भारत-पाक युद्ध से जुड़ी है मंदिर की कहानी, आज भी सुरक्षित रखे हैं बिना फटे बम, BSF के जवान करते हैं पूजा-अर्चना

Last Updated:October 16, 2026, 08:38 IST
Tanot Mata Temple Jaisalmer: जैसलमेर की भारत-पाक सीमा पर स्थित तनोट माता मंदिर थार की वैष्णोदेवी के रूप में विख्यात है. 1965 और 1971 के युद्धों में पाकिस्तान द्वारा गिराए गए सैकड़ों बम इस मंदिर परिसर में आज भी बिना फटे रखे हैं, क्योंकि माँ के आशीर्वाद से एक भी बम नहीं फटा था. इस मंदिर की पूजा-अर्चना और भंडारे की पूरी जिम्मेदारी BSF के जवानों के कंधों पर है. नवरात्रि के दौरान यहां देश भर से भक्तों का सैलाब उमड़ता है और रुमाल बांधने से मन्नतें पूरी होने की मान्यता है.
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Tanot Mata Temple: थार की वैष्णोदेवी तनोट माता, जहाँ BSF के जवान करते हैं पूजा और सेवा
Jaisalmer: शारदीय नवरात्रि के पावन अवसर पर देशभर के प्रमुख शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं का भारी हुजूम उमड़ रहा है. हर कोई मां जगदंबा के दरबार में पहुंचकर अपने परिवार और देश के लिए सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना कर रहा है. इसी कड़ी में राजस्थान के जैसलमेर जिले से लगभग 120 किलोमीटर दूर भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित तनोट माता का मंदिर विशेष आकर्षण और आस्था का केंद्र बना हुआ है. इस पावन धाम की सबसे अनोखी बात यह है कि इस मंदिर का जिम्मा किसी सामान्य पुजारी के पास नहीं, बल्कि देश की पहली रक्षा पंक्ति यानी सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जांबाज जवानों के कंधों पर है.
साल 1965 के भारत-पाक युद्ध के बाद से ही सीमा सुरक्षा बल के जवानों ने इस मंदिर का संपूर्ण प्रबंधन और कार्यभार अपने हाथों में ले लिया था. वर्तमान में मंदिर का संचालन BSF द्वारा गठित एक विशेष ट्रस्ट द्वारा किया जाता है. यहां सुबह, दोपहर और शाम की नियमित आरती सेना के जवान ही करते हैं. केवल इतना ही नहीं, मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का आयोजन भी जवानों द्वारा ही किया जाता है. इस भंडारे में कोई राजा हो या रंक, सभी एक पंक्ति में बैठकर प्रसाद ग्रहण करते हैं और BSF के जवान पूरी निष्ठा और श्रद्धा के साथ उन्हें भोजन परोसते हैं. इसी अनूठे जुड़ाव के कारण तनोट माता को ‘थार की वैष्णो देवी’, ‘सैनिकों की देवी’ और ‘रुमाल वाली देवी’ के नाम से जाना जाता है.
1965 और 1971 के युद्ध के ऐतिहासिक चमत्कारतनोट माता को आवड़ माता का अवतार माना जाता है. यह मंदिर 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध का प्रत्यक्ष साक्षी रहा है. 1965 के युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना ने तनोट क्षेत्र में लगभग 4000 बम गिराए थे, जबकि 1971 के युद्ध में भी करीब 450 बम दागे गए थे. लेकिन मां के अलौकिक आशीर्वाद के कारण मंदिर परिसर और उसके आसपास गिरा एक भी बम नहीं फूटा. भारतीय सेना ने इन युद्धों में ऐतिहासिक विजय हासिल की. आज भी वे जीवित बम मंदिर परिसर में बने एक छोटे संग्रहालय में दर्शनार्थियों के देखने के लिए रखे गए हैं. इसके अलावा, पाकिस्तानी सेना के ब्रिगेडियर शाहबाज हुसैन भी मां के इस चमत्कार से इतने प्रभावित हुए थे कि उन्होंने यहां चांदी के चार छत्र भेंट किए थे, जो आज भी मंदिर में सुरक्षित रखे हैं. बॉलीवुड की मशहूर फिल्म ‘बॉर्डर’ की पटकथा भी इसी पावन मंदिर और लोंगेवाला पोस्ट के युद्ध पर आधारित है.
मन्नत की रुमाल वाली देवी और आधुनिक सुरक्षातनोट माता मंदिर के पास ही मनसा देवी का स्थान है, जिन्हें ‘रुमाल वाली देवी’ भी कहा जाता है. श्रद्धालुओं में मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से यहां रुमाल बांधकर अपनी मनोकामना मांगता है, मां उसकी इच्छा अवश्य पूरी करती हैं. मनोकामना पूर्ण होने के बाद भक्त पुनः आकर उस रुमाल को खोलते हैं. हाल के वर्षों में भी जब सीमा पर तनाव के दौरान दुश्मन देश की ओर से ड्रोन और मिसाइल हमलों की कोशिशें की गईं, तब भी क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित रहा. स्थानीय निवासियों और जवानों का अटूट विश्वास है कि इस कठिन मरुस्थलीय सरहद की रखवाली BSF के जवानों के साथ-साथ स्वयं तनोट माता कर रही हैं.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Jaisalmer,Jaisalmer,Rajasthan
First Published :
October 16, 2026, 08:38 IST



