CJP Delhi Protest Supreme Court Hearing। मक्खी मारने के लिए हथौड़ा मत चलाओ… दिल्ली प्रोटेस्ट पर CJI सूर्यकांत की दो टूक, तुषार मेहता देते रह गए सफाई

दिल्ली में शनिवार (10 अक्टूबर) को होने वाले सीजेपी प्रोटेस्ट को देखते हुए आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने राजधानी में दर्जनों मेट्रो स्टेशन से लेकर रेलवे तक बंद करने पर कड़ी आपत्ति जताई. सीजेआई ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को साफ शब्दों में कह दिया कि मक्खी मारने के लिए हथोड़ा मत चलाओ. CJI ने कहा कि प्रोटेस्ट अपनी जगह है, पर इस चक्कर में दिल्ली-गुरुग्राम के उन लाखों लोगों की रोजी-रोटी का गला क्यों घोंट रहे हो जो रोज सफर करते हैं? सुनवाई के दौरान SG तुषार मेहता ने पुराना हिसाब खोलते हुए बताया कि जुलाई वाले प्रोटेस्ट में परमिशन सिर्फ 1 दिन की थी और ड्रामा 17 दिन चला, जिसमें 200 पुलिसवाले घायल हो गए थे और इंटरनेट तक बंद करना पड़ा था. अब कोर्ट ने कह दिया है कि इलाके की जियोलॉजी देखकर पीसफुल प्रोटेस्ट होने दो, पर जनता परेशान नहीं होनी चाहिए. SG ने मेट्रो-रेल पर सरकार से बात कर बेहतर अरेंजमेंट करने का भरोसा दिया है. सुनवाई करने वाली बेंच में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के अलावा न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना थे.
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के मुख्य प्वाइंट्स
CJI सूर्यकांत: “यह मुद्दा हम विचार कर चुके हैं. मेट्रो को पूरी तरह रोकना और नियंत्रित करना अलग-अलग बातें हैं. नियमन समझ में आता है, लेकिन पूरी तरह ठप करना स्वीकार्य नहीं है.”
सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता: “कानून अधिकारी के रूप में मेरी चिंता यह है कि जैसे-जैसे स्थिति विकसित होती है, एजेंसियों को कुछ छूट दी जानी चाहिए. 20 जून को आयोजकों ने अनुमति मांगी थी, जो एक दिन की थी लेकिन वह 17 दिन तक चली और कई गंभीर उल्लंघन हुए. संसद भवन के प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश किया गया.”
जस्टिस जॉयमलया बागची: “मेट्रो नोटिस में बंदी का जिक्र फ्रिक्वेंसी घटाने से मेल नहीं खाता. रात 9 बजे से सभी गेट बंद कर देना प्रतिबंध है, वह भी अगले आदेश तक. ट्रेनों और मेट्रो के आवागमन को नियमित करें, लेकिन इसे पूरी तरह बंद न करें.”
कपिल सिब्बल (वरिष्ठ वकील): “होटलों को कहा जा रहा है कि ग्राहकों का रजिस्ट्रेशन न करें. रामलीला मैदान की अनुमति भी नहीं दी गई. नागरिकों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए.”
सी.यू. सिंह (वरिष्ठ वकील): “नागरिकों को इस तरह से एहतियातन पूरी तरह रोकने की कोई अवधारणा नहीं है. ट्रेनें बिल्कुल बंद कर दी गई हैं. पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए है.”
वृंदा ग्रोवर (वकील): “पुलिस पीजी (PGs) में जाकर लोगों से कह रही है कि बाहर न निकलें. इस तरह का डर का माहौल बनाया जा रहा है.”
गोपाल शंकरनारायणन: “पुलिस को हमारे पास आकर यह कहने का कोई अधिकार नहीं है कि विरोध प्रदर्शन में मत जाओ.”
जस्टिस वी. मोहना: “यदि नागरिकों के साथ कुछ अनहोनी होती है. तो आपको ध्यान रखना होगा. उनके पास सुरक्षा की जिम्मेदारी है.”



