तारबंदी योजना बनी किसान रामवीर सिंह की फसल का सुरक्षा कवच, जानिए आप कैसे उठा सकते हैं इसका फायदा?

Last Updated:September 25, 2026, 12:56 IST
Tarbandi Yojana Rajasthan: धौलपुर जिले के पिपरौवा निवासी किसान रामवीर सिंह के लिए राजस्थान सरकार की तारबंदी योजना एक बड़ा सुरक्षा कवच साबित हुई है. आवारा और जंगली पशुओं से अपनी फसल को बचाने के लिए उन्होंने 400 मीटर खेत की तारबंदी करवाई. कृषि विभाग से उन्हें इसके लिए 40 हजार रुपये का अनुदान मिला. तारबंदी के बाद फसल सुरक्षित होने से न केवल उनका उत्पादन बढ़ा, बल्कि उनकी आय में भी शानदार सुधार हुआ है. अब रामवीर सिंह अन्य किसानों को भी कृषि विभाग की इस लाभकारी योजना का फायदा उठाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.
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Tarbandi Yojana Rajasthan: आवारा पशुओं से बर्बाद होती थी फसल, 40 हजार की मदद से किसान ने बदल दी पूरी तस्वीर
Dholpur: राजस्थान में खेती करने वाले किसानों के लिए आवारा और जंगली पशु हमेशा से एक बहुत बड़ी समस्या रहे हैं. दिन-रात मेहनत करके उगाई गई फसल को जब छुट्टा पशु रातों-रात बर्बाद कर देते हैं, तो किसान को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. किसानों को कड़ाके की ठंड में रात-रात भर जागकर अपने खेतों की रखवाली करनी पड़ती है. लेकिन राजस्थान सरकार की ‘तारबंदी योजना’ अब ऐसे किसानों के लिए एक बहुत बड़ा वरदान साबित हो रही है. धौलपुर जिले के पिपरौवा गांव के रहने वाले प्रगतिशील किसान रामवीर सिंह की सफलता की कहानी इस योजना की उपयोगिता का एक उत्कृष्ट और जीता-जागता उदाहरण है.
पिपरौवा निवासी रामवीर सिंह लंबे समय से आवारा पशुओं और नीलगाय द्वारा अपनी फसल को पहुंचाए जा रहे नुकसान से बेहद परेशान थे. कई बार उनकी पूरी की पूरी फसल नष्ट हो जाती थी, जिससे उनकी लागत भी नहीं निकल पाती थी. इस समस्या से स्थायी निजात पाने के लिए रामवीर सिंह ने कृषि विभाग से संपर्क किया और तारबंदी योजना के तहत आवेदन किया. स्वीकृति मिलने के बाद उन्होंने अपने खेत के चारों ओर करीब 400 मीटर लंबी तारबंदी करवाई. इस जाली और कांटेदार तार ने उनके खेत के लिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच का काम किया. अब उनके खेत में बाहरी पशु प्रवेश नहीं कर पाते हैं और उनकी फसल पूरी तरह से सुरक्षित लहलाहा रही है.
40 हजार रुपये का मिला सरकारी अनुदानयोजना के प्रावधानों के अनुसार, रामवीर सिंह को इस कार्य के लिए कृषि विभाग की ओर से 40 हजार रुपये का भारी-भरकम अनुदान (सब्सिडी) प्रदान किया गया. इस आर्थिक सहायता से उन पर तारबंदी का पूरा आर्थिक बोझ नहीं पड़ा. रामवीर सिंह बताते हैं कि तारबंदी के बाद फसल सुरक्षित होने से उनके कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. जब फसल का नुकसान रुका और पैदावार बढ़ी, तो स्वाभाविक रूप से उनकी आय में भी काफी अच्छा सुधार हुआ है. आज उनका परिवार आर्थिक रूप से पहले से ज्यादा सशक्त महसूस कर रहा है. रामवीर सिंह की इस सफलता को देखकर अब आसपास के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं. उन्होंने खुद अन्य किसानों से अपील की है कि वे भी आगे आएं और कृषि विभाग की इन कल्याणकारी योजनाओं का भरपूर लाभ उठाएं.
क्या है राजस्थान सरकार की तारबंदी योजनाराजस्थान सरकार की तारबंदी योजना राज्य के किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करने की एक बेहद खास और महत्वाकांक्षी पहल है. इस योजना के तहत किसानों को अपने खेतों के चारों ओर कांटेदार तार या जाली लगाने के लिए सरकार द्वारा आर्थिक मदद यानी सब्सिडी दी जाती है. इस योजना का मुख्य मकसद फसलों को आवारा और जंगली पशुओं से शत-प्रतिशत बचाना है, ताकि किसानों की मेहनत बेकार न जाए और राज्य का कृषि उत्पादन बढ़ सके.
योजना में मिलने वाली मदद और अनुदान का गणितइस योजना के तहत किसानों को उनकी श्रेणी के अनुसार अलग-अलग सब्सिडी दी जाती है, जो इस प्रकार है:
सामान्य किसान: ऐसे किसानों को कुल खर्च का 50% या अधिकतम 40,000 रुपये (जो भी कम हो) का अनुदान दिया जाता है.
लघु और सीमांत किसान: इन श्रेणी के किसानों को अतिरिक्त लाभ देते हुए कुल खर्च का 60% या अधिकतम 48,000 रुपये तक की सहायता दी जाती है.
सामुदायिक (समूह) आवेदन: यदि किसान समूह में आवेदन करते हैं, तो उन्हें सर्वाधिक 70% या 56,000 रुपये तक की आर्थिक मदद मिलती है.
लंबाई की सीमा: यह सरकारी सहायता अधिकतम 400 रनिंग मीटर की लंबाई तक की तारबंदी के लिए ही प्रदान की जाती है.
आवेदन के लिए जरूरी शर्तें और आवश्यक कागजातइस योजना का लाभ लेने के लिए आवेदक किसान के पास कम से कम 0.5 हेक्टेयर (लगभग 2 बीघा) कृषि भूमि का होना अनिवार्य है. यदि किसान समूह बनाकर आवेदन कर रहे हैं, तो उन सभी किसानों की जमीनें आसपास (एक ही जगह पर) होनी चाहिए. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कृषि विभाग से बाकायदा मंजूरी मिलने के बाद ही तारबंदी का काम शुरू करना होता है. आवेदन करने वाले किसानों के पास आधार कार्ड, जन आधार कार्ड, खेत की नवीनतम जमाबंदी, खेत का नक्शा और बैंक खाते की पासबुक होना आवश्यक है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Dhaulpur,Dhaulpur,Rajasthan
First Published :
September 25, 2026, 12:44 IST



