621 साल पुराने रामदेरिया धाम में बना 20 करोड़ का भव्य मंदिर, 110 फीट ऊंची इमारत 7.5 तीव्रता के भूकंप को झेलने में सक्षम

Last Updated:October 02, 2026, 08:53 IST
Barmer Ramdev Dham: बाड़मेर के उण्डू काश्मीर स्थित 621 साल पुराने रामदेरिया धाम में 20 करोड़ रुपये की लागत से 110 फीट ऊंचा भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है. खास बात यह है कि इसे 7.5 तीव्रता के भूकंप को झेलने के लिए डिजाइन किया गया है. इसके निर्माण में 600 टन जैसलमेर के पीले पत्थरों का इस्तेमाल हुआ है. पहले यह धाम केवल एक खेजड़ी के पेड़ के नीचे था, लेकिन अब यह विशाल रूप ले चुका है. हर साल राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों से लाखों श्रद्धालु यहां बाबा रामदेव जी के दर्शन और पूजा करने आते हैं.
ख़बरें फटाफट
Barmer: राजस्थान के सरहदी जिले बाड़मेर में आस्था का एक बड़ा प्रतीक अपनी नई और भव्य पहचान बना चुका है. बाड़मेर जिले के उण्डू काश्मीर स्थित 621 साल पुराने बाबा रामदेव धाम रामदेरिया में इन दिनों अद्भुत रौनक और उत्साह देखने को मिल रहा है. सदियों पुराने इस पावन धाम का कायाकल्प कर दिया गया है. यहां करीब 20 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से एक विशाल और आकर्षक मंदिर बनकर तैयार हुआ है. यह मंदिर न केवल अपनी ऊंचाई और सुंदरता के लिए चर्चा में है, बल्कि इसकी मजबूती भी हर किसी को हैरान कर रही है. 110 फीट ऊंचा यह शानदार मंदिर भक्तों की गहरी श्रद्धा और वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण बन गया है. पीले पत्थरों से सजे इस मंदिर को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं और इसकी शानदार कलाकारी की तारीफ कर रहे हैं.
करीब 621 साल पुराने इस ऐतिहासिक धाम में जिस भव्य मंदिर का निर्माण किया गया है, उसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी वैज्ञानिक और मजबूत संरचना है. आधुनिक इंजीनियरिंग का इस्तेमाल करते हुए इस मंदिर को विशेष रूप से 7.5 तीव्रता तक के भयानक भूकंप के झटकों को आसानी से सहन करने के लिए डिजाइन किया गया है. इसके निर्माण में राजस्थान की शान माने जाने वाले जैसलमेर के पीले पत्थरों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया है. मंदिर को मजबूती देने के लिए इसकी नींव जमीन के अंदर 35 फीट गहरी बनाई गई है और उसमें उच्च गुणवत्ता वाला सीमेंट और कंक्रीट भरा गया है. निर्माण के आंकड़ों के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट में 600 टन जैसलमेर के स्वर्णिम आभा वाले पत्थर काम में लिए गए हैं. इसके साथ ही 60 हजार सीमेंट के कट्टों और लगभग 1200 ट्रक कंक्रीट का उपयोग कर इसे एक अभेद्य ढांचे का रूप दिया गया है.
लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्ररामदेरिया धाम श्रद्धालुओं के लिए एक बेहद पवित्र और महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है. हर साल भाद्रपद (भादवा) महीने में यहां बाबा रामदेव का विशाल और ऐतिहासिक मेला भरता है. धार्मिक मान्यताओं और पुरानी परंपराओं के अनुसार, बाबा रामदेव जी की इस जन्मस्थली पर धोक लगाने के बाद ही भक्त अपनी आगे की यात्रा कर रामदेवरा (रुणिचा) जाते हैं. दर्शन करने के लिए केवल बाड़मेर या जैसलमेर से ही नहीं, बल्कि राजस्थान के अन्य जिलों, गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा और पंजाब से भी लाखों श्रद्धालु आते हैं. अलग-अलग राज्यों से आने वाले ये भक्त बाबा रामदेव जी के प्रति अपनी अटूट आस्था प्रकट करते हैं. यह स्थान सर्वधर्म समभाव का एक बड़ा प्रतीक है.
खेजड़ी के पेड़ से शुरू हुआ सफर और भव्य धाम का निर्माणरामदेरिया धाम का इतिहास बेहद रोचक और गहरी आस्था से भरा हुआ है. लोगों की मान्यता है कि यहां बाबा रामदेव जी के अवतार से लेकर उनकी समाधि तक के दर्शन का विशेष आध्यात्मिक लाभ मिलता है. यही कारण है कि देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु यहां खिंचे चले आते हैं. शुरुआत में यहां कोई बड़ा निर्माण नहीं था. श्रद्धालु केवल एक पुराने खेजड़ी के पेड़ के नीचे बने एक छोटे से मंदिर में ही दर्शन और पूजा-अर्चना करते थे. लेकिन समय के साथ बाबा के प्रति लोगों की आस्था लगातार बढ़ती गई और श्रद्धालुओं की संख्या में भारी इजाफा हुआ. इस अपार श्रद्धा को देखते हुए ही अब यहां जैसलमेर के पीले पत्थरों पर बारीक नक्काशी करवाकर एक विशाल मंदिर का निर्माण करवाया गया है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
और पढ़ेंLocation :
Barmer,Barmer,Rajasthan
First Published :
October 02, 2026, 08:53 IST



