हुए तो उन्हें मंडरायल दुर्ग में स्थापित करने का निर्णय लिया गया था. फिर जब उन्हें बैलगाड़ी के सहारे मंडरायल दुर्ग ले जाया जा रहा था, तभी अचानक रास्ते में, जहां आज बैठे हनुमान विराजमान हैं, वहां कई बैलगाड़ियों के पहिए खुल गए. उस वक्त लोगों ने इसे हनुमान जी का संकेत मानते हुए शिवालय के बाहर बने बरामदे में ही बैठे हनुमान जी को विराजमान कर दिया.इतिहासकार शर्मा बताते हैं कि तभी से करौली के मनकामेश्वर महादेव की पहचान गौण हो गई और इस मंदिर को बैठे हनुमान मंदिर के नाम से ही पहचाना जाने लगा.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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Karauli,Rajasthan
First Published :
September 22, 2026, 12:42 IST



