1100 साल पुराना बंक्यारानी माता का धाम, बच्चों की पुकार सुनकर आकाश से उतरी थीं माता रानी

Last Updated:October 18, 2026, 15:48 IST
Bankyarani Mata Dham: राजस्थान का बंक्यारानी माता धाम अपनी प्राचीनता और धार्मिक मान्यताओं के लिए श्रद्धालुओं के बीच विशेष पहचान रखता है. मान्यता है कि करीब 1100 साल पुराने इस धाम में बच्चों की पुकार सुनकर माता रानी आकाश से उतरी थीं. माता के इस धाम से जुड़ी कथा भक्तों की आस्था और विश्वास को दर्शाती है.
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भीलवाड़ा: राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के आसींद क्षेत्र में स्थित करीब 1100 साल पुराना बंक्यारानी माता मंदिर इन दिनों शारदीय नवरात्रि में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. पहाड़ की चोटी पर स्थित इस प्राचीन धाम में माता रानी के दर्शन के लिए राजस्थान के विभिन्न जिलों से भक्त पहुंच रहे हैं. मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथाएं, चमत्कारों की मान्यताएं और प्राकृतिक सुंदरता इसे खास बनाती हैं. मान्यता है कि माता बंक्यारानी बच्चों की पुकार सुनकर आकाश मार्ग से यहां उतरी थीं और पत्थर के रूप में विराजमान हो गईं. नवरात्रि के नौ दिनों में यहां विशेष पूजा-अर्चना, भव्य श्रृंगार और धार्मिक आयोजन होते हैं. मंदिर को प्रेत बाधा से मुक्ति की मान्यताओं के लिए भी जाना जाता है.
इस दौरान कई श्रद्धालु अपने परिवार के साथ यहां रहकर पूजा-पाठ करते हैं. आसींद से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित इस मंदिर में शनिवार और रविवार को भी भक्तों की भीड़ उमड़ती है. मंदिर परिसर में हनुमान जी और भैरव बाबा के दर्शन भी किए जा सकते हैं. पहाड़ों और हरियाली के बीच स्थित यह धाम धार्मिक आस्था के साथ प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी प्रसिद्ध है.
प्रेत बाधा और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति के लिए जाना जाता मंदिर के पुजारी और ट्रस्टी देवीलाल ने बताया कि भीलवाड़ा जिले के आसींद से 12 किलोमीटर दूरी पर स्थित बंक्यारानी माता मंदिर 1100 साल प्राचीन हैं. नवरात्रि के 9 दिनों में यहाँ माता रानी की विशेष उपासना की जाती है. इस पावन अवसर पर भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, अजमेर और राजसमंद सहित पूरे राजस्थान से लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुँच रहे हैं. मान्यताओं के अनुसार माता बंक्यारानी ने बकेसुर राक्षस का वध किया था और वह बांके गढ़ में प्रकट हुई थीं. इसके बाद जब माता आकाश मार्ग से प्रस्थान कर रही थीं तब प्राचीन बदनोर प्रांत के आमेसर के जंगलों में गाय चरा रहे कुछ ‘बाल गोपालों’ (चरवाहों) ने उन्हें देखा और वे चिल्ला उठे. बच्चों की इस मासूम पुकार पर माता भवानी ने अपनी आकाश यात्रा वहीं रोक दी. वे उसी स्थान पर धरती पर उतर आईं और पाषाण (पत्थर) का रूप धारण कर लिया. तब से माता इसी पवित्र धाम में साक्षात विराजमान हैं. इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूरी होती है. इसके अलावा यहाँ कई हैरान कर देने वाले चमत्कार भी देखने को मिलते हैं यह स्थान मुख्य रूप से प्रेत बाधा और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति के लिए जाना जाता है.
मानसिक कष्ट से ग्रस्त व्यक्ति के आचार-विचार मंदिर परिसर में कदम रखते ही बीमारी या मानसिक कष्ट से ग्रस्त व्यक्ति के आचार-विचार और व्यवहार में बदलाव आने लगता है. महिलाएँ यहाँ से एक किलोमीटर दूर स्थित हनुमान मंदिर के पास बने कुंड में स्नान करती हैं, जिससे उन्हें मानसिक और शारीरिक शांति मिलती है. वर्तमान में राजस्थान सरकार द्वारा गठित ट्रस्ट इस मंदिर की व्यवस्थाओं को संभालता है. हर साल शारदीय व चैत्र नवरात्रि में यहाँ मेले जैसा माहौल रहता है और प्रतिदिन माता रानी का भव्य व विशेष श्रृंगार किया जाता है. मंदिर के पास ही एक विशाल तालाब है, जहाँ भक्तजन दर्शन से पहले स्नान करते हैं.
माता मंदिर की महिमा केवल देश तक ही सीमित नहींमंदिर के पुजारी और ट्रस्टी देवीलाल ने बताया कि बंक्यारानी माता मंदिर की महिमा केवल देश तक ही सीमित नहीं है. मंदिर परिसर में होने वाली ‘प्रेत बाधा चिकित्सा’ की अनूठी विशेषताओं को लेकर मिसेज बचानी ने “आँयज शॉप स्टोन” नाम से एक डॉक्यूमेंट्री/फिल्म बनाई थी. इस फिल्म को फ्रांस के अंतरराष्ट्रीय फिल्म मेले में स्वर्ण पदक (Gold Medal) से नवाजा गया था.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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Bhilwara,Rajasthan
First Published :
October 18, 2026, 15:48 IST



