Achalgarh Fort in Mount Abu Sirohi Rajasthan History and Current Condition

Last Updated:October 13, 2026, 18:37 IST
राजस्थान के सिरोही जिले के माउंट आबू में स्थित ऐतिहासिक अचलगढ़ का किला आज प्रशासन की अनदेखी के कारण खंडहर में बदल रहा है. इस किले का निर्माण परमार वंश ने करवाया था और बाद में महाराणा कुंभा ने इसका पुनर्निर्माण करवाया था.
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सिरोही : राजस्थान की एकमात्र हिल स्टेशन आबूराज (माउंट आबू) में देश विदेश के पर्यटक यहां के विभिन्न पर्यटन स्थल घूमने यहां आते हैं. इन्हीं में से एक प्रमुख पर्यटन स्थल है अचलगढ़ का किला. पर्यटक यहां अब इस किले के खंडहर को देखने आते हैं. प्रशासन द्वारा किले के स्ट्रक्चर पर ध्यान नहीं दिए जाने से यहां अब केवल कुछ किले की दीवारें और टूटे फूटे स्ट्रक्चर ही बचे हैं. ऐसे में पर्यटकों को किले की ये दशा देखकर निराशा भी होती हैं.माउंट आबू शहर से करीब 7 किलोमीटर दूर अचलगढ़ क्षेत्र में एक पहाड़ी पर बनाए किला परमार राजवंश के राजाओं द्वारा बनवाया गया था. इस किले का मूल निर्माण 9वीं-10वीं शताब्दी में परमार वंश के शासकों ने करवाया था. बाद में 1452 में मेवाड़ के शासक महाराणा कुंभा ने इसका पुनर्निर्माण करवाया था. इसके बाद इस किले को अचलगढ़ का नाम दिया गया था. इस वर्ष पर कई बाहरी आक्रांताओं ने हमले कर इसे लूटने और तोड़ने का भी प्रयास किया. समय के साथ ये किला अब खंडहर ही हो गया है. स्थानीय रहवासी संजय जानी ने बताया कि ये माउंट आबू शहर की ऐतिहासिक धरोहर है. देशभर से यहां पर्यटक आने के बावजूद किले के स्ट्रक्चर को सुरक्षित रखने पर प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा है. कई जगह से दीवारें जर्जर होकर ढह रही है. कई जगह लगे किले की जानकारी से जुड़े बोर्ड भी खराब हो गए है. वहीं पहाड़ी के ऊपरी भाग में किले के स्ट्रक्चर के आसपास झाड़ियों का अंबार लगा है. अगर प्रशासन किले की सार सम्भाल पर ध्यान दे, तो यहां पर्यटन को बढ़ाने में काफी मदद मिलेगी.
महाराणा कुम्भा के 32 किलो में से एक है ये किलास्थानीय रहवासी दिलीप कुमार ने बताया कि ये किला महाराणा कुम्भा द्वारा अपने समय में बनाए गए 32 किलो में से एक है. इस किले के दो प्रमुख द्वार हैं. जिसमें निचले हिस्से के प्रवेश द्वार को हनुमान पोल कहा जाता है, जिसमें बड़े पत्थरों से बने दो बुर्ज हैं. थोड़ी और चढ़ाई करने पर किले का आंतरिक द्वार आता है, जिसे चंपा पोल या गणेश पोल के नाम से जाना जाता है. किले के अंदर महाराणा कुंभा के महलों के खंडहर, ओखा रानी का महल और अनाज भंडारण के स्थान देखे जा सकते हैं. यहाँ राजा और दरबारियों के लिए सभा मंडप और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पूजा मंडप बने हुए थे. अगर प्रशासन वर्तमान के किले के स्ट्रक्चर को संभालने और जर्जर दीवारों के पुनर्निर्माण पर ध्यान दें, तो पर्यटकों को आकर्षित करने में काफी मदद मिल सकती है.
किले के परिसर में बने है कई प्राचीन मंदिर :ये किला केवल सुरक्षा की दृष्टि से अहम होने के अलावा धार्मिक दृष्टि से भी अहम था. यहां प्राचीन अचलेश्वर महादेव, चामुंडा माता, महाकाली मंदिर के अलावा मीराबाई की झोपड़ी, सावन भादो कुंड और मंदाकिनी कुंड बना हुआ है. वहीं यहां किले के रास्ते में 1513 ईस्वी का भगवान आदिनाथ और पार्श्वनाथ को समर्पित भव्य जैन मंदिर भी बना हुआ है. इन मंदिरों की नक्काशी और स्फटिक के पत्थरों का काम दिलवाड़ा जैन मंदिर जैसा है. कुछ माह पूर्व प्रशासन की ओर से मंदाकिनी कुंड का जीर्णोद्धार का काम शुरू किया गया था, लेकिन मुख्य किले प्रधान नहीं दिए जाने से पर्यटकों को परेशानी होती है.
Location :
Sirohi,Rajasthan
First Published :
October 13, 2026, 18:37 IST



