अरावली की पहाड़ियों में 3900 साल पुराना अनोखा मंदिर, एक ही गर्भगृह में रिद्धि-सिद्धि रूप में विराजे दो गणेश

Last Updated:October 01, 2026, 13:18 IST
Sirohi Riddhi Siddhi Ganesh Temple: राजस्थान के सिरोही जिले के राड़बर गांव में अरावली पहाड़ियों के बीच करीब 3900 साल पुराना अनूठा गणेश मंदिर स्थित है. यहां भगवान गणेश की दो प्रतिमाएं रिद्धि और सिद्धि गणेश के रूप में एक साथ पूजी जाती हैं. बाएं तरफ काले पत्थर की सिद्धि गणेश और दाएं तरफ रिद्धि गणेश स्थापित हैं. पांडव कालीन मान्यता वाले इस मंदिर परिसर में 100 से अधिक सीढ़ियां और प्राचीन बावड़ी स्थित है. गणेश चतुर्थी और हर बुधवार को यहां दूर-दूर से भक्त दर्शन व मन्नत मांगने पहुंचते हैं.
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Sirohi: राजस्थान का सिरोही जिला अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरों और आध्यात्मिक स्थलों के लिए पूरे देश में जाना जाता है. सिरोही जिले की शिवगंज तहसील के अंतर्गत आने वाले राड़बर गांव में अरावली की ऊंची-ऊंची पहाड़ियों के बीच एक ऐसा अनूठा और चमत्कारिक गणेश मंदिर स्थित है, जो अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है. इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान गणेश अकेले विराजमान नहीं हैं, बल्कि उनकी दोनों पत्नियों रिद्धि और सिद्धि के रूप में गणेश जी की दो प्रतिमाएं एक साथ स्थापित हैं. अरावली पर्वतमाला के बीच बने इस अलौकिक मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 100 से भी अधिक सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं.
स्थानीय निवासियों और मंदिर के इतिहास के अनुसार, इस पवित्र स्थान का इतिहास लगभग 3900 वर्ष पुराना बताया जाता है. क्षेत्रीय मान्यताओं के अनुसार, इस प्राचीन मंदिर की शुरुआती स्थापना पांडव काल के दौरान हुई थी. कालंतर में जैसे-जैसे समय बीतता गया, स्थानीय लोगों और भक्तों द्वारा इसका जीर्णोद्धार और पुनर्निर्माण करवाया जाता रहा. प्राचीन समय में राड़बर गांव को ‘राजगढ़’ के नाम से जाना जाता था. यह धार्मिक स्थल न केवल सिरोही बल्कि पूरे राजस्थान के सबसे प्राचीन गणेश मंदिरों की सूची में विशेष स्थान रखता है.
एक ही गर्भगृह में रिद्धि और सिद्धि गणेश की पूजामंदिर के मुख्य गर्भगृह में भगवान गणेश की दो भव्य मूर्तियां स्थापित हैं. स्थानीय भक्त नरेश राजपुरोहित के अनुसार, गर्भगृह में बाएं तरफ काले पत्थर की अत्यंत सुंदर मूर्ति स्थापित है, जिसे ‘सिद्धि गणेश’ के रूप में पूजा जाता है. वहीं दाईं तरफ विराजमान प्रतिमा को ‘रिद्धि गणेश’ का स्वरूप माना जाता है. पूरे भारत में यह संभवतः एकमात्र ऐसा गणेश मंदिर है, जहां एक ही स्थान पर दो गणेश प्रतिमाएं एक साथ पूजी जाती हैं. इन दोनों प्रतिमाओं में रिद्धि गणेश की मूर्ति सबसे प्राचीन मानी जाती है, जबकि उसके कुछ वर्षों बाद सिद्धि गणेश की प्रतिमा यहां स्थापित की गई थी.
हरियाली, शांत वातावरण और प्राचीन बावड़ीअरावली की पहाड़ी की ऊंचाई पर स्थित होने के कारण यह मंदिर प्राकृतिक सुंदरता से पूरी तरह सराबोर है. मंदिर परिसर के चारों तरफ विशाल हरे-भरे पेड़ और बेहद शांत वातावरण मिलता है, जो यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आत्मिक शांति प्रदान करता है. मंदिर परिसर के भीतर ही एक ऐतिहासिक और प्राचीन बावड़ी बनी हुई है. यह बावड़ी सदियों पुरानी होने के बावजूद आज भी जल स्रोत के रूप में पूरी तरह सक्रिय है और इसके जल का उपयोग धार्मिक कार्यों में किया जाता है.
भक्तों की अटूट आस्था और धार्मिक आयोजनराड़बर के इस प्राचीन गणेश मंदिर में हर बुधवार को विशेष पूजा-अर्चना होती है. इसके अलावा भाद्रपद महीने में आने वाली गणेश चतुर्थी के पावन पर्व पर यहां विशाल मेले जैसा माहौल रहता है. सिरोही जिले के अलावा राजस्थान और पड़ोसी राज्य गुजरात से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर यहां पहुंचते हैं. धार्मिक मान्यता है कि जो भी भक्त 100 सीढ़ियां चढ़कर सच्चे मन से रिद्धि और सिद्धि गणेश के दर्शन करता है, उसकी हर मनोकामना अवश्य पूरी होती है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Sirohi,Sirohi,Rajasthan
First Published :
October 01, 2026, 13:18 IST



