कम उम्र में लिया आध्यात्मिक संकल्प, दो भाइयों ने मुनि आदित्यसागर को श्रीफल चढ़ाकर अपनाया ब्रह्मचर्य का मार्ग

Last Updated:September 23, 2026, 21:42 IST
Udaipur Hindi News: मालदास स्ट्रीट स्थित आराधना भवन में आचार्य हीर विजय सूरि के स्वर्गारोहण दिवस पर गुणानुवाद सभा हुई. दादाबाड़ी में साध्वी विद्युतप्रभा ने पर्युषण को आत्मशुद्धि और आत्मावलोकन का अवसर बताया. वहीं देवेन्द्र धाम में डॉ. सुरेन्द्र मुनि ने कहा कि भगवान महावीर की शिक्षाओं को केवल सुनना नहीं, बल्कि उन्हें अपने जीवन में उतारना ही सच्ची साधना है.
उम्र महज 13 और 17 साल, जब बच्चे पढ़ाई, खेलकूद और अपने भविष्य के सपनों में व्यस्त रहते हैं. लेकिन इंदौर के रहने वाले दो सगे भाइयों ने इस उम्र में सांसारिक जीवन से विरक्त होकर संयम और ब्रह्मचर्य के रास्ते पर चलने का संकल्प लिया. सेक्टर-11 स्थित आदिनाथ भवन में मुनि आदित्यसागर महाराज की धर्मसभा में कबीर जैन और मीत जैन ने उन्हें श्रीफल अर्पित किया.
आजीवन संयम व्रत धारण करने की भावना व्यक्त की. दोनों के इस संकल्प से धर्मसभा में मौजूद श्रावक-श्राविकाएं भावुक हो गए.बताया गया कि दोनों भाई अपने माता-पिता के साथ मुनि आदित्यसागर महाराज के सान्निध्य में रह रहे थे.
नियमित रूप से गुरु भक्ति करने और प्रवचन सुनने के दौरान उनके मन में धीरे-धीरे वैराग्य की भावना जागी. सुबह दोनों ने गुरुदेव के सामने धर्ममार्ग पर चलने और ब्रह्मचर्य का पालन करने का संकल्प रखा. उनके दृढ़ भाव को देखते हुए मुनि आदित्यसागर महाराज ने उन्हें अनुमति प्रदान की.
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यह प्रसंग धर्मसभा में सामने आया तो माहौल भावुक हो गया. कई श्रावक-श्राविकाओं की आंखों से आंसू छलक पड़े. किसी के चेहरे पर आश्चर्य था, तो कोई दोनों भाइयों के संकल्प की अनुमोदना कर रहा था. आदिनाथ भवन में मौजूद समाजजनों ने दोनों के त्याग और वैराग्य की भावना की सराहना की.
अध्यक्ष पारस चित्तौड़ा ने बताया कि दोनों भाई लंबे समय से गुरु के सान्निध्य में रहकर धार्मिक गतिविधियों से जुड़े थे. प्रवचनों और गुरु भक्ति का उनके जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा. छोटी उम्र में लिए गए इस संकल्प की चर्चा अब जैन समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में भी हो रही है.
दशलक्षण पर्व के तहत शहर के अलग-अलग जैन मंदिरों में भी धार्मिक आयोजन हुए. सेक्टर-14 महावीर भवन में पं. रविकीर्ति ने उत्तम तप धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि इच्छाओं पर नियंत्रण रखना और मन, वचन व कर्म को संयमित करना तप का हिस्सा है. हिरणमगरी सेक्टर-9 स्थित शांतिनाथ जिनालय में अभिषेक, पूजन और शांतिधारा हुई. 27 सितंबर को श्रीजी की पालकी शोभायात्रा निकाली जाएगी.
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September 23, 2026, 21:42 IST



