अब चांद की बारी…रूस-चीन और अमेरिका क्या खेल करने वाले हैं? – Nuclear Reactor on moon America Russia china have secret planning

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अब चांद की बारी…रूस-चीन और अमेरिका क्या खेल करने वाले हैं?
Agency:एजेंसियां
Last Updated:October 05, 2026, 09:36 IST
Lunar Nuclear Reactor: दुनिया की महाशक्तियां सिर्फ हथियार के मामले में ही आगे नहीं हैं, बल्कि साइंस एंड डेवलपमेंट के क्षेत्र में भी अन्य देशों के मुकाबले कई गुना आगे हैं. अमेरिका, चीन और रूस ऐसी योजना पर काम कर रहे हैं, जिसने नई बहस को जन्म दे दिया है.अमेरिका, रूस और चीन अब चांद पर न्यूक्लियर रिएक्टर बनाने की तैयारी कर रहे हैं. (AI फोटो)
Lunar Nuclear Reactor: भारत जैसे देश में एनर्जी प्रोडक्शन के लिए अभी तक पर्याप्त संख्या में न्यूक्लियर रिएक्टर डेवलप नहीं किए जा सके हैं. वहीं, अमेरिका, चीन और रूस जैसे देश धरती तो छोड़िए अब चांद पर न्यूक्लियर पावर रिएक्टर बनाने की प्लानिंग कर रहे हैं. इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि चांद पर भेजे गए मिशन को लंबे समय तक एनर्जी मिलता रहे, इसलिए इस मिशन पर काम किया जा रहा है. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी NASA संभवत: साल 2030 तक चांद पर न्यूक्लियर पावर रिएक्टर स्थापित भी कर दे. वहीं, रूस और चीन साथ मिलकर यह काम साल 2036 तक कर सकते हैं. इन सबके बीच एक बड़ा सवाल भी उठ खड़ा हुआ है कि क्या चांद के भूभाग पर अधिकार का दावा किया जा सकता है?
दरअसल, अमेरिका, चीन और रूस चांद पर परमाणु रिएक्टर विकसित करने की दौड़ में शामिल हो गए हैं. इन देशों का मानना है कि लंबे समय तक चांद पर बेस स्थापित करने, वहां के संसाधनों की खोज और अंतरिक्ष में आगे के मिशनों को समर्थन देने के लिए भरोसेमंद परमाणु ऊर्जा महत्वपूर्ण होगी. ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के अनुसार, NASA ने अगस्त में ऐसे परमाणु रिएक्टर की तैयारी करने को लेकर नोटिस जारी किया था, जो अंतरिक्ष यात्रा के दौरान सुरक्षित रह सके और चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास बिना नियमित मानवीय रखरखाव के काम कर सके. नासा का लक्ष्य इसे दिसंबर 2030 तक प्रक्षेपण के लिए तैयार करना है. वहीं, रूस चीन के साथ अपने गोपनीय सहयोग के तहत ‘सेलेना’ नामक चंद्र परमाणु रिएक्टर विकसित करने की योजना बना रहा है. इसे साल 2036 तक तैयार करने का लक्ष्य है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस रिएक्टर से चीन के नेतृत्व वाले लूनर स्टेशनों को बिजली उपलब्ध कराने की योजना है.
चांद पर परमाणु ऊर्जा की जरूरत क्यों?
चांद पर स्थायी बेस के लिए लगातार बिजली की जरूरत होगी. सौर ऊर्जा दिन के समय उपयोगी है, लेकिन चांद की रात पृथ्वी के हिसाब से दो सप्ताह से अधिक लंबी होती है. ऐसे में केवल सौर पैनल पर निर्भर रहना मुश्किल हो सकता है. परमाणु रिएक्टर सूर्य की रोशनी के बिना भी लंबे समय तक बिजली उपलब्ध करा सकते हैं और सीमित मानवीय हस्तक्षेप में काम कर सकते हैं. रिपोर्ट के अनुसार, नासा का प्रस्तावित ‘लूनर रिएक्टर-1’ करीब 20 किलोवाट बिजली पैदा करने और पांच साल तक बिना हस्तक्षेप के काम करने के लिए डिजाइन किया जा रहा है. रूस का ‘सेलेना’ रिएक्टर 10 किलोवाट तक बिजली पैदा कर सकता है और करीब एक दशक तक स्वायत्त रूप से संचालन के लिए प्रस्तावित है.
चांद पर किसका अधिकार?
इस दौड़ ने अंतरिक्ष कानून से जुड़े सवाल भी खड़े किए हैं. साल 1967 की आउटर स्पेस ट्रीटी के तहत कोई भी देश चांद पर अपना क्षेत्रीय अधिकार नहीं जता सकता. हालांकि, भविष्य में लूनर बेस के आसपास सुरक्षा क्षेत्र बनाने और वहां दूसरे देशों की गतिविधियों को सीमित करने का सवाल विवाद का कारण बन सकता है. अमेरिका को आशंका है कि चीन और रूस का संयुक्त परमाणु रिएक्टर किसी क्षेत्र को प्रतिबंधित क्षेत्र में बदल सकता है, जिससे अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों और रोवर्स की आवाजाही प्रभावित हो सकती है. विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे सुरक्षा क्षेत्र अगर बनाए जाते हैं तो उन्हें अंतरिक्ष में मुक्त पहुंच के सिद्धांत के साथ संतुलित करना होगा. फिलहाल अमेरिका, चीन और रूस में से किसी ने भी चांद पर परमाणु रिएक्टर स्थापित कर सफलतापूर्वक संचालित नहीं किया है. तकनीकी, सुरक्षा और कानूनी चुनौतियों के कारण इन परियोजनाओं की समयसीमा में बदलाव भी संभव है.
About the AuthorManish Kumar
बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…
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October 05, 2026, 09:23 IST



