Arjun Ki Chhal Ke Fayde: छाल से लेकर तने तक, जानिए किन बीमारियों में इस्तेमाल होता है अर्जुन का पेड़

गोंडा: अर्जुन का पेड़ अपने औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है. यह पेड़ काफी बड़ा और विशाल होता है और कई जगहों पर आसानी से देखने को मिल जाता है. पारंपरिक चिकित्सा पद्धति में अर्जुन की छाल का लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है. खास बात यह है कि जरूरत के अनुसार इसके तने और पेड़ के अन्य हिस्सों का भी उपयोग किया जाता है.
आयुर्वेद में अर्जुन की छाल का खास महत्व
लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति ने बताया कि अर्जुन की छाल को आयुर्वेद में विशेष महत्व दिया गया है. इसका इस्तेमाल कई तरह की पारंपरिक औषधीय तैयारियों में किया जाता है. अर्जुन की छाल को खास तौर पर हृदय से जुड़ी समस्याओं में उपयोगी माना जाता है.
उन्होंने बताया कि अर्जुन की छाल का उपयोग पारंपरिक रूप से कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में किया जाता रहा है. हालांकि किसी भी बीमारी में इसका इस्तेमाल चिकित्सक या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही करना चाहिए.
अर्जुन के तने और छाल का भी होता है इस्तेमाल
वैद्य विष्णु दत्त प्रजापति के अनुसार, अर्जुन के पेड़ के केवल एक हिस्से का ही इस्तेमाल नहीं होता है. जरूरत के अनुसार इसके तने, छाल और अन्य हिस्सों का भी उपयोग किया जाता है. अलग-अलग पारंपरिक उपचारों में इसके अलग-अलग हिस्सों को इस्तेमाल करने की विधि बताई गई है. उन्होंने बताया कि कुछ बीमारियों में अर्जुन के तने और छाल का प्रयोग किया जाता है. इसका इस्तेमाल कहां और किस तरह करना है, यह बीमारी और व्यक्ति की स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है.
ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी समस्याओं में उपयोग
वैद्य ने बताया कि अर्जुन का इस्तेमाल पारंपरिक रूप से ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी समस्याओं में किया जाता है. इसके अलावा शरीर में खून साफ करने के उद्देश्य से भी इसके उपयोग की बात कही जाती है. अर्जुन की छाल से तैयार की जाने वाली पारंपरिक औषधियों का इस्तेमाल भी कई लोग करते हैं. हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी बीमारी के इलाज के लिए केवल घरेलू या पारंपरिक उपायों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. दवा या अर्जुन से बनी किसी भी औषधि का इस्तेमाल विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना बेहतर होता है.
गांवों में आसानी से दिखता है अर्जुन का पेड़
अर्जुन का पेड़ सामान्य तौर पर काफी ऊंचा और मजबूत होता है. इसकी छाल बाहर से मोटी दिखाई देती है. यही छाल इसके औषधीय उपयोग के कारण सबसे ज्यादा चर्चा में रहती है. गांवों और ग्रामीण क्षेत्रों में भी अर्जुन के पेड़ देखने को मिल जाते हैं. अर्जुन का पेड़ न केवल पर्यावरण के लिए उपयोगी माना जाता है, बल्कि पारंपरिक चिकित्सा में भी इसकी अपनी अलग पहचान है. यही वजह है कि आयुर्वेद और पारंपरिक चिकित्सा में अर्जुन की छाल को लंबे समय से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है.



