Famous Rabri in Udaipur I ट्रेन में सफर कर रहे हैं तो मावली की राबड़ी जरूर चखें, स्वाद का जवाब नहीं

Last Updated:October 09, 2026, 16:10 IST
Kaka Rabri in Mavli: उदयपुर के मावली कस्बे की राबड़ी अपने खास स्वाद और मिठास के लिए देश ही नहीं, विदेशों तक मशहूर है. ताजे दूध से तैयार होने वाली इस पारंपरिक मिठाई की मावली जंक्शन पर भी खूब बिक्री होती है. जानिए कैसे बचपन में सीखा राबड़ी बनाने का हुनर आज इस कस्बे की खास पहचान बन गया है.
उदयपुर. मेवाड़ अपनी ऐतिहासिक धरोहरों, संस्कृति और परंपराओं के लिए तो मशहूर है ही, यहां के खान-पान की भी अपनी अलग पहचान है. यहां की कई ऐसी चीजें हैं, जिनका स्वाद लेने के लिए लोग दूर-दूर से पहुंचते हैं. ऐसी ही एक खास मिठास जुड़ी है उदयपुर के मावली कस्बे की राबड़ी से. यहां बनने वाली राबड़ी का स्वाद लोगों को इतना पसंद आता है कि इसकी मांग देश ही नहीं, विदेशों तक रहती है. सालों से यहां के कारीगर इस पारंपरिक राबड़ी को तैयार कर रहे हैं और आज भी इसकी लोकप्रियता बनी हुई है.
मावली में राबड़ी बनाने की परंपरा के पीछे यहां की पुरानी जीवनशैली और पशुपालन से जुड़ी कहानी है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस क्षेत्र में पहले बड़ी संख्या में लोग पशुपालन करते थे. दूध का उत्पादन भी काफी अधिक होता था, ऐसे में दूध का इस्तेमाल करने और उससे स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ तैयार करने के लिए राबड़ी बनाने की शुरुआत हुई. धीरे-धीरे इसका स्वाद लोगों को पसंद आने लगा और यह मावली की पहचान बन गई.
रेलवे स्टेशन पर भी खूब होती है बिक्री
मावली की राबड़ी की सबसे खास बात यह है कि इसे ताजे दूध से रोजाना तैयार किया जाता है. इसकी मिठास और स्वाद लोगों को खूब पसंद आता है. यही वजह है कि यहां आने वाले लोग इस राबड़ी का स्वाद चखना नहीं भूलते. देसी पर्यटकों के साथ विदेशी सैलानी भी इस पारंपरिक मिठाई का आनंद लेते हैं. सालों से चली आ रही इस परंपरा ने मावली को राबड़ी के शौकीनों के बीच एक अलग पहचान दिलाई है. मावली जंक्शन से गुजरने वाले यात्रियों के बीच भी इस राबड़ी की काफी मांग रहती है. यहां रुकने वाली ट्रेनों में राबड़ी की बिक्री देखने को मिलती है. कई यात्री सफर के दौरान इसका स्वाद लेते हैं, तो कुछ लोग इसे अपने साथ ले जाना भी पसंद करते हैं. इस तरह मावली की राबड़ी सिर्फ स्थानीय लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि सफर करने वाले लोगों के जरिए अलग-अलग जगहों तक पहुंच रही है.
10 साल की उम्र से सीखा राबड़ी बनाना
मावली में काका राबड़ी के संचालक बताते हैं कि उनके यहां लंबे समय से राबड़ी बनाने का काम होता आ रहा है. उन्होंने बताया कि जब वह करीब 10 साल के थे, तभी से राबड़ी बनाना सीखने लगे थे.बचपन में सीखा यह हुनर आज उनके कारोबार का आधार बन चुका है. अब वह अपनी दुकान पर राबड़ी तैयार कर लोगों को इसका स्वाद चखा रहे हैं. मावली की यह राबड़ी बताती है कि किसी जगह की पहचान सिर्फ उसकी बड़ी इमारतों और ऐतिहासिक धरोहरों से नहीं बनती, बल्कि वहां के पारंपरिक खान-पान से भी बनती है.पीढ़ियों से चले आ रहे हुनर, ताजे दूध से तैयार होने वाली राबड़ी और इसके खास स्वाद ने मावली को एक अलग पहचान दी है. यही वजह है कि यहां आने वाले लोग इस मिठास को चखने के साथ अपने साथ इसकी यादें भी लेकर जाते हैं.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Udaipur,Rajasthan
First Published :
October 09, 2026, 16:10 IST



