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HIV का शक है तो लक्षण का न करें इंतजार, डॉक्टर से जानें जांच, विंडो पीरियड और 72 घंटे वाले PEP की जानकारी

बागेश्वर: पिथौरागढ़ में एचआईवी से जुड़ी हालिया घटना के बाद संक्रमण को लेकर जागरूकता बढ़ाना जरूरी है. एचआईवी एक ऐसा वायरस है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करता है. समय पर जांच और उपचार से संक्रमित व्यक्ति स्वस्थ जीवन जी सकता है. एचआईवी से बचाव के लिए संक्रमण फैलने के तरीकों, शुरुआती लक्षणों और जांच के सही समय को समझना बेहद जरूरी है.

एचआईवी कैसे फैलता है, सामान्य मेल-जोल से नहींबागेश्वर जिला अस्पताल में तैनात चिकित्सक डॉ. सावित्री शुक्ला बताती हैं कि एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के साथ हाथ मिलाने, गले मिलने, साथ बैठने, खाना खाने या सामान्य सामाजिक संपर्क से नहीं फैलता है. संक्रमण मुख्य रूप से संक्रमित रक्त, वीर्य, योनि स्राव और मां के दूध के माध्यम से फैल सकता है. असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सुई या सिरिंज का इस्तेमाल और संक्रमित रक्त चढ़ना इसके प्रमुख जोखिमों में शामिल हैं. इसलिए यौन संबंधों में कंडोम का सही तरीके से इस्तेमाल करना, नई डिस्पोजेबल सिरिंज का प्रयोग और जांचे हुए रक्त का उपयोग जरूरी है. रेजर, ब्लेड और खून के संपर्क में आने वाली वस्तुएं साझा करने से बचना चाहिए.

एचआईवी के प्रमुख लक्षण क्या हैं?एचआईवी संक्रमण के शुरुआती चरण में कई लोगों में कोई लक्षण दिखाई नहीं देता है. कुछ लोगों को संक्रमण के शुरुआती हफ्तों में बुखार, सिरदर्द, गले में खराश, त्वचा पर चकत्ते और शरीर में थकान जैसे फ्लू से मिलते-जुलते लक्षण हो सकते हैं. संक्रमण बढ़ने पर वजन कम होना, लगातार बुखार, दस्त, खांसी और लिम्फ नोड्स में सूजन जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं. हालांकि, केवल इन लक्षणों के आधार पर एचआईवी संक्रमण की पुष्टि नहीं की जा सकती है. एचआईवी की स्थिति जानने का भरोसेमंद तरीका जांच है.

संभावित संपर्क के बाद पीईपी (PEP) की जानकारी जरूरीअगर किसी व्यक्ति का एचआईवी संक्रमण के संभावित जोखिम वाले रक्त या शारीरिक द्रव से संपर्क हुआ है, जैसे असुरक्षित यौन संबंध, कंडोम टूटना या संक्रमित सुई से चोट लगना, तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए. ऐसी स्थिति में डॉक्टर पोस्ट-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस की सलाह देते हैं. पीईपी एंटीरेट्रोवायरल दवाओं का एक चिकित्सकीय उपचार है, जिसका उद्देश्य संभावित संपर्क के बाद एचआईवी संक्रमण के जोखिम को कम करना है. इसे जितनी जल्दी शुरू किया जाए उतना बेहतर होता है. पीईपी संभावित संपर्क के 72 घंटे यानी तीन दिन के भीतर शुरू होना चाहिए और इसके लिए डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना जरूरी है. आमतौर पर उपचार 28 दिनों तक चल सकता है, लेकिन दवाओं का निर्णय चिकित्सक जोखिम का आकलन करने के बाद लेते हैं. स्वयं से दवा शुरू नहीं करनी चाहिए.

एचआईवी टेस्ट कब कराना चाहिए: विंडो पीरियड समझेंसंभावित संक्रमण के तुरंत बाद एचआईवी जांच कराने पर रिपोर्ट नेगेटिव आ सकती है. इसका कारण विंडो पीरियड है, जिसमें संक्रमण होने के बावजूद जांच में वायरस या उससे संबंधित संकेत दिखाई नहीं दे सकते हैं. अलग-अलग जांचों की पहचान करने की समय-सीमा अलग होती है. इसलिए शुरुआती नेगेटिव रिपोर्ट को अंतिम निष्कर्ष नहीं मानना चाहिए. डॉक्टर की सलाह के अनुसार दोबारा जांच कराना जरूरी हो सकता है. संभावित संपर्क के बाद जांच और फॉलो-अप का समय चिकित्सक से तय करें.

सरकारी अस्पतालों में मुफ्त और पूरी तरह गोपनीय जांचभारत में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के अंतर्गत एकीकृत परामर्श एवं परीक्षण केंद्र पर एचआईवी जांच और परामर्श की सुविधा उपलब्ध है. नजदीकी सरकारी जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज के परामर्श और परीक्षण केंद्र में जांच की जानकारी ली जा सकती है. यहां जांच की जानकारी और आपका नाम गोपनीय रहता है. जांच और परामर्श की उपलब्धता के बारे में स्थानीय केंद्र से पुष्टि करें. गर्भवती महिलाओं को समय पर एचआईवी जांच करानी चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर मां और बच्चे को संक्रमण से बचाने के लिए चिकित्सकीय कदम उठाए जा सकें.

एनएसीओ (NACO) हेल्पलाइन 1097 पर लें सीधी जानकारीएचआईवी से संबंधित जानकारी, परामर्श और नजदीकी परामर्श और परीक्षण केंद्र या उपचार केंद्र की जानकारी के लिए राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1097 पर संपर्क किया जा सकता है. यह हेल्पलाइन 24 घंटे उपलब्ध है. एचआईवी को लेकर डर या भेदभाव के बजाय सही जानकारी, समय पर जांच और चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता देना जरूरी है.

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