जीते-जी ही नहीं, मरने के बाद भी नहीं मिल रहा सुकून, नया गांव का श्मशान घाट बना तालाब

Last Updated:October 15, 2026, 07:54 IST
Pali Ground Report: अपनों को अंतिम विदाई देने के लिए आने वाले लोगों को यदि श्मशान घाट में घुटनों तक भरे पानी और कीचड़ से गुजरना पड़े, तो यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है. पाली के नया गांव स्थित मोक्षधाम में ऐसे ही हालात बने हुए हैं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि श्मशान घाट के बड़े हिस्से में सालभर पानी जमा रहता है और बारिश के दौरान स्थिति और बिगड़ जाती है. पानी की निकासी नहीं होने से अंतिम संस्कार के लिए शव को परिसर के भीतर ले जाना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है. यहां छोटे बच्चों को दफनाने वाले हिस्से में भी जलभराव की समस्या बनी हुई है. रहवासियों के मुताबिक, नजदीकी नाड़ी, जलदाय विभाग के नाले से रिसाव और आसपास की बस्तियों का गंदा पानी इस समस्या की वजह है. पिछले पांच-छह साल से परेशान लोग कई बार अधिकारियों को शिकायत दे चुके हैं, लेकिन उन्हें समाधान नहीं मिला. अब स्थानीय नागरिकों ने पानी की निकासी के लिए पक्का नाला बनाने और जमीन का स्तर ऊंचा करने की मांग उठाई है. उनका कहना है कि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा.
पाली. इंसान के जीवन में सुख-दुख का दौर चलता रहता है, लेकिन एक उम्मीद होती है कि अंतिम यात्रा कम से कम सम्मान और शांति के साथ पूरी हो सके. लेकिन नया गांव से जो तस्वीरें और रिपोर्ट सामने आ रही हैं, वे किसी को भी झकझोर कर रख देंगी. यहां के मोक्षधाम श्मशान घाट की बदहाली इतनी बदतर हो चुकी है कि अपनों को अंतिम विदाई देने आए लोगों को घुटने तक भरे पानी और कीचड़ का सामना करना पड़ रहा है. अंतिम संस्कार की अग्नि जलाने से लेकर मासूम बच्चों को दफनाने तक हर एक प्रक्रिया में भारी दुश्वारियां उठानी पड़ रही है. देखरेख के अभाव और जलभराव की गंभीर समस्या के कारण यह पवित्र स्थल लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है.
स्थिति यह है कि श्मशान घाट के अधिकतर हिस्से में सालभर पानी भरा रहता है, और बारिश के दिनों में तो पूरा परिसर किसी तालाब में तब्दील हो जाता है. मोहल्ले के सम्पतराम बावरी ने दर्द साझा करते हुए बताया कि श्मशान घाट के बिल्कुल पास ही नाड़ी स्थित है और यहीं से जलदाय विभाग का नाला भी गुजरता है. इन दोनों से होने वाले लगातार पानी के रिसाव के कारण श्मशान घाट की जमीन में हर वक्त पानी जमा रहता है. इसके अलावा, आसपास की बस्तियों का गंदा पानी भी यहीं आकर भर जाता है. इस बारे में कई बार नगर निगम के अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन सिवाय आश्वासन के कुछ नहीं मिला.
सालों पुरानी समस्या के बावजूद सुनवाई नहीं हो रही
स्थानीय रहवासियों का कहना है कि यह समस्या पिछले पांच-छह सालों से बनी हुई है, लेकिन स्थानीय प्रशासन और जिम्मेदार अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है. कई बार लिखित और मौखिक रूप से शिकायत करने के बावजूद आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है. बरसात के मौसम में यहां के हालात बद से बदतर हो जाते हैं. परिसर में जलभराव के कारण अंतिम संस्कार के लिए शव को अंदर तक ले जाना बेहद जोखिम भरा और चुनौतीपूर्ण हो जाता है. मोहल्ले के छोगाराम देवासी ने बताया, “पानी भरा रहने के कारण यहां आने वाले लोग अक्सर फिसलकर गिर जाते हैं और चोटिल होते हैं. प्रियजनों के अंतिम विदाई के समय लोगों को इस प्रकार की अमानवीय पीड़ा से गुजरना पड़ता है, जो प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है.
सबसे गंभीर स्थिति बच्चों को दफनाने में उत्पन्न होती है
मामले का सबसे संवेदनशील पहलू वह जमीन है, जहां छोटे बच्चों को दफनाया जाता है. इस हिस्से में भी हमेशा पानी भरा रहने के कारण शोक संतप्त परिजनों को अपने बच्चों को दफनाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. समस्या से त्रस्त स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से तत्काल निम्नलिखित कदम उठाने की मांग की है. लोगो का कहना है कि श्मशान घाट से पानी की सुगम निकासी के लिए तुरंत एक पक्के नाले का निर्माण करवाया जाए.साथ ही उन्होने कहा कि जिन हिस्सों में पानी जमा रहता है, वहां मिट्टी डलवाकर जमीन का स्तर ऊंचा किया जाए, ताकि जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान हो सके. ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस गंभीर समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया, तो उन्हें मजबूरन बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करना पड़ेगा.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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October 15, 2026, 07:54 IST



