Agriculture: पशुपालकों की बदलने वाली है तकदीर, ऊंटनी के दूध पर शोध को मिला पेटेंट, सेल्फ लाइफ भी हुई दोगुनी

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किसानों के लिए खुशखबरी, ऊंटनी के दूध पर शोध को मिला पेटेंट, सेल्फ लाइफ भी बढ़ी
Last Updated:September 27, 2026, 10:02 IST
Camel milk Receives Patent: ऊंटनी के दूध के उपयोग को लेकर राजस्थान के वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण शोध उपलब्धि हासिल की है. राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर की स्वदेशी दुग्ध उत्पाद परियोजना के तहत ऊंटनी के दूध पर किए गए शोध को भारत सरकार ने पेटेंट प्रदान किया है. डॉ. राजकुमार बेरवाल के अनुसार शोध के दौरान ऊंटनी के दूध के कैसीन प्रोटीन पाउडर पर अल्ट्रासोनिक किरणों और एंजाइमों के जरिए हाइड्रोलिसिस की प्रक्रिया अपनाई गई. इस तकनीक के इस्तेमाल से तैयार दुग्ध उत्पादों की पोषण गुणवत्ता में सुधार हुआ और उनकी यील्ड भी बढ़ी. इसके अलावा शोध में इन उत्पादों की सेल्फ लाइफ दोगुनी पाई गई. लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाले उत्पादों से ऊंटनी के दूध के भंडारण, परिवहन और बाजार तक पहुंचने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं. पेटेंट मिलने से शोध को औपचारिक मान्यता मिली है और भविष्य में इस तकनीक से नए दुग्ध उत्पाद विकसित किए जा सकते हैं. ऊंट पालन वाले क्षेत्रों में इससे पशुपालकों को दूध के बेहतर उपयोग और संभावित बाजार विस्तार का अवसर मिल सकता है.राजस्थान के वैज्ञानिकों के ऊंटनी के दूध पर किए गए शोध को भारत सरकार ने पेटेंट प्रदान किया है
श्रीगंगानगर. ऊंटनी के दूध को लेकर राजस्थान पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, बीकानेर के वैज्ञानिकों को महत्वपूर्ण उपलब्धि मिली है. विश्वविद्यालय की स्वदेशी दुग्ध उत्पाद परियोजना के तहत ऊंटनी के दूध पर किए गए शोध को भारत सरकार से पेटेंट मिला है. इस शोध में ऊंटनी के दूध से तैयार होने वाले उत्पादों की पोषण गुणवत्ता, उत्पादन क्षमता और सेल्फ लाइफ को बेहतर बनाने पर काम किया गया. शोधकर्ताओं के अनुसार इस तकनीक के जरिए ऊंटनी के दूध में मौजूद कैसीन प्रोटीन पाउडर को विशेष प्रक्रिया से तैयार कर उसके उपयोग की संभावनाओं को बढ़ाया गया है.
इससे ऊंटनी के दूध से बनने वाले विभिन्न दुग्ध उत्पादों को अधिक उपयोगी और टिकाऊ बनाने की दिशा में नई संभावनाएं सामने आई हैं. शोध से जुड़े डॉ. राजकुमार बेरवाल ने बताया कि ऊंटनी के दूध के कैसीन प्रोटीन पाउडर को अल्ट्रासोनिक किरणों और एंजाइमों की मदद से हाइड्रोलिसिस किया गया. हाइड्रोलिसिस की इस प्रक्रिया में प्रोटीन की संरचना पर नियंत्रित तरीके से काम किया गया, जिससे उससे तैयार होने वाले दुग्ध उत्पादों के गुणों में सुधार देखने को मिला. शोध के दौरान तैयार उत्पादों की गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता का अध्ययन किया गया. इसमें पाया गया कि तकनीक के इस्तेमाल से तैयार दुग्ध उत्पादों की पोषण गुणवत्ता के साथ उनकी यील्ड में भी बढ़ोतरी हुई.
सेल्फ लाइफ भी हुई दोगुनी
शोध की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि उत्पादों की सेल्फ लाइफ से जुड़ी रही. डॉ. राजकुमार बेरवाल ने बताया कि तैयार किए गए दुग्ध उत्पादों की सेल्फ लाइफ सामान्य उत्पादों की तुलना में दोगुनी पाई गई. इससे ऊंटनी के दूध से तैयार उत्पादों के भंडारण और बाजार तक पहुंचने की अवधि बढ़ाने में मदद मिल सकती है. लंबे समय तक सुरक्षित रहने वाले उत्पादों से ऊंटनी के दूध के व्यावसायिक उपयोग की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं. उन्हाेंने बताया कि राजस्थान में ऊंट पालन से जुड़े किसानों और पशुपालकों के लिए ऊंटनी का दूध आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है. ऐसे में दूध से नए और अधिक टिकाऊ उत्पाद तैयार करने की तकनीक डेयरी क्षेत्र के लिए उपयोगी साबित हो सकती है.
ऊंटनी के दूध के उत्पादों को मिल सकता है बढ़ावा
उन्हाेंने बताया कि पेटेंट मिलने से विश्वविद्यालय के शोध को आधिकारिक मान्यता मिली है और भविष्य में इस तकनीक के आधार पर ऊंटनी के दूध से नए उत्पाद विकसित करने की संभावनाएं खुली है. शोध में अल्ट्रासोनिक किरणों और एंजाइमों के इस्तेमाल से कैसीन प्रोटीन पर किए गए प्रयोग के जरिए उत्पादों की गुणवत्ता और यील्ड बढ़ाने के परिणाम सामने आए हैं. साथ ही सेल्फ लाइफ दोगुनी होने से उत्पादन के बाद उत्पादों को सुरक्षित तरीके से रखने और दूर के बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा हो सकती है. यह उपलब्धि ऊंटनी के दूध के वैज्ञानिक और व्यावसायिक उपयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Ganganagar,Ganganagar,Rajasthan
First Published :
September 27, 2026, 10:02 IST



