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IPS Preeti Chandra Biography, UPSC Story: सरकारी स्कूल में पढ़ीं फौजी की बेटी, बिना कोचिंग बनीं IPS, खौफ खाते थे चंबल के डकैत

IPS Preeti Chandra Biography: राजस्थान के सीकर जिले के एक छोटे से गांव में जन्मी किसान और सैनिक परिवार की बेटी जिसने सरकारी स्कूल में पढ़ाई की, पत्रकारिता में हाथ आजमाया, बच्चों को पढ़ाया और फिर बिना किसी कोचिंग के यूपीएससी की परीक्षा पास कर आईपीएस अफसर बन गई. यह कहानी है राजस्थान पुलिस की तेजतर्रार अधिकारी डॉ. प्रीति चंद्रा की. वही प्रीति चंद्रा जिन्हें उनकी सख्त कार्यशैली के कारण ‘लेडी सिंघम’ के नाम से भी जाना जाता है. करौली में तैनाती के दौरान चंबल के बीहड़ों में डकैतों के खिलाफ अभियान चलाने से लेकर मानव तस्करी के गिरोहों पर कार्रवाई तक उनके नाम कई चर्चित मामले जुड़े हैं. अब भरतपुर रेंज की आईजी के रूप में उन्होंने साइबर ठगी करने वालों को ऐसी नसीहत दी है जिसकी खूब चर्चा हो रही है. उन्होंने अपराधियों से कहा कि गलत तरीके से कमाया गया पैसा कभी सुख नहीं देता, बल्कि लोगों की हाय और बददुआ लेकर आता है. आइए जानते हैं कि आखिर आईपीएस प्रीति चंद्रा कौन हैं, कहां की रहने वाली हैं, कितनी पढ़ी-लिखी हैं, कब आईपीएस बनीं और किन कार्रवाइयों से सुर्खियों में आईं…

सैनिक पिता की बेटी हैं प्रीति, गांव में हुआ जन्म

आईपीएस डॉ. प्रीति चंद्रा मूल रूप से राजस्थान के सीकर जिले के कूदन गांव की रहने वाली हैं. उनका जन्म वर्ष 1979 में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था.उनके पिता रामचंद्र सुंडा भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके हैं. सेवानिवृत्ति के बाद वे सामाजिक कार्यों से भी जुड़े रहे हैं.प्रीति चंद्रा की परवरिश ऐसे परिवार में हुई जहां मेहनत, अनुशासन और जिम्मेदारी को महत्व दिया जाता था. उनके पिता की सैनिक पृष्ठभूमि के कारण परिवार में देशसेवा की भावना भी रही.

गांव के सरकारी स्कूल से पढ़ीं

प्रीति चंद्रा की शुरुआती शिक्षा सीकर जिले के उनके गांव के सरकारी स्कूल में हुई. स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए जयपुर का रुख किया. उन्होंने जयपुर के महारानी कॉलेज में पढ़ाई की.उन्होंने एमए, बीएड और एमफिल तक की पढाई की.पढ़ाई के दौरान उनकी रुचि केवल किताबों तक सीमित नहीं रही. उन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने का अनुभव भी हासिल किया. यही वजह है कि आईपीएस बनने से पहले वे पत्रकारिता और अध्यापन जैसे क्षेत्रों से भी जुड़ी रहीं.

कभी बच्चों को पढ़ाया और आखिर में बन गईं IPS

प्रीति चंद्रा के करियर की खास बात यह है कि उन्होंने शुरुआत से ही केवल पुलिस सेवा को अपना एकमात्र विकल्प नहीं बनाया था.पढ़ाई के दौरान और उसके बाद उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में भी काम किया. इसके बाद उन्होंने अध्यापन के क्षेत्र में भी काम किया और बच्चों को पढ़ाया. शिक्षक के रूप में काम करने के बावजूद उनका लक्ष्य प्रशासनिक सेवा में जाने का था. वे सिविल सेवा परीक्षा पास करके बड़े स्तर पर लोगों के लिए काम करना चाहती थीं.इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की.

