Pitru Paksha dates 2026: पूर्वजों के लिए जरूर करें ये काम, पितरों को याद करने का खास समय, जानिए मान्यताएं

Last Updated:September 22, 2026, 20:46 IST
Pitru Paksha dates 2026: इस बार पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ समाप्त होगा. इस दौरान पूर्वजों की तिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य करने की परंपरा है. जानिए पितृपक्ष का महत्व, श्राद्ध की तिथियां और सर्वपितृ अमावस्या से जुड़ी खास धार्मिक मान्यताएं.
हिंदू धर्म में पितृपक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने का विशेष काल माना गया है. मान्यता है कि इन दिनों पितरों का स्मरण कर उनके निमित्त श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान और दान-पुण्य करने से पूर्वज प्रसन्न होते हैं और परिवार पर सुख-समृद्धि की कृपा बनी रहती है. यही वजह है कि सनातन परंपरा में पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध कर्म को विशेष महत्व दिया गया है.
इस बार पितृपक्ष 26 सितंबर से शुरू होगा और 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ इसका समापन होगा. इस दौरान अलग-अलग तिथियों के अनुसार पितरों का श्राद्ध किया जाएगा. जिन लोगों को अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात है, उनके लिए उसी तिथि पर श्राद्ध करने की परंपरा बताई गई है. वहीं, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है, उनके लिए सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध करने की धार्मिक मान्यता है.
करौली के पंडित धीरज शर्मा बताते हैं कि श्राद्ध का अर्थ ही श्रद्धा से किया गया कर्म है. पितृपक्ष में तिल, कुश और जल से तर्पण करने की परंपरा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार तर्पण के माध्यम से वंशज अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं. श्राद्ध और तर्पण केवल कर्मकांड नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों को याद करने और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का माध्यम भी माना जाता है.
Add as Preferred Source on Google
मान्यता है कि विधि-विधान से किए गए श्राद्ध कर्म से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है. इसी कारण पितृपक्ष में लोग अपने पूर्वजों की तिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण, दान और ब्राह्मण भोज आदि करते हैं. करौली के कर्मकांडी विशेषज्ञ श्याम बाबू भट्ट बताते हैं कि धार्मिक मान्यताओं में पितृपक्ष को पितरों का विशेष काल माना गया है. ऐसी मान्यता है कि इस अवधि में पितृ अपने वंशजों के घर आते हैं और उनसे श्राद्ध एवं तर्पण की अपेक्षा रखते हैं.
मान्यता के अनुसार जब वंशज श्रद्धापूर्वक अपने पितरों का स्मरण करते हुए श्राद्ध और तर्पण करते हैं तो पितृ प्रसन्न होते हैं और परिवार को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं. यही वजह है कि पितृपक्ष में पूर्वजों के लिए किए जाने वाले कर्मों को विशेष महत्व दिया जाता है. श्याम बाबू भट्ट के अनुसार धार्मिक मान्यताओं में पितरों का श्राद्ध और तर्पण न करने को उचित नहीं माना गया है. ऐसी मान्यता है कि पूर्वजों का श्राद्ध कर्म नहीं करने पर पितृ दोष का प्रभाव हो सकता है.
धार्मिक मान्यताओं में पितृ दोष को परिवार की वंश वृद्धि में बाधा, संतान संबंधी परेशानियों, विवाह में रुकावट, पारिवारिक कलह और आर्थिक परेशानियों से जोड़कर देखा जाता है.पितृ श्राद्ध के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराने, वस्त्र, अन्न और दक्षिणा देने की परंपरा भी बताई गई है. इसके अलावा जरूरतमंदों को भोजन और दान देना भी पितृपक्ष के महत्वपूर्ण कार्यों में शामिल माना जाता है.
इस साल पितृपक्ष का अंतिम दिन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या होगी. इस दिन उन सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों के लिए श्राद्ध किया जा सकता है, जिनकी मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है या जिनका किसी कारण से निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं हो पाया.इसलिए पितृपक्ष को केवल धार्मिक अनुष्ठान का समय न मानकर अपने पूर्वजों को याद करने, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और परिवार की परंपराओं से जुड़ने का अवसर भी माना जाता है.
न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। राजस्थान की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें|First Published :
September 22, 2026, 20:46 IST



