बचपन में काटा एक्टिंग का कीड़ा, बिजनेस छोड़ चुनी फिल्मों की राह, जेलर के किरदार को कर दिया मशहूर

Last Updated:October 20, 2026, 04:01 IST
दिग्गज एक्टर असरानी भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन अपनी अनूठी कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों को हंसाने वाला यह कलाकार आज भी लाखों दिलों में जिंदा है. जयपुर के एक साधारण परिवार से निकलकर भारतीय सिनेमा के पटल पर अपनी अमिट छाप छोड़ने वाले असरानी ने अपने करियर में एक से बढ़कर एक यादगार भूमिकाएं निभाईं. उनका फिल्मी सफर संघर्ष और सफलता की एक मिसाल है.
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आज असरानी की बर्थ एनिवर्सरी है.
नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा के दिग्गज एक्टर और कॉमेडी किंग असरानी आज भले ही हमारे बीच उस दौर की तरह नए किरदारों में न हों, लेकिन उनकी अदाकारी का जादू दर्शकों के दिलों में हमेशा अमर रहेगा. अपनी जबरदस्त कॉमिक टाइमिंग, चेहरे के अनूठे हाव-भाव और डायलॉग डिलीवरी की अनोखी शैली से उन्होंने दशकों तक लोगों को लोटपोट किया है. यूं तो उन्होंने अपने लंबे करियर में हर तरह की भूमिकाओं को जीवंत किया, लेकिन ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘शोले’ में अंग्रेजों के जमाने के जेलर का उनका किरदार आज भी भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार किरदारों में गिना जाता है. असरानी की बर्थ एनिवर्सरी के इस खास मौके पर उनके फिल्मी सफर पर एक नजर डालते हैं.
असरानी का जन्म 1 जनवरी 1941 को राजस्थान के जयपुर में एक सिंधी-हिंदू परिवार में हुआ था. उनके पिता का कालीन और साड़ियों का कारोबार था. परिवार चाहता था कि वह पढ़ाई पूरी करके कारोबार में हाथ बटाएं, लेकिन असरानी की दिलचस्पी अभिनय और संगीत में थी. आठ भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर आने वाले असरानी स्कूल के दिनों से ही नाटकों में हिस्सा लेते थे. उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो, जयपुर के कार्यक्रमों में भी भाग लिया और धीरे-धीरे अभिनय के प्रति उनका लगाव बढ़ता गया.
मैट्रिक की पढ़ाई के दौरान एक्टर बनने का देखने लगे सपना
मैट्रिक की पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने एक्टर बनने का सपना देखना शुरू कर दिया था. इसी सपने को पूरा करने के लिए वह मुंबई भी पहुंचे, लेकिन शुरुआती दिनों में उन्हें सही दिशा नहीं मिल पाई और वह वापस जयपुर लौट आए. हालांकि, उन्होंने अपने सपने को छोड़ा नहीं. कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) में दाखिला लिया और अभिनय की बारीकियां सीखीं.
असरानी को शुरुआत में मिले छोटे-मोटे किरदार
असरानी के लिए फिल्मी दुनिया में जगह बनाना आसान नहीं था. अभिनय की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह हर शुक्रवार पुणे से मुंबई जाते, फिल्म निर्माताओं से मिलते और काम मिलने की उम्मीद लेकर लौट आते. शुरुआत में उन्हें छोटे-छोटे किरदार मिले, लेकिन उन्होंने हर भूमिका को पूरी मेहनत और ईमानदारी से निभाया. धीरे-धीरे उनकी प्रतिभा लोगों की नजरों में आने लगी. ‘गुड्डी’, ‘बावर्ची’, ‘नमक हराम’, ‘अभिमान’ और ‘चुपके चुपके’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अपने अभिनय से अलग पहचान बनाई.
‘आज की ताजा खबर’ के लिए मिला अवॉर्ड
इन फिल्मों में उन्होंने साबित किया कि किसी किरदार को यादगार बनाने के लिए उसका बड़ा होना जरूरी नहीं, बल्कि उसे निभाने का अंदाज मायने रखता है. फिल्म ‘आज की ताजा खबर’ में शानदार अभिनय के लिए उन्हें फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता का पुरस्कार भी मिला. इसके अलावा, ‘रफूचक्कर’, ‘बालिका वधू’ और ‘पति पत्नी और वो’ जैसी फिल्मों में भी उनकी कॉमेडी दर्शकों को खूब पसंद आई.
जेलर के किरदार से चमक उठी किस्मत
असरानी के करियर का सबसे यादगार किरदार फिल्म ‘शोले’ (1975) का जेलर था. फिल्म में उनका डायलॉग, ‘हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं’, आज भी लोगों की जुबान पर है. इस किरदार में वह खुद को बेहद चालाक और ताकतवर समझने वाले जेलर के रूप में नजर आए, लेकिन उनकी हरकतें दर्शकों को हंसने पर मजबूर कर देती थीं. फिल्म में उनका किरदार भले ही छोटा था, लेकिन उन्होंने अपनी अदाकारी से ऐसी छाप छोड़ी कि वह हिंदी सिनेमा के सबसे चर्चित कॉमिक किरदारों में शामिल हो गया. 20 अक्टूबर 2025 को 84 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाले असरानी आज भी दर्शकों की यादों में जिंदा हैं.About the AuthorKamta PrasadSenior Sub Editor
कामता प्रसाद (KP) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में काम करने का 11 सालों का लंबा अनुभव है. वर्तमान में वह न्यूज18 हिंदी में बतौर सीनियर सब एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. कामता को एंटरटेनमेंट …
October 20, 2026, 04:01 IST