बिना कोचिंग पहले ही प्रयास में पास की UPSC परीक्षा

आईपीएस प्रीति चंद्रा की सफलता की कहानी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उनकी यूपीएससी की तैयारी है. उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए किसी कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया.उन्होंने स्वयं पढ़ाई करके परीक्षा की तैयारी की और पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की. प्रीति चंद्रा वर्ष 2008 बैच की राजस्थान कैडर की आईपीएस अधिकारी हैं. उनकी ऑल इंडिया रैंक 249 थी.

2008 में बनीं आईपीएस, कई जिलों में संभाली जिम्मेदारी

भारतीय पुलिस सेवा में चयन के बाद प्रीति चंद्रा ने राजस्थान में अलग-अलग पदों पर जिम्मेदारियां संभालीं.उनकी तैनाती करौली, बूंदी, बीकानेर और जयपुर जैसे जिलों में रही है. इसके अलावा कोटा में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो यानी एसीबी से जुड़ी.उन्होंने जोधपुर में भी सेवाएं दी हैं.अलग-अलग जगहों पर तैनाती के दौरान उनका सामना कई तरह की चुनौतियों से हुआ. कहीं डकैतों के खिलाफ अभियान चलाने पड़े, तो कहीं मानव तस्करी और दूसरे अपराधों पर कार्रवाई करनी पड़ी. उनकी पहचान ऐसी अधिकारी के रूप में बनी जो कानून-व्यवस्था के मामलों में सख्त रुख अपनाने के साथ जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए भी आगे आती रही हैं.

करौली में चंबल के डकैतों के खिलाफ चलाए अभियान

आईपीएस प्रीति चंद्रा के करियर का सबसे चर्चित हिस्सा करौली में उनकी तैनाती से जुड़ा है.करौली जिले का कुछ हिस्सा चंबल के बीहड़ों से जुड़ा हुआ है. यह इलाका लंबे समय तक डकैतों की गतिविधियों के कारण चर्चा में रहा है.करौली में पुलिस अधीक्षक के रूप में तैनाती के दौरान प्रीति चंद्रा ने डकैतों के खिलाफ अभियान चलाए.उनके कार्यकाल में पुलिस की कार्रवाई और दबाव के चलते कई डकैतों ने आत्मसमर्पण किया.इन अभियानों के बाद उनकी छवि एक सख्त और निडर पुलिस अधिकारी की बनी.जिसके बाद उन्हें ‘लेडी सिंघम’ कहा जाने लगा.

मानव तस्करी के खिलाफ कार्रवाई से भी बटोरीं सुर्खियां

करौली में डकैतों के खिलाफ अभियान के अलावा बूंदी में तैनाती के दौरान भी प्रीति चंद्रा चर्चा में रहीं. बूंदी में पुलिस अधीक्षक रहते हुए उन्होंने मानव तस्करी से जुड़े गिरोहों के खिलाफ कार्रवाई की.इन कार्रवाइयों के दौरान पीड़ित लड़कियों को तस्करी के चंगुल से निकालने और उनके पुनर्वास के प्रयास किए. प्रीति चंद्रा की इन कार्रवाइयों ने उनकी पहचान अपराधियों के खिलाफ सख्त और पीड़ितों के प्रति संवेदनशील अधिकारी के रूप में मजबूत की.

बीकानेर की पहली महिला एसपी भी रहीं प्रीति चंद्रा

प्रीति चंद्रा के पुलिस करियर से एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ी है.वे बीकानेर जिले की पहली महिला पुलिस अधीक्षक भी रही हैं.बीकानेर जैसे बड़े जिले में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालना उनके करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा. इसके अलावा उन्होंने जयपुर और अन्य स्थानों पर भी अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाईं.कोविड के दौरान जोधपुर में गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों की मदद की. जोधपुर में उनकी सेवाओं से जुड़े मानवीय पहलुओं की भी चर्चा हुई थी.उन्होंने उस मुश्किल दौर में गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों की सहायता के लिए पहल की थी.महामारी के दौरान आवाजाही पर पाबंदियों और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के कारण कई लोगों को मदद की जरूरत थी.जोधपुर में प्रीति चंद्रा की भूमिका को इसी संदर्भ में याद किया जाता है.राजस्थान पुलिस में अपनी सेवाओं के लिए प्रीति चंद्रा को सम्मान भी मिल चुका है.राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने उन्हें ‘मुख्यमंत्री सराहनीय पदक’ से सम्मानित किया था.

