Shahpura Phad Painting: राष्ट्रपति भवन में गूंजा शाहपुरा की फड़ कला का गौरव, 3 कलाकारों को मिला सम्मान

Last Updated:October 09, 2026, 16:51 IST
Shahpura Phad Painting: भीलवाड़ा के शाहपुरा की 700 साल पुरानी फड़ चित्रकला को राष्ट्रपति भवन में खास पहचान मिली है. कलाकार शांतिलाल जोशी, विजय जोशी और विवेक जोशी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के सामने अपनी पारंपरिक कला का प्रदर्शन किया. इस दौरान फड़ चित्रों के जरिए विकसित भारत, भारतीय संस्कृति और वसुधैव कुटुंबकम् का संदेश भी दिया.
भीलवाड़ा. राजस्थान की प्रसिद्ध शाहपुरा फड़ चित्रकला को राष्ट्रपति भवन में प्रस्तुत कर तीन कलाकारों ने शहर का गौरव बढ़ाया है. शाहपुरा के फड़ कलाकार शांतिलाल जोशी, विजय जोशी और विवेक जोशी ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित कलाकार निवास कार्यक्रम में अपनी पारंपरिक कला का प्रदर्शन किया. इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कलाकारों से मुलाकात की और उनकी कला को देखा. राष्ट्रीय स्तर पर शाहपुरा की फड़ कला को मिले इस अवसर से क्षेत्र की समृद्ध लोक संस्कृति को नई पहचान मिली है. फड़ चित्रकला राजस्थान की एक खास पारंपरिक कला है, इसमें रंगों और रेखाओं के माध्यम से लोकदेवताओं, लोककथाओं, धार्मिक आस्था और जनजीवन से जुड़ी कहानियों को दिखाया जाता है. यह कला केवल चित्र बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि राजस्थान की संस्कृति और पुरानी परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी है.
शांतिलाल जोशी, विजय जोशी और विवेक जोशी ने राष्ट्रपति भवन में शाहपुरा की फड़ चित्रकला का प्रतिनिधित्व कर यह दिखाया कि यह कला आज भी जीवंत है. 700 सालों से पीढ़ियों से चली आ रही इस परंपरा को कलाकार अपनी मेहनत और साधना से आगे बढ़ा रहे हैं. शांतिलाल जोशी को वर्ष 1991 में राष्ट्रपति पुरस्कार सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिल चुके हैं. उनकी कला पर कई डॉक्यूमेंट्री भी बनाई गई हैं. विजय जोशी को वर्ष 2003 में राष्ट्रीय मेरिट पुरस्कार, राष्ट्रीय फेलोशिप और अन्य सरकारी सम्मान प्राप्त हुए हैं. उन्हें 24 मार्च 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी सम्मानित किया था. वहीं विवेक जोशी को भारत सरकार की ओर से राष्ट्रीय स्कॉलरशिप और राष्ट्रीय फेलोशिप मिल चुकी है.
फड़ चित्रों में दिखाया विकसित भारत का सपना
राष्ट्रपति भवन में कलाकारों ने अपनी पारंपरिक चित्रकला के जरिए विकसित भारत, भारतीय संस्कृति और वसुधैव कुटुंबकम् जैसे विषयों को भी प्रस्तुत किया. यह प्रयोग खास रहा क्योंकि इसमें पुरानी कला शैली के माध्यम से आज के भारत के विचारों और भविष्य की उम्मीदों को दिखाया गया. इससे यह संदेश मिला कि लोककलाएं केवल बीते समय की पहचान नहीं हैं, बल्कि इनके जरिए आज के विषयों को भी लोगों तक पहुंचाया जा सकता है. परंपरा और आधुनिक सोच का यह मेल फड़ चित्रकला को नए लोगों तक पहुंचाने में मददगार साबित हो सकता है.
नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी
राष्ट्रपति भवन में शाहपुरा की फड़ कला की प्रस्तुति ने छोटे शहरों में मौजूद प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने का महत्व भी सामने रखा है. तीनों कलाकारों की सफलता युवाओं के लिए प्रेरणा है कि अपनी परंपरा और संस्कृति से जुड़े रहकर भी बड़े मुकाम हासिल किए जा सकते हैं. नई पीढ़ी को इस कला की तकनीक, इतिहास और इससे जुड़ी लोककथाओं के बारे में जानकारी देनी होगी. कलाकारों को प्रोत्साहन और सम्मान मिलने से इस विरासत को बचाने में मदद मिलेगी. शांतिलाल जोशी, विजय जोशी और विवेक जोशी ने राष्ट्रपति भवन में अपनी कला के माध्यम से शाहपुरा की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाया है. अब जरूरत है कि इस गौरवशाली परंपरा को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएं.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
और पढ़ेंLocation :
Bhilwara,Rajasthan
First Published :
October 09, 2026, 16:51 IST



