Health Tips: गले में खराश हो या दांत दर्द, 90 साल की दादी ने बताए रसोई में छिपे 5 पुराने घरेलू नुस्खे, दिलाते हैं तुरंत राहत

Last Updated:September 29, 2026, 12:59 IST
Dadi Nani ke Gharelu Nuskhe: आज छोटी सी परेशानी में दवा लेने की आदत बढ़ी है, लेकिन दादी-नानी के दौर में घर की रसोई ही कई घरेलू नुस्खों का सहारा हुआ करती थी. 90 वर्षीय कन्या देवी बताती हैं कि शहद से लेकर अदरक, लहसुन, तुलसी और तिल तक का इस्तेमाल पारंपरिक तौर पर किया जाता था. गले की खराश और सूखेपन में शहद को सीधे या गुनगुने पानी में मिलाकर लिया जाता था. अदरक की चाय और शहद-अदरक का मिश्रण भी पुराने घरेलू नुस्खों में शामिल रहा है. दांत दर्द में लहसुन के इस्तेमाल की परंपरा रही है, हालांकि दांत दर्द के पीछे संक्रमण या कैविटी जैसी वजह हो सकती है. तुलसी की चाय को थकान और बेचैनी के दौरान आराम देने वाले गर्म पेय के रूप में लिया जाता था. वहीं तिल को पौष्टिक मानकर लड्डू, चटनी और भोजन में शामिल किया जाता रहा है.
दादी-नानी के समय में गले में खराश, सूखापन या हल्की जलन होने पर शहद का इस्तेमाल किया जाता था. शहद को सीधे या गुनगुने पानी में मिलाकर लेने की परंपरा रही है. 90 वर्षीय दादी कन्या देवी ने लोकल18 को बताया कि पहले के समय में छोटी-मोटी तकलीफों के लिए हर बार दवा नहीं ली जाती थी. घर में मौजूद शहद, अदरक, लहसुन, तुलसी और तिल जैसी चीजों से कई घरेलू नुस्खे अपनाए जाते थे. गले की खराश से लेकर दांत दर्द और तनाव तक, ये नुस्खे आज भी कई घरों में इस्तेमाल होते हैं. इसे गले को आराम देने वाला घरेलू उपाय माना जाता है.
अदरक का इस्तेमाल भारतीय रसोई में लंबे समय से घरेलू नुस्खे के तौर पर होता आया है. दादी-नानी गले में खराश, सर्दी-जुकाम जैसी हल्की परेशानी में अदरक की चाय या शहद के साथ अदरक देती थी. भोजन के बाद भारीपन या उल्टी जैसी हल्की परेशानी में भी अदरक का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से किया जाता रहा है.
दादी-नानी के घरेलू नुस्खों में लहसुन का इस्तेमाल दांत दर्द के लिए भी किया जाता था. लहसुन को दर्द वाली जगह पर लगाने या खाने की परंपरा रही है. दांत का दर्द कैविटी, संक्रमण या मसूड़ों की समस्या के कारण हो सकता है, इसलिए लगातार दर्द होने पर डेंटिस्ट को दिखाना जरूरी है.
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तुलसी की चाय को दादी-नानी के समय में सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि दिनभर की थकान और बेचैनी के बीच आराम देने वाले घरेलू पेय के रूप में भी लिया जाता था. कई घरों में सुबह या शाम तुलसी की चाय पीने की परंपरा रही है. बदलते मौसम में भी इसे गर्म पेय के तौर पर पसंद किया जाता रहा है. तुलसी की गर्म चाय मन को थोड़ा सुकून देने वाली मानी जाती है.
दादी-नानी की रसोई में तिल को पौष्टिक चीजों में गिना जाता था. इसमें कैल्शियम समेत कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, इसलिए तिल के लड्डू, चटनी या अन्य व्यंजनों को डाइट में शामिल करने की परंपरा रही है. यह हड्डियों के लिए जरूरी पोषण का हिस्सा हो सकता है. दादी-नानी तिल को रोजमर्रा के खाने में शामिल कर शरीर को पोषण देने का आसान तरीका मानती थी.
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September 29, 2026, 12:59 IST



