ऑस्कर में पहुंचीं ‘गोंधल’ की क्या है कहानी? देवी-देवताओं पर बनी फिल्म ने 33 फिल्मों को पछाड़ा, क्यों हुआ विवाद

नई दिल्ली. ऑस्कर की रेस में इस बार भारत की तरफ से दो फिल्में शामिल हैं. फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया (FFI) ने शुक्रवार, 18 सितंबर को ऐलान किया कि इस बार मराठी फिल्म ‘गोंधल’ ऑस्कर के लिए भारत की ऑफिशियल एंट्री है. संतोष दवाखर के निर्देशन में बनी फिल्म ‘गोंधल’ 99वें एकेडमी अवार्ड्स में ‘बेस्ट इंटरनेशनल फीचर’ कैटेगरी में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी. ये मराठी फिल्म 33 फिल्मों को पछाड़ ऑस्कर की रेस में पहुंची.
99वें एकेडमी अवॉर्ड्स के लिए कुल 33 फिल्मों के बीच कड़ी टक्कर थी जिनमें हिंदी सिनेमा से लेकर रीजनल सिनेमा की फिल्में शामिल थीं. 33 फिल्मों में से 14 फिल्में हिंदी भाषा में थीं जबकि मराठी, तेलुगु और गुजराती में चार-चार फिल्में शामिल थीं. इसके अलावा, तमिल में तीन और मलयालम, कोन्याक और नेपाली भाषा में एक-एक फिल्म और एक साइलेंट फिल्म, ऑस्कर में भारत का प्रतिनिधित्व करने की रेस में शामिल थी.
देवी-देवताओं पर बनी है ‘गोंधल’
फिल्म फेडरेशन ऑफ इंडिया की जूरी में पी. शेषाद्रि, विजय पाटकर, हुतु कनोडिया, शांति कुमार, संदीप पराशर, संजय पाटिल, साबू जोसफ, अनिल थॉमस, विवेक वासवानी, बिजोत दासगुप्ता, हासन, वासन और तान्तिष्ठा चटर्जी शामिल थे. जूरी ने 33 फिल्मों का मूल्यांकन करने के बाद गोंधल को ऑस्कर के लिए चुना. ये मराठी थ्रिलर फिल्म महाराष्ट्र की लोकपरंपरा से प्रेरित है. ऋषभ शेट्टी की ‘कांतारा’ की तरह ही फिल्म की पूरी कहानी लोक परंपरा और देवी-देवताओं के इर्द-गिर्द बुनी गई है.
‘गोंधल’ की कहानी महाराष्ट्र की लोकपरंपरा और धार्मिक मान्यताओं की पृष्ठभूमि में बुनी गई है. फिल्म का केंद्र देवी-देवताओं और उनसे जुड़ी आस्थाओं के साथ इंसानी रिश्तों और सामाजिक परिस्थितियों को दिखाना है. फिल्म अपने विषय के जरिए परंपरा, विश्वास और बदलते समय के बीच पैदा होने वाले सवालों को सामने रखती है.
फिल्म का टाइटल भी महाराष्ट्र की एक पारंपरिक धार्मिक लोककला ‘गोंधल’ से जुड़ा है. यह परंपरा देवी-देवताओं की आराधना से संबंधित मानी जाती है और महाराष्ट्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है. इसी लोकपरंपरा को फिल्म की कहानी और उसके भावनात्मक संसार में महत्वपूर्ण जगह दी गई है. फिल्म का निर्देशन संतोष दवाखर ने किया है जिसमें लोकपरंपरा के सहारे सस्पेंस-थ्रिलर दिखाया गया है. गोंधल में इशिता देशमुख और अनुज प्रभु ने लीड रोल अदा किया है. इशिता एक ऐसी महिला के रोल में हैं जो गोंधल लोकपरंपरा को घातक खेल का रूप देती है.
अनुराग कश्यप के बयान से हुआ विवाद
मराठी फिल्म ‘गोंधल’ ऑस्कर में भारत की तरफ से ऑफिशियल एंट्री बनने के बाद विवादों में भी घिरी रही. दिग्गज डायरेक्टर अनुराग कश्यप ने फिल्म पर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि भारत की तरफ से ऑस्कर के लिए फिल्म का चयन गलत है. अनुराग कश्यप ने अपने लेटेस्ट इंटरव्यू में ‘द लंचबॉक्स’ और ‘ऑल वी इमैजिन ऐज लाइट’ का उदाहरण देते हुए कहा कि उनका मानना है कि इन फिल्मों को भारत की ओर से ऑस्कर के लिए चुना जा सकता था.
अनुराग कश्यप ने नहीं देखी ‘गोंधल’
अनुराग कश्यप ने कहा, ‘हम बिल्कुल गलत फिल्मों का चयन करते हैं. यहां तक कि जब हमारे पास ‘द लंचबॉक्स’ और ‘ऑल वी इमैजिन ऐज़ लाइट’ जैसी सही फिल्मों को चुनने का मौका था, तब भी हमने इसे गंवा दिया. अनुराग कश्यप ने फिल्म के चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि भारत में इस प्रोसेस में भी काफी पॉलिटिक्स है. हालांकि अनुराग कश्यप ने अपने बयान के साथ ही साफ किया कि उन्होंने ‘गोंधल’ देखी नहीं है और वो बिना फिल्म देखे उसपर किसी तरह का कोई कमेंट नहीं करना चाहते हैं.