IPS विकास पाठक से हुई शादी

आईपीएस प्रीति चंद्रा की निजी जिंदगी भी पुलिस सेवा से जुड़ी है. उनके पति विकास पाठक भी भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी हैं.दोनों की मुलाकात मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में प्रशिक्षण के दौरान हुई थी. इसके बाद दोनों ने वर्ष 2010 में जयपुर में शादी की.विकास पाठक के भारत-तिब्बत सीमा पुलिस यानी आईटीबीपी में डीआईजी पद पर कार्यरत रहे.

जयपुर में डीआईजी ट्रेनिंग रहीं प्रीति

प्रीति चंद्रा जयपुर में डीआईजी ट्रेनिंग के पद पर भी कार्यरत रही हैं. अब वे भरतपुर रेंज की पुलिस महानिरीक्षक यानी आईजी के रूप में चर्चा में हैं.आईजी का पद डीआईजी से वरिष्ठ होता है. इस पद पर अधिकारी के पास बड़े क्षेत्र में पुलिस व्यवस्था की निगरानी और कानून-व्यवस्था से जुड़ी जिम्मेदारियां होती हैं.भरतपुर रेंज में जिम्मेदारी संभालने के बाद प्रीति चंद्रा ने डीग जिले का दौरा किया और अलग-अलग थानों में पुलिस के कामकाज की समीक्षा की.इसी दौरे के दौरान साइबर अपराधियों को दी गई उनकी नसीहत सुर्खियों में आ गई.

अब क्यों चर्चा में हैं IPS प्रीति चंद्रा?

भरतपुर रेंज की आईजी डॉ. प्रीति चंद्रा इन दिनों डीग जिले में पुलिस थानों के निरीक्षण और साइबर अपराध को लेकर दिए गए अपने बयान के कारण चर्चा में हैं.उन्होंने डीग जिले के जुरहरा, गोपालगढ़ और कैथवाड़ा थानों का औचक निरीक्षण किया. ये इलाके मेवात क्षेत्र से जुड़े हैं, जहां साइबर ठगी के मामलों को लेकर समय-समय पर पुलिस कार्रवाई होती रही है.इस दौरान उन्होंने साइबर ठगी करने वालों से अपराध का रास्ता छोड़ने की अपील भी की.

‘गलत तरीके से कमाया पैसा हाय और बददुआ लेकर आता है’

डीग दौरे के दौरान प्रीति चंद्रा ने साइबर अपराधियों को समझाने के लिए एक भावुक उदाहरण दिया.उन्होंने कहा कि गलत तरीके से कमाया गया पैसा कभी नहीं टिकता. ऐसा पैसा अपने साथ उन लोगों की हाय और बददुआ लेकर आता है, जिन्हें ठगी का शिकार बनाया गया है.उन्होंने समझाया कि जब कोई ठग किसी व्यक्ति के कैंसर के इलाज के लिए बचाकर रखे पैसे निकाल लेता है, तो उसका असर केवल उस व्यक्ति पर नहीं पड़ता, बल्कि पूरे परिवार पर पड़ता है. इसी तरह अगर किसी गरीब परिवार ने बेटी की शादी के लिए पैसे जोड़कर रखे हों और कोई साइबर ठग वह रकम उड़ा ले, तो उस परिवार की वर्षों की मेहनत एक झटके में खत्म हो सकती है.आईजी ने कहा कि इस तरह की कमाई किसी को वास्तविक सुख नहीं दे सकती.

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