Famous Temple: 400 साल पुराना महालक्ष्मी मंदिर, कमल पर विराजमान हैं चार भुजाओं वाली माता, हाथों से बरसता है धन

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400 साल पुराना महालक्ष्मी मंदिर, ,यहां माता महालक्ष्मी करती हैं धन की वर्षा
Last Updated:October 05, 2026, 07:47 IST
Nagaur Famous Laxmi Temple: नागौर शहर की ब्रह्मपुरी में स्थित श्री महालक्ष्मी माता का मंदिर आस्था के साथ 400 साल से ज्यादा पुरानी विरासत को भी संजोए हुए है. मान्यता है कि ब्रह्मपुरी मोहल्ले की स्थापना के साथ ही इस मंदिर की भी स्थापना हुई थी. गर्भगृह में माता महालक्ष्मी की प्राचीन प्रतिमा कमल के पुष्प पर विराजमान है. चार भुजाओं वाली प्रतिमा के दो हाथों में कलश हैं, जबकि एक हाथ से धन की वर्षा और दूसरे से आशीर्वाद देने की मुद्रा दिखाई देती है. प्रतिमा के दोनों ओर हाथियों की आकृतियां बनी हैं, जिन्हें माता का अभिषेक करते हुए माना जाता है. मंदिर परिसर में गणेश, बजरंगबली और भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ की प्रतिमा भी स्थापित है. श्रीमाली समाज माता महालक्ष्मी को अपनी कुलदेवी मानता है. श्राद्ध पक्ष की अष्टमी को यहां प्राकट्योत्सव मनाया जाता है.
Nagaur Laxmi Tample: नागौर शहर की ब्रह्मपुरी में स्थित श्रीमाली समाज की कुलदेवी श्री महालक्ष्मी माता का मंदिर आस्था के साथ-साथ अपनी प्राचीन विरासत के लिए भी खास पहचान रखता है. यह मंदिर 400 साल से भी अधिक पुराना है. मान्यता है कि नागौर के ब्रह्मपुरी मोहल्ले की स्थापना के साथ ही मंदिर की भी स्थापना हुई थी. आज भी मंदिर में माता महालक्ष्मी की प्राचीन प्रतिमा उसी आस्था के साथ विराजमान है और सालभर श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
मंदिर के गर्भगृह में स्थापित माता महालक्ष्मी की प्रतिमा बेहद खास बताई जाती है. माता कमल के पुष्प पर विराजमान हैं और उनकी चार भुजाएं हैं. प्रतिमा के दो हाथों में कलश हैं, जबकि एक हाथ से धन की वर्षा और दूसरे हाथ से भक्तों को आशीर्वाद देने की मुद्रा दिखाई देती है. माता की प्रतिमा के दोनों ओर हाथियों की आकृतियां भी बनी हुई हैं. मान्यता है कि ये हाथी माता का लगातार अभिषेक करते प्रतीत होते हैं.
एक ही मंदिर में गणेश, लक्ष्मी, बजरंगबली और गरुड़
मंदिर परिसर में माता महालक्ष्मी के साथ प्रथम पूज्य भगवान गणेश और भगवान बजरंगबली की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं. इसके अलावा यहां भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ की करीब दो फीट ऊंची प्रतिमा भी पत्थर पर उकेरी गई है. माता लक्ष्मी को भगवान विष्णु की अर्धांगिनी माना जाता है, इसलिए गरुड़ की प्रतिमा भी मंदिर की धार्मिक विशेषताओं में शामिल है.
श्रीमाली समाज की कुलदेवी हैं माता महालक्ष्मी
ब्रह्मपुरी मोहल्ले में बड़ी संख्या में श्रीमाली ब्राह्मण परिवार रहते हैं. समाज के लोग माता महालक्ष्मी को अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते हैं. मंदिर के पुजारी अरविंद दवे बताते हैं कि उनका परिवार कई पीढ़ियों से मंदिर की सेवा और पूजा करता आ रहा है. यहां प्रतिदिन सुबह-शाम पूजा और आरती होती है. मान्यता है कि माता के दरबार में श्रद्धा से पूजा करने वाले भक्तों पर माता की कृपा बनी रहती है और घर में सुख-समृद्धि आती है.
श्राद्ध पक्ष की अष्टमी को मनता है प्राकट्योत्सव
मंदिर में सालभर धार्मिक आयोजन होते हैं, लेकिन श्राद्ध पक्ष में अश्विन कृष्ण पक्ष की अष्टमी का दिन विशेष माना जाता है. इसी दिन यहां माता महालक्ष्मी का प्राकट्योत्सव धूमधाम से मनाया जाता है. मान्यता है कि इसी दिन मंदिर के गर्भगृह में माता की प्रतिमा की विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा हुई थी. इस अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ माता का अभिषेक किया जाता है और विशेष पूजा-अर्चना होती है# दीपावली पर भी मंदिर में विशेष आयोजन होते हैं.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Nagaur,Rajasthan
First Published :
October 05, 2026, 07:47 IST
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