विश्वेन्द्र सिंह ने कांग्रेस से बनाई दूरी, सोशल मीडिया पर पार्टी को कहा-अलविदा

जयपुर. राजस्थान कांग्रेस में निकाय चुनावों में हार के बाद शुरू हुआ अंदरूनी घमासान अब खुलकर सामने आता दिख रहा है. भरतपुर के कद्दावर कांग्रेस नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने पार्टी अध्यक्ष को संबोधित पत्र में कांग्रेस से अलग होने की बात कही है. अपने पत्र में सिंह ने पार्टी के भीतर कथित चापलूसी की परंपरा, कुछ नेताओं के बयानों और अपनी निष्ठा, ईमानदारी व कर्तव्यपरायणता को लेकर उठाए गए सवालों पर नाराजगी जाहिर की है. उन्होंने लिखा कि उन्होंने जीवन में हमेशा अपने इष्ट गिरिराज महाराज और अंतरात्मा की आवाज सुनकर फैसले लिए हैं. कुछ नेताओं के बयानों से उनके कार्यकर्ताओं में आक्रोश है और उनका अंतरमन भी दुखी व व्यथित है.
विश्वेंद्र सिंह ने कहा कि जिस पार्टी के लिए उन्होंने अपना जीवन न्यौछावर किया, उसी पार्टी से यदि उनकी निष्ठा और ईमानदारी का यह सिला मिलता है तो वे अंदर से बहुत हिल गए हैं. उन्होंने अपने पत्र में साफ लिखा कि वे अपने मान, सम्मान और स्वाभिमान से समझौता नहीं कर सकते और ऐसी परिस्थिति में पार्टी की गलत रीति-नीति के साथ कदमताल नहीं कर पाएंगे. विश्वेंद्र सिंह की कांग्रेस से नाराजगी पिछले कुछ समय से चर्चा में थी. निकाय चुनावों के नतीजों के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भरतपुर और डीग में कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर संगठन पर सवाल उठाए थे. उन्होंने आरोप लगाया था कि दोनों जिलाध्यक्षों ने अपने चहेतों को टिकट दिए और पुराने व वास्तविक कार्यकर्ताओं को दरकिनार किया. उनके मुताबिक इसका खामियाजा पार्टी को चुनाव परिणामों में भुगतना पड़ा.
निकाय चुनाव की हार पर भी उठाए थे सवाल
सिंह ने अपनी पोस्ट में भरतपुर-डीग कांग्रेस के प्रदर्शन के लिए संगठनात्मक स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की मांग की थी. उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा पर भी निशाना साधते हुए कहा था कि प्रदेश नेतृत्व को पार्टी की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए. सिंह का दावा था कि भरतपुर मुख्यमंत्री का गृह जिला है और यहां कांग्रेस को मजबूत स्थिति में होना चाहिए था, लेकिन संगठन की कार्यप्रणाली के कारण पार्टी को नुकसान हुआ. डीग के निकाय चुनावों में टिकट वितरण को लेकर भी सिंह ने कई वार्डों का जिक्र किया था. उन्होंने दावा किया था कि कुछ वार्डों में गलत प्रत्याशियों को टिकट दिए जाने का असर सीधे चुनाव परिणामों में दिखाई दिया. उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशियों को मिले वोटों के आंकड़े भी सोशल मीडिया पोस्ट में साझा किए थे.
भरतपुर-डीग में बीजेपी के बोर्ड बनने के बाद बढ़ी थी चर्चा
निकाय चुनाव परिणामों के बाद भरतपुर और डीग क्षेत्र में कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर पार्टी के भीतर सवाल उठ रहे थे. भरतपुर नगर निगम के 65 वार्डों में निर्दलीयों ने भी बड़ी संख्या में जीत दर्ज की थी, जबकि बीजेपी और कांग्रेस के पार्षदों की संख्या अलग-अलग रही. बाद में राजनीतिक समीकरणों के बीच बीजेपी ने कई निकायों में बोर्ड बनाने में सफलता हासिल की. इसके बाद कांग्रेस के भीतर हार की जिम्मेदारी को लेकर आरोप-प्रत्यारोप की चर्चा तेज हुई. विश्वेंद्र सिंह भरतपुर के पूर्व राजपरिवार से ताल्लुक रखते हैं और अशोक गहलोत सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं. विधानसभा चुनाव 2023 में उन्होंने डीग-कुम्हेर सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. इसके बाद से उनकी सक्रिय राजनीतिक मौजूदगी पहले की तुलना में कम रही.
पत्र में लिखा- गलत को न सहा, न सहूंगा
अपने इस्तीफे के पत्र में सिंह ने लिखा कि यदि सच को सच कहना और गलत व झूठ का साथ नहीं देना पाप है तो वे यह काम आगे भी करते रहेंगे. उन्होंने कहा कि वे न गलत करते हैं और न गलत सहन करते हैं. अपने सार्वजनिक जीवन को खुली किताब बताते हुए सिंह ने कहा कि उन्होंने अपने दामन पर कभी दाग नहीं लगने दिया और आगे भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करेंगे. उन्होंने अपने पुरखों का हवाला देते हुए लिखा कि उन्हीं के आदर्शों का अनुसरण करते हुए वे कांग्रेस को अलविदा कहना बेहतर समझते हैं. सिंह ने पत्र के अंत में कहा कि वे शायद अब पार्टी की गलत रीति-नीति के साथ कदमताल नहीं कर पाएंगे. विश्वेंद्र सिंह के इस पत्र के बाद राजस्थान कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं. हालांकि, इस्तीफे को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से फिलहाल आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. ऐसे में पार्टी की ओर से औपचारिक प्रतिक्रिया और आगे की राजनीतिक स्थिति पर नजर रहेगी.



