बाड़मेर की मशहूर ‘चुंटिया चक्की’: नाम सुनकर आती है शर्म, लेकिन स्वाद ऐसा कि उंगलियां चाटते रह जाएं लोग

Last Updated:October 02, 2026, 10:45 IST
Barmer Sweets Chutiya Chakki: बाड़मेर में जोधपुर मिष्टान्न भंडार की मशहूर ‘चुंटिया चक्की’ अपने अजीबोगरीब नाम और लाजवाब स्वाद के लिए चर्चित है. शुद्ध घी, बेसन, फीके मावे और शक्कर से बनने वाली इस मिठाई का नाम ठेठ मारवाड़ी शब्द ‘चिंगट’ (घी की चिकनाई) से पड़ा है. जो धीरे-धीरे चिंगटी से चुंटिया हो गया. पहली बार इसका नाम सुनकर लोग झिझकते हैं, लेकिन स्वाद चखने के बाद इसके मुरीद हो जाते हैं. दो घंटे की कड़ी मेहनत से तैयार होने वाली यह चक्की पूरी तरह शुद्ध घी में तरबतर रहती है और पश्चिमी राजस्थान में बेहद पसंद की जाती है.
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बाड़मेर: राजस्थान का सरहदी जिला बाड़मेर अपनी अनूठी संस्कृति, पहनावे और लोक कलाओं के साथ-साथ अपने खास खान-पान के लिए भी जाना जाता है. यहां की मिठाइयों की दुनिया में एक ऐसी खास चक्की (बर्फी) है, जिसका नाम सुनते ही लोग पहली बार में चौंक जाते हैं या झेंप जाते हैं. बाड़मेर के जोधपुर मिष्टान्न भंडार की मशहूर ‘चुंटिया चक्की’ न सिर्फ अपने अनोखे और अजीबोगरीब नाम बल्कि बेसन से बने अपने बेमिसाल स्वाद के लिए भी पूरे इलाके में खास पहचान रखती है. इसका दिलचस्प नाम इसे पश्चिमी राजस्थान की मिठाई की दुनिया में एक अलग और चर्चित मुकाम देता है. शुरुआत में भले ही लोग इसका नाम लेने में झिझकते हों, लेकिन इसका स्वाद चखते ही वे इसके पक्के दीवाने हो जाते हैं.
बाड़मेर की मशहूर ‘चुटिया चक्की’ अपने अनोखे नाम के कारण हमेशा चर्चा का विषय बनी रहती है. अक्सर जब कोई पहली बार इसका नाम सुनता है, तो उसे लगता है कि कोई अपशब्द या गाली दी जा रही है. यही कारण है कि नए लोग या बाहरी पर्यटक दुकान पर जाकर इसे मांगने में थोड़ी शर्म महसूस करते हैं. लेकिन स्थानीय लोगों के बीच यह बहुत लोकप्रिय है. बेसन से तैयार इस पारंपरिक मिठाई का जायका इतना लाजवाब है कि पहली बार नाम लेने में शर्माने वाले लोग भी इसका स्वाद चखने के बाद बार-बार इसकी मांग करते हैं. स्वाद के मामले में यह पश्चिमी राजस्थान की कई बड़ी और महंगी मिठाइयों को कड़ी टक्कर देती है.
आखिर कैसे पड़ा इस मिठाई का नाम ‘चुटिया’सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी स्वादिष्ट मिठाई का नाम इतना अजीब कैसे पड़ गया. दरअसल, यह चक्की मुख्य रूप से बेसन और शुद्ध देसी घी से ही बनती है, लेकिन इसके हर पीस (टुकड़े) में से घी रिसता रहता है. घी के इस भारी रिसाव से इसे खाने वालों के हाथों में काफी चिकनाई लग जाती है. इस चिकनाई या चिपचिपाहट को ठेठ मारवाड़ी भाषा में ‘चिंगट’ कहा जाता है. इसी ‘चिंगट’ शब्द से बिगड़कर इसका नाम पहले ‘चिंगटी चक्की’ और फिर धीरे-धीरे लोगों की आम बोलचाल में ‘चुंटिया’ या ‘चुटिया चक्की’ हो गया. यानी इसका नाम किसी अपशब्द से नहीं, बल्कि इसमें मौजूद शुद्ध घी की भरपूर चिकनाई से जुड़ा हुआ है.
ऐसे तैयार होती है घी में तैरने वाली यह खास मिठाईइस खास चुंटिया चक्की को तैयार करने की प्रक्रिया भी काफी मेहनत भरी है. इसे बनाने में मुख्य रूप से शुद्ध घी, बेसन, फीका मावा और शक्कर का इस्तेमाल किया जाता है. सबसे पहले बेसन को घी में अच्छी तरह से भूना जाता है. धीमी आंच पर इसे लगातार चलाते हुए पकाया जाता है ताकि बेसन अच्छी तरह पक जाए और इसकी सोंधी खुशबू आने लगे. इसके बाद इसमें फीका मावा और शक्कर मिलाई जाती है. जोधपुर मिष्टान्न भंडार के कमल सिंघल बताते हैं कि इस पूरी प्रक्रिया में करीब दो घंटे का समय लगता है.
चांदी के अर्क और शुद्ध घी से बढ़ता है जायकामिश्रण तैयार होने के बाद इसे ठंडा करके चक्की (बर्फी) के आकार में काटा जाता है. तैयार होने के बाद यह चक्की पूरी तरह घी से भरपूर होती है और ऐसा लगता है जैसे घी में तैर रही हो. इसकी सुंदरता बढ़ाने के लिए इस पर चांदी का वर्क (अर्क) भी चढ़ाया जाता है. इसे साधारण भाषा में बेसन की चक्की भी कहा जाता है. भले ही नाम सुनकर लोग एक पल के लिए मुस्कुराएं या झिझकें, लेकिन इसका शाही स्वाद लोगों को अपनी ओर खींच ही लाता है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Barmer,Barmer,Rajasthan
First Published :
October 02, 2026, 10:45 IST



