Rangauri Handicraft: उदयपुर की मां-बेटी की मेहनत का कमाल, उदयपुर से निकला ‘रंगौरी’ पहुंचा 18 देशों के मंच तक

Last Updated:September 22, 2026, 16:12 IST
Rangauri Handicraft: उदयपुर की मां-बेटी गौरी और वंदना पालीवाल ने अपने हस्तशिल्प ब्रांड ‘रंगौरी’ के जरिए मेवाड़ की कला को नई पहचान दी है. क्रोशिया खिलौनों से लेकर कुंदन ज्वैलरी और होम डेकोर तक, उनके हाथों से बने उत्पाद नई दिल्ली की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में 18 देशों के कारीगरों के बीच आकर्षण का केंद्र बने. करीब डेढ़ साल पहले शुरू हुआ उनका छोटा सा काम अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच चुका है.
उदयपुर. इस शहर की पहचान सिर्फ झीलों और महलों तक ही सीमित नहीं है. यहां की कला और हस्तशिल्प भी अब देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं. इसका उदाहरण उदयपुर की मां-बेटी की जोड़ी ने पेश किया है. गौरी पालीवाल ने अपनी मां वंदना पालीवाल के साथ मिलकर शुरू किए हस्तशिल्प ब्रांड ‘रंगौरी’ को दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया. नई दिल्ली में आयोजित हस्तशिल्प प्रदर्शनी में 18 देशों के कारीगरों के बीच उदयपुर की इस कला ने अपनी अलग पहचान बनाई.
करीब डेढ़ साल पहले गौरी ने अपनी मां के सहयोग से ऑनलाइन कोचिंग और हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार करने का काम शुरू किया था. धीरे-धीरे यह काम एक स्टार्टअप का रूप लेता गया, मां-बेटी की कोशिश थी कि भारतीय हस्तशिल्प की पारंपरिक कला को बरकरार रखते हुए ऐसे डिजाइन तैयार किए जाएं, जो आज की युवा पीढ़ी को भी पसंद आएं. इसी सोच के साथ ‘रंगौरी’ में पारंपरिक कारीगरी को आधुनिक डिजाइन के साथ जोड़ा गया.
क्रोशिया खिलौनों से लेकर कुंदन ज्वैलरी तक
दिल्ली की प्रदर्शनी में रंगौरी के कई हस्तनिर्मित उत्पाद आकर्षण का केंद्र रहे, इनमें क्रोशिया के खिलौने, सजावटी फूल, बालों के सामान, होम डेकोर आइटम, पारंपरिक बंदनवार, वॉल हैंगिंग, रेडीमेड रंगोलियां और मोतियों-कुंदन से तैयार आभूषण शामिल रहे. उत्पादों में पारंपरिक जरी-कढ़ाई, मोती और कुंदन के साथ आधुनिक डिजाइन का इस्तेमाल किया गया है. गौरी बताती हैं कि किसी भी प्रोडक्ट को तैयार करने से पहले उसकी थीम, रंग और पैटर्न पर काम किया जाता है. इसके बाद उसकी मजबूती और फिनिशिंग पर ध्यान दिया जाता है. यही वजह है कि इनके बनाए उत्पादों में पारंपरिक कला के साथ आधुनिक लुक भी नजर आता है.
18 देशों के कारीगरों के बीच दिखी उदयपुर की कला
नई दिल्ली के नेशनल क्राफ्ट्स म्यूजियम एवं हस्तकला अकादमी में आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में 18 देशों के कारीगरों ने हिस्सा लिया. एक ही जगह पर अलग-अलग देशों और राज्यों की पारंपरिक कलाओं को देखने का मौका मिला. यहां बिहार के सत्तू-मखाना, ओडिशा की कोरापुट कॉफी, राजस्थान की लाख की चूड़ियां और टेराकोटा, कश्मीर की पेपर-माशे कला के साथ बेलारूस, ईरान, रूस और दक्षिण अफ्रीका की पारंपरिक कलाएं भी प्रदर्शित की गई. इसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर उदयपुर की मां-बेटी की जोड़ी ने अपने हस्तशिल्प उत्पादों के जरिए मेवाड़ की कला और भारतीय परंपरा को नए अंदाज में पेश किया. छोटे स्तर से शुरू हुआ ‘रंगौरी’ अब उदयपुर से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच चुका है.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Udaipur,Rajasthan
First Published :
September 22, 2026, 16:12 IST



