How to Make Multigrain Flour: घर पर तैयार करें मल्टीग्रेन आटा, गेहूं के साथ मिला दें ये 5 अनाज-दालें, रोटी की ताकत हो जाएगी दोगुनी

Last Updated:September 27, 2026, 09:19 IST
How to Make Multigrain Flour at Home: आजकल लोग खाने में स्वाद के साथ पोषण का भी ध्यान रखने लगे हैं. ऐसे में मल्टीग्रेन आटा रोज की रोटी के लिए एक अलग और पौष्टिक विकल्प हो सकता है. इसे गेहूं के साथ मंडुवा, जौ, मक्का और अलग-अलग दालों को मिलाकर तैयार किया जाता है. उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में इसे नौरंगी या सतरंगी आटे के नाम से भी जाना जाता है. अलग-अलग अनाज और दालों के मिश्रण से तैयार होने के कारण इसमें कई तरह के पोषक तत्व शामिल हो जाते हैं. इसे घर पर भी आसानी से तैयार किया जा सकता है, बस अनाज को साफ करने और अच्छी तरह सुखाने का ध्यान रखना जरूरी है. जानिए मल्टीग्रेन आटे में कौन-कौन से अनाज मिलाए जा सकते हैं, इसे बनाने का सही तरीका क्या है और लंबे समय तक इसे सुरक्षित कैसे रखें.
आजकल लोग खाने में सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि पोषण का भी ध्यान रखने लगे हैं. ऐसे में अलग-अलग अनाज और दालों से तैयार मल्टीग्रेन आटा एक अच्छा विकल्प हो सकता है. उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में इसे पारंपरिक रूप से नौरंगी या सतरंगी आटे के नाम से भी जाना जाता है. इसमें एक ही अनाज के बजाय गेहूं, मंडुवा, जौ, मक्का और दालों को मिलाया जाता है, जिससे एक ही आटे से कई तरह के पोषक तत्व मिल सकते हैं.
स्थानीय जानकार संतोषी देवी बताती हैं कि मल्टीग्रेन आटे की खासियत यह है कि इसमें कई तरह के अनाज और दालों को एक साथ शामिल किया जाता है. उदाहरण के लिए पांच किलो आटा तैयार करने के लिए 2.5 किलो गेहूं, एक किलो मंडुवा, 500 ग्राम ओगल या फापर, 500 ग्राम जौ, 250 ग्राम काला भट्ट या सोयाबीन और 250 ग्राम मक्का लिया जा सकता है. अलग-अलग अनाज होने की वजह से इसमें कई तरह के पोषक तत्व शामिल हो जाते हैं.
मल्टीग्रेन आटे में मंडुवा और जौ जैसे अनाज शामिल किए जाते हैं, जिन्हें फाइबर का स्रोत माना जाता है. भोजन में पर्याप्त फाइबर पाचन तंत्र के सामान्य कामकाज के लिए जरूरी होता है. इसी वजह से रोज के खाने में अलग-अलग साबुत अनाज शामिल करना फायदेमंद होता है. हालांकि, किसी भी एक आटे को हर व्यक्ति के लिए समान रूप से फायदेमंद नहीं माना जा सकता.
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मंडुवा यानी रागी को कैल्शियम और फाइबर जैसे पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत माना जाता है. वहीं जौ में भी फाइबर पाया जाता है. इन अनाजों को गेहूं के साथ मिलाकर खाने से आहार में अनाज की विविधता बढ़ जाती है. यही वजह है कि मल्टीग्रेन आटा सामान्य आटे से थोड़ा अलग और पोषण के लिहाज से उपयोगी विकल्प हो सकता है.
मल्टीग्रेन आटे में काला भट्ट या सोयाबीन भी मिलाया जाता है. ये दोनों प्रोटीन के स्रोत हैं और इन्हें आटे में शामिल करने से इसकी पोषण क्षमता बढ़ती है. इसके अलावा मक्का आटे में अलग स्वाद और कुछ पोषक तत्व जोड़ता है. इस तरह अलग-अलग अनाज और दालों को मिलाकर तैयार किया गया आटा खाने में ताक़त लाने का एक आसान तरीका है.
आटा तैयार करने से पहले सभी अनाज और दालों को अच्छी तरह साफ कर लें. इनमें मौजूद कंकड़, मिट्टी और दूसरी अशुद्धियां निकाल दें. इसके बाद अनाजों को पानी से धोकर अच्छी तरह धूप में सुखाएं. अनाज में नमी रह गई तो आटा जल्दी खराब हो सकता है, इसलिए इन्हें पूरी तरह सुखाना जरूरी है. काले भट्ट को हल्का भूनने से उसका स्वाद और खुशबू बढ़ सकती है, लेकिन इसे ज्यादा न भूनें. इसके बाद सभी अनाजों को अलग-अलग या मिलाकर घराट या चक्की में पिसवा सकते हैं.
अगर आपको बारीक आटा पसंद है तो इसे दोबारा छान सकते हैं, जबकि मोटा आटा पारंपरिक स्वाद के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है. तैयार आटे को हमेशा साफ और सूखे एयरटाइट डिब्बे में रखें. इसे नमी, सीधी धूप और कीड़ों से बचाकर रखना जरूरी है, ताकि आटे की गुणवत्ता लंबे समय तक बनी रहे. इस आटे से रोटी, पराठे, हलवा और दूसरे व्यंजन भी बनाए जा सकते हैं.
मल्टीग्रेन आटे को रोज की रोटी या पराठे के रूप में आसानी से खाया जा सकता है. इसमें गेहूं के साथ मंडुवा, जौ, मक्का और दालों को मिलाने से एक ही आहार में कई तरह के अनाज शामिल हो जाते हैं. जो लोग अपने रोज के खाने में अलग-अलग अनाज शामिल करना चाहते हैं, उनके लिए यह आटा एक आसान विकल्प हो सकता है. इसे घर पर अपनी पसंद और जरूरत के हिसाब से अलग-अलग मात्रा में अनाज मिलाकर भी तैयार किया जा सकता है.
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September 27, 2026, 09:19 IST



