लक्षण का इंतजार ना करें… 25 की उम्र से पहले हार्ट से जुड़े ये चेकअप जरूरी, जानें डॉ. नरेश त्रेहान ने क्या बताया

दिल की बीमारी को अक्सर उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या माना जाता है, लेकिन आजकल कम उम्र के लोगों में भी दिल से जुड़ी परेशानियां देखने को मिल रही हैं. ऐसे में समय रहते अपने दिल की सेहत का ध्यान रखना जरूरी है. मेदांता ग्रुप के चेयरमैन और मशहूर हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेश त्रेहान ने भी कम उम्र में दिल की बीमारी के खतरे को पहचानने और समय पर जांच कराने की सलाह दी है.
डॉ. नरेश त्रेहान के मुताबिक, अगर माता-पिता या परिवार के करीबी लोगों को दिल की बीमारी रही है तो आपको भी सावधान रहने की जरूरत है. परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास होने से आगे चलकर इसका खतरा बढ़ सकता है. ऐसे में सबसे पहले अपनी पारिवारिक मेडिकल हिस्ट्री के बारे में जानकारी रखें. परिवार में किसे, किस उम्र में और किस तरह की दिल की बीमारी हुई थी, यह जानकारी डॉक्टर को जोखिम समझने में मदद कर सकती है.
25 साल की उम्र से पहले कराएं जांच
डॉ. त्रेहान ने खासतौर पर ऐसे लोगों को 25 साल की उम्र से पहले दिल की सेहत की शुरुआती जांच कराने की सलाह दी है, जिनके परिवार में दिल की बीमारी का इतिहास रहा है. इस जांच में डॉक्टर ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल, वजन और दूसरे जोखिमों को देखते हैं. जरूरत पड़ने पर डॉक्टर आगे की जांच भी बता सकते हैं. हर व्यक्ति को एक जैसी जांच कराने की जरूरत नहीं होती. यह उसकी उम्र, परिवार की हिस्ट्री और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है.
सिर्फ सीने में दर्द को न समझें संकेत
हार्ट की समस्या होने पर हमेशा सीने में तेज दर्द ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है. कुछ लोगों को तेज चलने या सीढ़ियां चढ़ने पर सीने में दबाव, भारीपन या असहजता महसूस हो सकती है. कई बार दर्द सीने की जगह पीठ, कंधे या जबड़े में भी महसूस हो सकता है. सांस फूलना, अचानक बहुत पसीना आना, चक्कर या असामान्य थकान भी दिल से जुड़ी समस्या के संकेत हो सकते हैं. इसलिए ऐसे लक्षणों को बार-बार नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.
डायबिटीज वालों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत
डायबिटीज वाले लोगों में दिल की बीमारी का खतरा बढ़ सकता है. कुछ मामलों में नसों पर असर पड़ने की वजह से हार्ट अटैक के दौरान दर्द कम महसूस हो सकता है. इसे ‘साइलेंट हार्ट अटैक’ कहा जाता है. इसलिए डायबिटीज वाले लोगों को नियमित रूप से डॉक्टर से जांच कराते रहना चाहिए. डॉक्टर जरूरत के अनुसार दिल की अलग-अलग जांच कराने की सलाह दे सकते हैं.
दिल को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?
सिर्फ जांच ही काफी नहीं है. रोजाना थोड़ा शारीरिक काम या व्यायाम करें, खाने में नमक और बहुत ज्यादा तला-भुना खाना कम रखें, धूम्रपान से बचें और अपना ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखें. सबसे जरूरी बात यह है कि अगर अचानक सीने में दर्द या दबाव, सांस लेने में परेशानी, जबड़े या पीठ में दर्द, चक्कर या बहुत ज्यादा पसीना आए तो इसे गैस या थकान समझकर न टालें. ऐसे लक्षणों में तुरंत मेडिकल मदद लेना जरूरी है.



