Health

क्या इंफेक्शन से भी हो सकता है कैंसर? 12 फीसदी मामलों में यही है वजह, लेकिन सिंपल है बचने का तरीका

Last Updated:October 13, 2026, 18:14 IST

12% Cancer by Infection: वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक 2024 में दुनिया भर में जितने कैंसर के मामले आए हैं उनमें 12 प्रतिशत कैंसर की वजह इंफेक्शन ही था. कुछ बैक्टीरिया और वायरल इफेक्शन शरीर में ज्यादा दिनों तक रह जाए तो इससे कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. खास बात यह है कि इंफेक्शन वाले कैंसर से आसानी से बचा जा सकता है.Amazon Prime DayTop Deals Insideक्या इंफेक्शन से भी हो सकता है कैंसर? 12 फीसदी मामलों में यही है वजह Zoomइंफेक्शन वाले कैंसर से कैसे बचें. Photo : Canva

Cancer Cause by Infection: क्या इंफेक्शन से कैंसर हो सकता है? आप भी सोचेंगे कि यह कौन सा सवाल है. ऐसा तो कभी सुना नहीं था लेकिन ध्यान से अगर इन बातों पर गौर करेंगे तो कुछ कैंसर ऐसे होते हैं जो सिर्फ इंफेक्शन की वजह से होता है. अगर इन इंफेक्शन वाले बैक्टीरिया या वायरस शरीर में ज्यादा दिनों तक रह जाए तो यह कोशिकाएं के डीएनए को बदल देता है और समय के साथ यह कैंसर कोशिकाओं में बदल जाता है. यही कारण है कि 2024 में 12 प्रतिशत कैंसर के मामले इंफेक्शन की वजह से आए. इन कैंसर को आसानी से होने से रोका जा सकता था. द लैंसेट ऑन्कोलॉजी में प्रकाशित इस रिपोर्ट के मुताबिक 2024 में 23 लाख कैंसर का संबंध किसी न किसी इंफेक्शन से ही था. इंफेक्शन में मुख्य रूप से 5 तरह के इंफेक्शन इन कैंसर की सबसे बड़ी वजह थे.

किन-किन इंफेक्शन से कैंसर

लैंसेट की रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा हेलिबैक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया के इंफेक्शन से कैंसर के मामले देखे गए. हेलिबैक्टर पाइलोरी बैक्टीरिया आंत में पाए जाते हैं. अगर ये ज्यादा दिनों तक आंतों में अपना घर बना लें तो इससे पेट के कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. हेलिबैक्टीरिया के बाद ह्यूमन पैपिलोमावायरस या एचपीवी का नंबर आता है. एचपीवी जननांगों में पाए जाने वाला वायरस है. एचपीवी का कुछ रूप खतरनाक होता है और अगर ये गर्भाशय में बहुत दिनों तक रह जाए तो इससे कैंसर की बीमारी होती है. इस कारण महिलाओं के गर्भाशय ग्रीवा में सर्वाइकल कैंसर होता है. हेपटाइटिस बी और हेपटाइटिस सी वायरस के कारण लिवर में कैंसर हो सकता है. इसके बाद एपस्टीन वार वायरस भी कैंसर का कारण बन सकता है. कुछ मिलाकर पेट, लिवर, ब्लड, सर्वाइकल कैंसर की सबसे बड़ी वजह ये इंफेक्शन ही होते हैं. इसके साथ ही ओरल कैंसर के कुछ मामले भी एचपीवी वायरस के इंफेक्शन से होते हैं.

वायरल इंफेक्शन से कैंसर क्यों

जब ये वायरस शरीर में घुसता है तो समय के साथ उसमें अपना घर बना लेता है. इसके बाद यह किसी कोशिका में घुस जाता है और उस कोशिका में तरह-तरह से बदलाव को जन्म देता है. अगर कोशिका में डीएनए को बदल दिया तो यही कोशिका कैंसर कोशिका में बदल जाता है. इन कोशिकाओं में खुद को नष्ट करने की क्षमता होती है, दूसरा यह कोशिका विभाजन को रोक देती है या तेज कर देती है. वायरस के कैंसर पैदा करने का दूसरा तरीका होस्ट कोशिका के डीएनए में अपना खुद का डीएनए डालना है. इसका तीसरा तरीका तब होता है जब वायरस खुद ऐसा जीन लेकर चलता है जो कैंसर का कारण बनता है. कई मामलों में वायरस ने दुर्घटनावश किसी अन्य जीव से इन जीनों को हासिल कर लिया होता है.

बैक्टीरिया और परजीवियों का कैंसर से कनेक्शन

कैंसर का कारण केवल वायरस ही नहीं होते हैं. बैक्टीरिया या परजीवियों के इंफेक्शन से भी कैंसर हो सकता है. जैसे हेलिकोबैक्टर पाइलोरी पेट के अल्सर को जन्म देता है. इसी तरह ओपिस्टोरचिस विवरिनी एक लिवर फ्लुक यानी एक प्रकार का परजीवी है जो कैंसर का कारण बन सकते हैं. हालांकि ये वायरस की तुलना में तेजी से कैंसर का कारण नहीं बनते. ये लंबे समय तक कहीं पर पड़े होते हैं लेकिन समय के साथ पहले यह क्रोनिक बीमारी पैदा करते हैं और उसके बाद इंफ्लामेशन को तेज कर देता है. इसके कारण कोशिकाओं में कैंसर पैदा करने वाला डीएनए का नुकसान हो सकता है.

कई कैंसर का रोका जा सकता है

बेशक इंफेक्शन के कारण कैंसर होता है लेकिन इनमें से अधिकांश मामलों को हम समय से पहले रोक सकते हैं. जैसे महिलाओं में होने वाला एचपीवी वायरस के कारण इंफेक्शन. इससे सर्वाइकल कैंसर होता है. एचपीवी वायरस हर इंसान में होता है. लेकिन इसके लिए दो-तीन वैरिएंट कैंसर का कारण बन सकते हैं. इसमें बहुत लंबा वक्त लगता है. 5 से 10 में एचपीवी वायरस कैंसर को जन्म देता है. इसलिए अगर महिला दो-तीन साल में एक बार एचपीवी वायरस का टेस्ट करा ले तो उस समय इसे वायरस को आसानी से निकालकर कैंसर से बचाया जा सकता है. जब कोई पुरुष महिला के साथ ओरल यौन संबंध बनाता है और उस महिला में एचपीवी के कैंसर वाला वैरिएंट है तो ऐसे पुरुषों में ओरल कैंसर होने का खतरा रहता है. इसलिए ओरल संबंध बनाने से पहले डेंटल डैम का इस्तेमाल किया जाए तो इस कैंसर से आसानी से बचा जा सकता है. वहीं पेट में हेलिबैक्टर पाइलोरी नाम का बैक्टीरिया होता है. इसे भी समय-समय पर टेस्ट कराया जाना चाहिए. अगर यह बैक्टीरिया पेट में मौजूद है तो इसे आसानी से मारा जा सकता है. यानी समय पर जांच थोड़े अलर्टनेस से इंफेक्शन के कारण होने वाले कैंसर से बचा जा सकता है.

About the AuthorLakshmi Narayan

मीडिया में 20 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले लक्ष्मी नारायण पत्रकारिता के हर विधा में माहिर हैं. भविष्य की आहट और ट्रेंड्स को समय से पहले भांपने की अद्भुत कला उनके अंदर समाहि…

और पढ़ेंFirst Published :

October 13, 2026, 18:14 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj