टूटी पानी की टंकी, बदहाल रास्ता और अंधेरी रात, राजसमंद की इस बस्ती में कब बदलेगी तस्वीर?

राजसमंद. राजस्थान में पंचायतीराज चुनाव 2026 को लेकर गांव-गांव में चुनावी माहौल बन रहा है. राजनीतिक दल और संभावित प्रत्याशी ग्रामीणों के बीच पहुंचकर अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हैं, लेकिन इसी बीच गांवों की जमीनी हकीकत भी सामने आने लगी है. न्यूज18 राजस्थान के चुनावी चौपाल कार्यक्रम के दौरान राजसमंद जिले की झोर पंचायत के उलपुरा स्थित कालबेलिया बस्ती के ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं खुलकर बताईं. ग्रामीणों का कहना है कि उनकी बस्ती में आज भी सड़क, पानी, बिजली और बच्चों की पढ़ाई जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है.
उनका आरोप है कि गरीब परिवारों की इस बस्ती की समस्याओं पर जिम्मेदारों ने पर्याप्त ध्यान नहीं दिया. हालात ऐसे हैं कि बस्ती तक पहुंचने के लिए बेहतर रास्ता नहीं है, पीने के पानी के लिए हैंडपंप से जुड़ी टंकी भी टूटी हुई है और रात के समय रोशनी की व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. ग्रामीणों ने बताया कि बच्चों की पढ़ाई के लिए बस्ती में स्कूल भी नहीं है. ऐसे में पंचायतीराज चुनाव के बीच ग्रामीणों की समस्याओं ने पंचायत स्तर पर विकास कार्यों और सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं.
सड़क बदहाल, बस्ती तक पहुंचना मुश्किल
चुनावी चौपाल के दौरान उलपुरा की कालबेलिया बस्ती के ग्रामीणों ने बताया कि गांव के अंदर आने-जाने के लिए रास्ते की स्थिति ठीक नहीं है. खराब मार्ग के कारण ग्रामीणों को आवाजाही में परेशानी होती है. ग्रामीणों का कहना है कि बस्ती में रहने वाले परिवारों को रोजमर्रा के कामों के लिए भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. सड़क जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव गांव के विकास पर सवाल खड़े करता है. ग्रामीण चाहते हैं कि बस्ती तक आने-जाने के रास्ते को दुरुस्त किया जाए, ताकि लोगों को आवागमन में राहत मिल सके.
पीने के पानी के लिए भी होती है परेशानी
बस्ती के लोगों ने पेयजल व्यवस्था को लेकर भी अपनी पीड़ा बताई. ग्रामीणों के अनुसार, पानी की जरूरत पूरी करने के लिए हैंडपंप को एक टंकी से जोड़ा गया है, लेकिन टंकी टूटी हुई है. ऐसे में पानी की व्यवस्था को लेकर परेशानी बनी रहती है. ग्रामीणों का कहना है कि पीने का साफ पानी हर परिवार की बुनियादी जरूरत है, लेकिन उनकी बस्ती में इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है. ग्रामीण चाहते हैं कि पानी की व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए, ताकि उन्हें रोजाना होने वाली परेशानी से राहत मिल सके.
बच्चों की पढ़ाई के लिए बस्ती में नहीं है स्कूल
ग्रामीणों ने बच्चों की शिक्षा को लेकर भी चिंता जाहिर की. उनका कहना है कि बस्ती में बच्चों के लिए स्कूल नहीं है. शिक्षा किसी भी बच्चे के बेहतर भविष्य की नींव होती है, लेकिन स्कूल की सुविधा नहीं होने से परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. ग्रामीण चाहते हैं कि बच्चों की पढ़ाई के लिए उचित व्यवस्था हो, जिससे उन्हें शिक्षा के अवसर मिल सकें. चुनावी चौपाल में यह मुद्दा भी सामने आया कि गांवों में विकास का आकलन केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि शिक्षा जैसी जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता से भी होना चाहिए.
रात में अंधेरा रहने से जंगली जानवरों का रहता है खतरा
कालबेलिया बस्ती के ग्रामीणों ने बताया कि यहां रोड लाइट की व्यवस्था नहीं है. रात होते ही रास्तों पर अंधेरा छा जाता है. ग्रामीणों के मुताबिक, रोशनी नहीं होने के कारण जंगली जानवरों का खतरा बना रहता है. ऐसे में रात के समय घर से बाहर निकलना और रास्तों पर आवाजाही करना मुश्किल हो जाता है. ग्रामीण चाहते हैं कि बस्ती में रोड लाइट लगाई जाए, ताकि रात के समय रोशनी रहे और लोगों को सुरक्षित आवाजाही में मदद मिल सके.
चुनाव के बीच ग्रामीणों ने उठाए कई सवाल
पंचायतीराज चुनाव 2026 के बीच उलपुरा की कालबेलिया बस्ती की समस्याएं सामने आने के बाद पंचायत स्तर पर मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं. ग्रामीणों की मांग है कि सड़क, पेयजल, बिजली और शिक्षा जैसी जरूरतों पर ध्यान दिया जाए. चुनाव के दौरान गांवों में विकास और सुविधाओं को लेकर चर्चा तेज है. ऐसे में अब देखना होगा कि ग्रामीणों की इन समस्याओं पर जनप्रतिनिधि और संबंधित अधिकारी क्या कदम उठाते हैं. बस्ती के लोगों को उम्मीद है कि उनकी समस्याएं जिम्मेदारों तक पहुंचेंगी और उन्हें मूलभूत सुविधाओं के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा.



