ऐसा माता का मंदिर जहां त्रिशूल पर चढ़ती हैं हथकड़ियां और जंजीरें, डाकू की मन्नत से जुड़ी है कहानी

Last Updated:October 18, 2026, 12:48 IST
Devak Mata Temple Pratapgarh: प्रतापगढ़ जिले का देवाक माता मंदिर अपनी अनोखी परंपराओं और लोक मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है. यहां त्रिशूल पर हथकड़ियां और जंजीरें चढ़ाई जाती हैं. रियासतकाल में डाकू पृथ्वी राणा द्वारा जेल से छूटने की मन्नत मांगने के बाद यह परंपरा शुरू हुई थी. अब लोग कानूनी मामलों से मुक्ति पाने के लिए आते हैं. मंदिर समिति ने पशु बलि बंद कर दी है और अब भक्त चूड़ी, नारियल व वस्त्र चढ़ाते हैं. प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे इस मंदिर में नवरात्र पर भारी भीड़ उमड़ती है.
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Devak Mata Temple Pratapgarh: अनोखा मंदिर जहां त्रिशूल पर चढ़ती हैं हथकड़ियां
Pratapgarh: प्रतापगढ़ जिले का देवाक माता मंदिर अपनी अनूठी परंपराओं और लोक मान्यताओं के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है. जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर न केवल स्थानीय लोगों, बल्कि उदयपुर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, निंबाहेड़ा, छोटीसादड़ी, मंदसौर, रतलाम और नीमच सहित विभिन्न क्षेत्रों के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है. पहाड़ पर स्थित इस मंदिर में माता के दर्शन के लिए सालभर श्रद्धालु पहुंचते हैं, जबकि चैत्र और शारदीय नवरात्र के दौरान यहां विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं.
देवाक माता मंदिर की सबसे अनूठी पहचान यहां त्रिशूल पर लटकी पुरानी हथकड़ियां, बेड़ियां और लोहे की जंजीरें हैं. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, पहले जेल से भागने वाले बदमाश माता के दरबार में पहुंचकर अपनी बेड़ियां त्रिशूल पर चढ़ाते थे. यह परंपरा रियासतकाल से जुड़ी लोककथाओं के कारण प्रचलित हुई. आज भी मंदिर में मौजूद ये पुरानी वस्तुएं लोगों के बीच कौतूहल का विषय बनी हुई हैं. स्थानीय लोककथा के अनुसार, रियासतकाल में डाकू पृथ्वी राणा ने जेल में रहते हुए देवाक माता से मन्नत मांगी थी. कहा जाता है कि उसने माता से प्रार्थना की थी कि यदि वह जेल से बाहर निकलने में सफल हुआ तो सबसे पहले माता के दर्शन करने पहुंचेगा. मान्यता है कि जेल से निकलने के बाद वह मंदिर पहुंचा और अपनी बेड़ियां माता के त्रिशूल पर चढ़ा दीं. इसके बाद यहां हथकड़ियां और जंजीरें चढ़ाने की परंपरा शुरू हो गई.
कानूनी परेशानियों से मुक्ति की मन्नतपहले जहां बदमाश जेल से भागने या पुलिस से बचने की मन्नत लेकर यहां पहुंचते थे, वहीं अब श्रद्धालु कानूनी परेशानियों से मुक्ति और कोर्ट-कचहरी के चक्करों से छुटकारा पाने की कामना करते हैं. हालांकि, यह परंपरा पूरी तरह से स्थानीय मान्यताओं और लोककथाओं पर आधारित है. समय के साथ इस मंदिर की परंपराओं में कई सकारात्मक बदलाव भी आए हैं. मंदिर में पहले मनोकामना पूरी होने पर पशु बलि देने की प्राचीन प्रथा थी, जिसे मंदिर समिति ने पूरी तरह से बंद करवा दिया. अब श्रद्धालु माता को चूड़ी, बिंदी, मेहंदी और नारियल अर्पित करते हैं. इसके साथ ही माता को वस्त्र चढ़ाने की भी सुंदर परंपरा है.
नवरात्र आयोजन और परिक्रमा का महत्वनवरात्र के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. चैत्र और शारदीय नवरात्र में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार ज्योति कलश प्रज्ज्वलित करवाते हैं. इस दौरान मंदिर परिसर में भव्य धार्मिक माहौल बना रहता है और दूर-दराज से भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मंदिर परिसर में परिक्रमा के लिए भी एक विशेष स्थान बनाया गया है. पुजारी के अनुसार, शरीर, हाथ-पैर या पीठ में दर्द से परेशान कुछ श्रद्धालु यहां पूरी आस्था के साथ परिक्रमा करते हैं. स्थानीय मान्यता है कि ऐसा करने से उन्हें शारीरिक कष्टों से काफी राहत मिलती है. मंदिर से जुड़ी इन अनोखी मान्यताओं के चलते लोग अपनी समस्याओं के समाधान और मनोकामनाओं की पूर्ति की उम्मीद लेकर यहां आते हैं.
प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरण संरक्षणमंदिर के आसपास फैला हुआ घना जंगल और सागवान के बड़े-बड़े पेड़ इस स्थान की प्राकृतिक सुंदरता को और अधिक खास बनाते हैं. यहां पर्यावरण संरक्षण के चलते पेड़ों की कटाई पर सख्त मनाही है. इस तरह देवाक माता मंदिर धार्मिक आस्था, पुरानी लोककथाओं और अद्भुत प्राकृतिक वातावरण का एक ऐसा अनूठा संगम है, जो इसे प्रतापगढ़ जिले के प्रमुख आस्था स्थलों में एक बिल्कुल अलग पहचान दिलाता है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Pratapgarh,Pratapgarh,Rajasthan
First Published :
October 18, 2026, 12:48 IST



