Sirohi News: किसी को नाखूनों से खोदा, तो कोई बना आंसुओं से! माउंट आबू के इन 6 जल स्रोतों की कहानियां कर देंगी हैरान

Last Updated:October 18, 2026, 15:47 IST
Sirohi News: माउंट आबू की खूबसूरती सिर्फ नक्की झील तक सीमित नहीं है, यहां सावन-भादो कुंड, मंदाकिनी कुंड, गौमुख कुंड और ट्रैवर्स टैंक जैसे कई अद्भुत स्थल हैं, जिनसे प्रेम, पौराणिक मान्यताओं और इतिहास की दिलचस्प कहानियां जुड़ी हैं. जानिए माउंट आबू के इन 6 खूबसूरत पर्यटन स्थलों की खासियत.
शहर में चारों ओर पहाड़ियों और चट्टानों से घिरी नक्की झील झील पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी रहती है. यहां बोटिंग, झील के किनारे सैर और आसपास के बाजार में खरीदारी के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं. राजस्थान पर्यटन के अनुसार, नक्की लेक को पहली मानव निर्मित झील के रूप में भी उल्लेख मिलता है. इस झील से जुड़ी एक लोककथा के अनुसार रसिया बालम ने अपने प्रेम कुंवारी कन्या से विवाह के लिए इस झील को एक रात में अपने नाखून से खोदकर बनाया था, लेकिन इसके बाद भी उनका प्रेम अधूरा रह गया.
आबूराज शहर से करीब 7 किलोमीटर दूर अचलगढ़ की पहाड़ी पर बना सावन भादो कुंड क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर है. पहाड़ी के ऊपरी भाग पर बने इस कुंड को लेकर मान्यता है कि ये कुंड यहां तपस्या कर रही मीरा बाई के आंसुओं से बना था. साल में दो मास श्रावण और भाद्रपद पर इस कुंड का नाम रखा गया है. ये कुंड बीच से दो भागों में बटा हुआ है. एक भाग को सावन और दूसरे भाग को भादो कुंड माना जाता है. इस कुंड के आपस ही एक कुटिया बनी हुई है. जिसे मीराबाई की झोपड़ी के रूप में जाना जाता है. वर्तमान में यहां मीराबाई का मंदिर है.
अचलगढ में ही बना प्राचीन मंदाकिनी कुंड एक स्थानीय लोककथा से जुड़ा है. इस कुंड के किनारे तीन भाषाओं की मूर्तियां है. स्थानीय रहवासी को अनुसार यहां प्राचीन काल में ऋषि मुनि यज्ञ के लिए पानी लेकर जाते थे. तभी तीन राक्षस ऋषियों को परेशान कर यज्ञ में विघ्न डालते थे. जब यहां के राजा को इस बात का पता लगा, तो ऋषियों और यज्ञ की सुरक्षा के लिए एक दिन यहां पहुंचे और तीनों राक्षस को तीर के वार से पत्थर की मूर्तियों में बदल दिया. सरकार की ओर से इस तालाब के विकास का कार्य करवाया जा रहा है.
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माउंट आबू के देलवाड़ा क्षेत्र में संत सरोवर एक प्राकृतिक वातावरण और धार्मिक आस्था का संगम है. सरोवर के पास सोमनाथ महादेव मंदिर है, जो यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए इस तालाब धार्मिक महत्व भी है. तालब के बीच में भगवान शिवी की प्रतिमा और आसपास हरियाली और पहाड़ों के नजारे इस झील के शांत और आध्यात्मिक माहौल को बताते है. यह स्थान कई संतों की तप भूमि भी है. इसके ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व को देखते हुए गत बजट घोषणा में इस तालाब के विकास और सौंदर्यीकरण को लेकर सरकार ने बजट घोषणा की थी.
गौमुख कुंड आबूराज के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है. यहां मार्बलके गाय के मुख के आकार की संरचना से निकलने वाली जलधारा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है. यह स्थल ऋषि वशिष्ठ के आश्रम और उनसे जुड़ी पौराणिक परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है. मान्यता के अनुसार ऋषि वशिष्ठ ने यहां यज्ञ किया था, जिससे राजपूत अग्निवंश की उत्पत्ति हुई थी. इस कथा के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व की वजह से यहां कई पर्यटक इस कुंड को देखने आते है. यहां मार्बल के गाय के मुख की वजह से इसका ये नाम पड़ा.
माउंट आबू के वन क्षेत्र में बना ट्रैवर्स टैंक नेचर लवर्स और बर्ड वाचर्स के लिए आकर्षण रहता है. 1897 में बना ये मानव निर्मित तालाब मगरमच्छों, विभिन्न पक्षियों और आसपास के वन्यजीवों के लिए जाना जाता है. इसका निर्माण सिरोही के महाराव केसरी सिंहजी बहादुर ने अपने मित्र कर्नल जी. एच. ट्रैवर्स की स्मृति में करवाया था. कर्नल ट्रैवर्स का नाम ही आगे चलकर इस स्थान की पहचान बन गया. यहां बने कई दो पहाड़ों पर व्यू पॉइंट से यहां के सुंदर नजारों को निहारने के लिए पहचाने जाते है.
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October 18, 2026, 15:47 IST



