karauli news I करौली वालों, जलेबी के शौकीन हैं तो इस नए ठिकाने का स्वाद जरूर चखें

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चाशनी में डूबी मिठास का कमाल,करौली में पंछीराम की जलेबी बनी लोगों की पहली पसंद
Last Updated:October 18, 2026, 18:43 IST
Panchiram Jalebi: करौली में जोधपुर से आए पंछीराम की जलेबी लोगों के बीच खूब पसंद की जा रही है, लकड़ी की भट्टी पर तैयार होने वाली यह कुरकुरी जलेबी महज 120 रुपये किलो में मिलती है. स्वाद ऐसा कि लोग इसकी तुलना 400 रुपये किलो वाली महंगी मिठाई से कर रहे हैं. रोजाना 60 से 70 किलो बिक्री और देर रात तक ग्राहकों की भीड़ इस जलेबी को खास बना रही है.
मिठास तो जलेबी में पहले भी थी, लेकिन इस बार करौली में कुछ ऐसा नया स्वाद आया है, जिसने लोगों को अपनी ओर खींच लिया है. जोधपुर से आए पंछीराम की जलेबी इन दिनों शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है. छोटी-सी कड़ाही, लकड़ी की भट्टी और गरम चाशनी में डूबी कुरकुरी जलेबी का स्वाद लोगों को इस कदर पसंद आ रहा है कि इसे चखने के लिए देर रात तक ग्राहकों की भीड़ पहुंच रही है.
खास बात यह है कि महज 120 रुपये किलो बिकने वाली इस जलेबी के स्वाद की तुलना लोग 400 रुपये किलो तक की महंगी मिठाई से कर रहे हैं.करौली में जलेबी खाने के शौकीनों की कमी नहीं है. शहर में कई जगह जलेबी मिलती है, लेकिन जोधपुर से आए इस नए स्वाद ने मिठाई के शौकीनों के बीच अलग पहचान बना ली है. इसकी खासियत सिर्फ इसका स्वाद ही नहीं, बल्कि इसे बनाने का पारंपरिक तरीका और देर रात तक गरमा-गरम उपलब्धता भी है.
करौली में आमतौर पर जलेबी का स्वाद सुबह या दिन के समय नाश्ते के साथ लेने को मिलता है. लेकिन पंछीराम की जलेबी ने इस परंपरा से अलग समय में भी लोगों को मिठास का विकल्प दिया है. यहां शाम ढलने के बाद भी कड़ाही में जलेबी तैयार होती रहती है. गर्म तेल से निकलकर चाशनी में डूबती जलेबी को देखकर राह चलते लोग भी रुकने को मजबूर हो जाते हैं.
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जोधपुर से करौली आए जलेबी विक्रेता पंछीराम बताते हैं कि उनकी जलेबी लकड़ी की भट्टी पर तैयार होती है. जलेबी बनाने के साथ चाशनी भी इसी व्यवस्था में तैयार की जाती है.उनका कहना है कि जलेबी को गरमा-गरम परोसने और पारंपरिक तरीके से बनाने की वजह से ग्राहकों को इसका स्वाद पसंद आ रहा है.
पंछीराम के मुताबिक, दूसरे शहर में आकर अपना स्वाद लोगों तक पहुंचाना आसान नहीं होता, लेकिन करौली के लोगों से उन्हें अच्छा रिस्पांस मिल रहा है. उनके यहां सुबह 11 बजे से रात 10 बजे तक जलेबी मिलती है. उनके दावे के अनुसार, रोजाना करीब 60 से 70 किलो जलेबी की बिक्री हो जाती है.
इस जलेबी का स्वाद चखने पहुंचे राहुल पाराशर बताते हैं कि उन्होंने करौली में कई जगह जलेबी खाई है, लेकिन जोधपुर से आई इस जलेबी का स्वाद उन्हें कुछ अलग लगा. उनके मुताबिक, इसकी कीमत कम होने के बावजूद स्वाद में कोई कमी महसूस नहीं होती. उनका कहना है कि पहली नजर में 120 रुपये किलो का भाव सुनकर किसी को इसकी गुणवत्ता को लेकर संदेह हो सकता है, लेकिन एक बार चखने के बाद स्वाद का अंदाजा लग जाता है.
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October 18, 2026, 18:43 IST



