40 साल का श्याम दिन भर में 5 चम्मच चावल और 3 रोटी खाता है, फिर भी ब्लड शुगर का मीटर रहता है हाई, क्यों, डॉक्टर से जानें

Last Updated:October 14, 2026, 14:10 IST
Why Blood Sugar High: श्याम 40 साल का है. वह मल्टीनेशनल कंपनी में काम करता है. पिछले कुछ दिनों से वह परेशान है. उसका फास्टिंग ब्लड शुगर 140 को पार कर जाता है. शुगर के डर से वह सिर्फ 5 चम्मच चावल और 3 चम्मच रोटी खाता है. इसके बावजूद ये हाल है. आखिर ऐसा क्यों होता है. आइए इसके बारे में सी के बिड़ला अस्पताल में डायबेट्स, ओब्सिटी एंड मेटाबोलिक क्लीनिक के डायरेक्टर डॉ. पारस अग्रवाल से जानते हैं.सही खान-पान के बावजूद ब्लड शुगर क्यों बढ़ जाती है. Photo : AI
Why Blood Sugar High : यह कहानी थोड़ा हटके है. इससे पहले ये बता दूं कि अब इस बात का कोई मतलब नहीं कि डायबिटीज 50 या 60 साल के बाद के लोगों को होती है. यहां 40 साल के श्याम की कहानी बता रहा हूं. श्याम डायबिटीज की चपेट में हैं. साल भर पहले ही उसे पता चला कि उसे डायबिटीज है. तब से वह पूरी तरह परहेज में रहता है. वह कभी भी अब मीठी चीजें नहीं खाता. यहां तक कि चावल भी वह चार से पांच चम्मच पूरे दिन में खाता है और सिर्फ 3 रोटियां खाता है. जब वह पहली बार टेस्ट कराया था तो फास्टिंग ब्लड शुगर 160 था और HbA1c 6.9 था. अब जब वह परहेज करने लगा है तो HbA1c 6.7% रह गया है लेकिन फास्टिंग ब्ड शुगर 140 से कम नहीं हो रहा है. आखिर इसका क्या कारण है कि शुगर नहीं घट रही है. यही सवाल हमने सी के बिड़ला अस्पताल में डायबेट्स, ओब्सिटी एंड मेटाबोलिक क्लीनिक के डायरेक्टर डॉ. पारस अग्रवाल से जानना चाहा.
पहला कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस
डॉ. पारस अग्रवाल ने बताया कि अगर श्याम हेल्दी है और पूरी तरह से परहेज में रहता है, इसके बावजूद ब्लड शुगर 140 से नीचे नहीं आती तो इसका मतलब है कि श्याम टाइप 2 डायबिटीज का शिकार हो गया है. ऐसे मामलों में सबसे ज्यादा इंसुलिन रेजिस्टेंस का जोखिम रहता है. मतलब इंसुलिन तो बनता है लेकिन वह सही से काम नहीं कर रहा है. इंसुलिन एक हार्मोन है जो कार्बोहाइड्रैट या शुगर को पचाकर उसे एनर्जी में बदल देता है. जब यह एनर्जी में नहीं बदलेगा तो शुगर खून में बढ़ता जाएगा. यही श्याम के साथ हो रहा होगा. अब यह समझिए कि इंसुलिन रेजिस्टेंस क्यों हो जाता है. डॉ. पारस अग्रवाल ने बताया कि इंसुलिन एक कैरियर है और यह खून से ग्लूकोज को ढोकर मासंपेशियों तक पहुंचाता है जहां यह एनर्जी में बदल जाता है. लेकिन रेजिस्टेंस की वजह से मांसपेशियों की कोशिकाओं में पहुंच ही नहीं पाता. यह ठीक उसी तरह है जैसे आप एक ट्रक से सामान लेकर बॉर्डर पर जा रहे हैं लेकिन वहां जाने से पहले आपको रोक दिया जाता है क्योंकि आपके पास गेट पास नहीं है.नतीजतन सामान ट्रक में ही फंसा रहता है या ट्रक से बाहर कहीं रख दिया जाता है. ठीक इसी तरह इंसुलिन तो बनता है लेकिन मांसपेशियों वाली कोशिकाओं की सतह पर मौजूद इंसुलिन रिसेप्टर्स सही से काम नहीं करते. इसलिए इंसुलिन रेजिस्टेंस की स्थिति में कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति संवेदनशील नहीं रह जातीं. इससे यह रिसेप्टर-लिगैंड बाइंडिंग और सिग्नलिंग को बाधित कर देता है. परिणामस्वरूप, ग्लूकोज कोशिकाओं के अंदर प्रवेश नहीं कर पाता और खून में ही जमा रहता है.
