Agriculture: मूंग पर सिर्फ 11 रुपए और मूंगफली पर 254 रुपए बढ़ा MSP, जानें सीकर मंडी का लेटेस्ट रेट

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मूंग पर सिर्फ 11 रुपए और मूंगफली पर 254 रुपए बढ़ा MSP, जानें सीकर मंडी का रेट
Last Updated:September 25, 2026, 10:40 IST
Moong and Groundnut MSP: खरीफ सीजन में सीकर के किसानों को मूंग, मूंगफली समेत अन्य फसलों के लिए नई एमएसपी दरों का लाभ मिलेगा. मूंग का समर्थन मूल्य 8,780 रुपए और मूंगफली का 7,517 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है. वहीं बाजरे का एमएसपी 2,900, तुअर का 8,450 और उड़द का 8,200 रुपए प्रति क्विंटल किया गया है. किसानों के लिए सरकारी खरीद के साथ मंडी भाव भी महत्वपूर्ण रहेंगे, क्योंकि खुले बाजार में बेहतर दाम मिलने पर किसान मंडी में बिक्री को प्राथमिकता दे सकते हैं. सीकर में मूंग और मूंगफली की सरकारी खरीद के लिए 19 केंद्र तय किए गए हैं, जिससे किसानों को नजदीकी केंद्र पर उपज बेचने का विकल्प मिलेगा.
सीकर जिले के मूंग और मूंगफली उत्पादक किसानों के लिए खरीफ सीजन की सरकारी खरीद को लेकर तस्वीर साफ हो गई है. केंद्र सरकार ने खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी एमएसपी की नई दरें घोषित कर दी है. इस बार मूंग का समर्थन मूल्य 8,780 रुपए और मूंगफली का 7,517 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है. हालांकि पिछले साल की तुलना में मूंग के एमएसपी में केवल 11 रुपए और मूंगफली में 254 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है. जिले में सरकारी खरीद के लिए केंद्रों की संख्या भी बढ़ाई गई है.
मूंग के समर्थन मूल्य की बात करें तो पिछले साल किसानों को सरकारी खरीद के लिए 8,769 रुपए प्रति क्विंटल का एमएसपी मिला था. अब इसमें महज 11 रुपए की बढ़ोतरी कर 8,780 रुपए किया गया है. वहीं मूंगफली का एमएसपी पिछले साल 7,263 रुपए प्रति क्विंटल था, जिसे इस बार बढ़ाकर 7,517 रुपए किया गया है. यानी मूंगफली के दाम में 254 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है. किसानों का कहना है कि खेती की लागत, खाद-बीज, सिंचाई, मजदूरी और डीजल के खर्च को देखते हुए एमएसपी में हुई बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं है.
इस बार खरीफ फसलों में सिर्फ मूंग और मूंगफली ही नहीं, बल्कि बाजरा, तुअर और उड़द के समर्थन मूल्य में भी बढ़ोतरी की गई है. बाजरे का एमएसपी 2,775 से बढ़कर 2,900 रुपए प्रति क्विंटल हुआ है. तुअर में 450 रुपए की बढ़ोतरी के साथ एमएसपी 8,450 रुपए और उड़द में 400 रुपए की बढ़ोतरी के साथ 8,200 रुपए प्रति क्विंटल किया गया है. इस तरह अलग-अलग फसलों में बढ़ोतरी का अंतर काफी अलग है, जबकि मूंग के एमएसपी में बढ़ोतरी सबसे कम रही है.
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एमएसपी केवल सरकारी खरीद की दर नहीं है, बल्कि इसका असर खुले बाजार के भाव पर भी दिखाई देता है. अनाज कारोबारी सुभाष बूबना के अनुसार यदि सरकारी एमएसपी बाजार भाव से ऊपर रहता है और सरकारी खरीद सक्रिय होती है तो किसान खरीद केंद्रों पर उपज बेचने को प्राथमिकता दे सकते हैं. इससे मंडियों में आवक कम हो सकती है और कारोबारियों के बीच उपलब्ध माल खरीदने की प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है. इसका असर बाजार भाव पर भी पड़ सकता है.
इसके उलट यदि खुले बाजार में किसानों को एमएसपी से बेहतर भाव मिलने लगे तो किसान सरकारी खरीद केंद्रों के बजाय मंडियों में उपज बेचना पसंद कर सकते हैं. ऐसी स्थिति में मंडियों में आवक बढ़ने से खरीददारों के बीच प्रतिस्पर्धा कम हो सकती है और भाव पर दबाव आ सकता है. इसलिए किसानों के लिए केवल घोषित एमएसपी ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि सीजन के दौरान मंडी भाव और सरकारी खरीद की वास्तविक स्थिति भी अहम रहेगी.
सीकर जिले में इस बार मूंग और मूंगफली की सरकारी खरीद के लिए 19 केंद्र बनाए गए हैं. सीकर कृषि उपज मंडी समिति मुख्यालय, धोद और गोठड़ा भूकरान में खरीद की व्यवस्था रहेगी. दांतारामगढ़ क्षेत्र में दांतारामगढ़ क्रय-विक्रय सहकारी समिति, पलसाना मंडी और केवीएसएस दांतारामगढ़ को केंद्र बनाया गया है. लक्ष्मणगढ़ और फतेहपुर में संबंधित क्रय-विक्रय सहकारी समितियों पर खरीद होगी.
इसके अलावा खंडेला क्षेत्र में खंडेला और तपिपल्या जीएसएस, जबकि श्रीमाधोपुर क्षेत्र में मंडी परिसर सहित भारणी, नाथूसर, कंचनपुर, सिहोड़ी, गढ़टकनेत और सिमारला जागीर के केंद्र शामिल हैं. नीमकाथाना क्षेत्र में क्रय-विक्रय सहकारी समिति, पाटन और चला जीएसएस पर खरीद होगी. केंद्र सरकार की ओर से एमएसपी घोषित होने के बाद सहकारिता विभाग ने खरीद केंद्रों की सूची तैयार कर ली है. इस बार किसानों की सुविधा के लिए खरीद केंद्रों की संख्या 17 से बढ़ाकर 19 की गई है. अब सरकारी खरीद का आधिकारिक कार्यक्रम जारी होगा.
First Published :
September 25, 2026, 10:40 IST



