क्या कैंसर होने से 5 साल पहले खतरे का अनुमान लगा सकता है AI? डॉक्टर ने बताई पूरी सच्चाई

फरीदाबाद: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआती पहचान में भी मदद कर रहा है. इसकी मदद से मैमोग्राम की जांच कर कैंसर का पता लगाने की संभावना बढ़ सकती है. इतना ही नहीं, AI के जरिए अगले पांच साल में कैंसर होने का खतरा जानने के लिए भी कुछ टूल विकसित किए गए हैं, हालांकि अभी इनका इस्तेमाल परीक्षण के आधार पर हो रहा है. Local18 से बातचीत में अमृता हॉस्पिटल की सीनियर कंसल्टेंट ब्रेस्ट क्लीनिक की डॉ. श्वेता राजदान ने बताया कि AI ब्रेस्ट कैंसर की पहचान, गांठ की जांच और ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में मददगार साबित हो सकता है.
क्या AI शुरुआती ब्रेस्ट कैंसर की पहचान कर सकता है
डॉ. श्वेता राजदान बताती हैं कि आजकल कैंसर की जांच और इलाज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल बढ़ रहा है. ब्रेस्ट के एक्स-रे यानी मैमोग्राम की जांच में भी AI की मदद ली जा रही है. दुनियाभर में हुए कई परीक्षणों में सामने आया है कि AI की मदद से कैंसर की पहचान की दर में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है.
क्या AI पांच साल पहले कैंसर का खतरा बता सकता है
डॉ. श्वेता राजदान बताती हैं कि AI आधारित कुछ टूल ऐसे विकसित किए गए हैं, जिनमें मरीज की जानकारी के आधार पर अगले पांच साल में ब्रेस्ट कैंसर होने के खतरे का आकलन किया जा सकता है. हालांकि, ये टूल अभी परीक्षण के आधार पर इस्तेमाल किए जा रहे हैं. इन्हें हर मरीज पर लागू नहीं किया जा सकता. इसके लिए मरीज की सहमति लेना और उसे जांच के नतीजों के बारे में जानकारी देना जरूरी है.
क्या AI घने ब्रेस्ट टिश्यू में कैंसर पहचान सकता है
डॉ. श्वेता राजदान बताती हैं कि कम उम्र की महिलाओं में ब्रेस्ट टिश्यू घने हो सकते हैं, जिससे मैमोग्राम में कैंसर की पहचान करना मुश्किल हो जाता है. ऐसे मामलों में AI यह समझने में मदद कर सकता है कि दिखाई देने वाला हिस्सा संदिग्ध गांठ है या सामान्य ब्रेस्ट टिश्यू.
क्या AI बार-बार बायोप्सी की जरूरत कम कर सकता है
डॉ. श्वेता राजदान बताती हैं कि AI गांठ के कैंसर होने की आशंका का आकलन करने में मदद कर सकता है. इससे डॉक्टर को यह तय करने में सहायता मिल सकती है कि बायोप्सी की जरूरत है या नहीं. हालांकि, बायोप्सी का फैसला डॉक्टर मरीज की स्थिति और दूसरी जांचों के आधार पर ही लेते हैं.
क्या AI गांवों में कैंसर की जांच आसान बना सकता है
डॉ. श्वेता राजदान बताती हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी के कारण कई महिलाएं गांठ होने के बावजूद इलाज के लिए नहीं आतीं और कैंसर का पता देर से चलता है. छोटे अस्पतालों में मैमोग्राम करके AI और टेली-कंसल्टेशन की मदद से विशेषज्ञों की राय ली जा सकती है. इससे संदिग्ध मामलों की जल्द पहचान कर मरीजों को बड़े अस्पतालों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है. आने वाले दस वर्षों में AI चिकित्सा व्यवस्था में बड़े बदलाव ला सकता है.