दूसरा कारण लिवर ग्लूकोज बनाने लगता
डॉ. पारस अग्रवाल बताते हैं कि इसका दूसरा कारण लिवर के स्तर पर रेजिस्टेंस होगा. आमतौर पर ऐसे मरीजों का वजन थोड़ा बढ़ा हुआ होगा और उसे फैटी लिवर डिजीज भी हो सकता है. दरअसल, जब हम रात भर सोते हैं तो उस दौरान शरीर में एनर्जी प्रदान करने की जिम्मेदारी लिवर की होती है. सामान्य स्थिति में इंसुलिन हार्मोन लिवर को रात में अतिरिक्त ग्लूकोज रिलीज करने से रोकता है. लेकिन इंसुलिन रेजिस्टेंस की स्थिति में लिवर पर इंसुलिन का नियंत्रण कमजोर हो जाता है. इसे हेपैटिक इंसुलिन रेजिस्टेंस कहते हैं. इसके कारण लिवर रात भर पहले से जमा ग्लाइकोजन को तोड़कर उसे नया ग्लूकोज बनाकर खून में छोड़ता रहता है. इससे सुबह ब्लड शुगर बढ़ी हुई रहती है.
तीसरा कारण तनाव ज्यादा
डॉ. पारस अग्रवाल ने बताया कि तीसरा लेकिन सबसे बड़ा कारण तनाव है. जैसा कि सबको यह बात पता है कि तनाव वाला हार्मोन हमारे पूरे सिस्टम को खराब कर देता है. जब व्यक्ति तनाव में होता है तो कॉर्टिसोल हार्मोन निकलता है. कॉर्टिसोल हार्मोन में भी इंसुलिन को काम करने से रोकता है. कॉर्टिसोल हार्मोन एक ग्लूकोकॉर्टिकोइड हार्मोन है जो सीधे तौर पर इंसुलिन की काम करने की क्षमता को बाधित करता है और शरीर में ग्लूकोज के स्तर को बढ़ा देता है.
ऐसे मरीज को क्या करना चाहिए
डॉ. पारस अग्रवाल ने बताया कि चूंकि HbA1c 6.9 प्रतिशत है और फास्टिंग ब्लड शुगर 140 है. इन स्थितियों में हम अब भी कुछ दिन बिना दवा लाइफस्टाइल और खान-पान सही करने की सलाह देंगे. श्याम खान-पान को मैंटेन करके चल रहा है जो अच्छी बात है. अब उसे मुख्य रूप से दो चीजों पर ध्यान देना होगा. पहला अगर वजन ज्यादा है तो पहले वजन कम करना होगा. इससे फैटी एसिड भी ठीक हो जाएगा. दूसरा लाइफस्टाइल ठीक करना होगा. इसके लिए सबसे पहले तनाव को कम करना होगा. तनाव कम करने के लिए रोज योगा और मेडिटेशन सबसे फायदेमंद होगा. इसके अलावा वह वॉक भी कर सकता है. रोज कम से कम आधा घंटा एक्सरसाइज करनी जरूरी है लेकिन तनाव के लिए योग-मेडिटेशन ही सबसे बेस्ट है. जितना खुश रहेगा उतना फायदेमंद होगा. इसलिए श्याम को रेगुलर एक्सरसाइज, योग, मेडिटेशन और खुश रहने की जरूरत है.
About the AuthorLakshmi Narayan
With 20 years of extensive experience in Hindi journalism, Lakshmi Narayan is a distinguished media professional and digital team leader at Network18, managing edit…
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October 14, 2026, 14:10 IST



