गुजराती सिनेमा का बच्चन कहलाने वाला एक्टर, नेगेटिव रोल में दी लीड हीरो टक्कर, राकेश रोशन ने दिलाई खोई पहचान

Last Updated:October 20, 2026, 05:01 IST
फिल्मी दुनिया में कई ऐसे कलाकार हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और शानदार अभिनय के दम पर अलग पहचान बनाई. अभिनेता किरण कुमार भी उन्हीं में से एक हैं. उन्होंने अपने करियर में कभी हीरो बनकर तो कभी खलनायक के रूप में दर्शकों का दिल जीता. हालांकि, उनके करियर में एक ऐसा दौर भी आया, जब हिंदी फिल्मों में काम मिलना कम हो गया था. ऐसे में उन्हें गुजराती सिनेमा का रुख करना पड़ा. लेकिन उनकी किस्मत ने फिर करवट ली और फिल्ममेकर राकेश रोशन ने उन्हें बॉलीवुड में दोबारा पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाई.
नई दिल्ली. 20 अक्टूबर 1953 को मुंबई में जन्मे किरण कुमार आज भी अभिनय की दुनिया में सक्रिय हैं. वह अपने दमदार अंदाज और हर तरह के किरदार में ढल जाने की कला के लिए जाने जाते हैं. पर्दे पर उनकी मौजूदगी हमेशा से खास रही है. विलेन के रूप में उन्होंने ऐसी छाप छोड़ी कि दर्शक उनके किरदारों को आज भी याद करते हैं. वहीं, गंभीर और इमोशनल रोल में भी उन्होंने अपना टैलेंट साबित किया.
किरण कुमार ने अपने करियर में हर तरह के रोल निभाए हैं. करियर की शुरुआत में तो उन्होंने नेगेटिव रोल से अपनी अलग पहचान बनाई थी. लेकिन 2000 के दशक में आई फिल्म धड़कन में शिल्पा शेट्टी के पिता का रोल निभाकर उन्होंने लोगों का दिल जीत लिया था. कई फिल्मों में उनके पॉजिटिव रोल भी काफी पसंद किए जाते थे.
किरण कुमार का ताल्लुक एक ऐसे परिवार से है, जहां कला और संस्कृति की अपनी खास जगह रही है. उनके पिता ओंकारनाथ धर हिंदी फिल्मों के मशहूर अभिनेता जीवन थे. किरण कुमार ने इंदौर के डेली कॉलेज से पढ़ाई की. इसके बाद मुंबई के आरडी नेशनल कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की और फिर पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) में अभिनय की बारीकियां सीखीं. किरण कुमार ने काफी कम उम्र में ही फिल्मों में कदम रख दिया था. साल 1960 में आई फिल्म ‘लव इन शिमला’ में उन्होंने छोटी-सी भूमिका निभाई थी. इसके बाद साल 1974 में फिल्म ‘आजाद मोहब्बत’ में वह मुख्य अभिनेता के रूप में नजर आए. धीरे-धीरे उन्होंने फिल्मों के साथ टेलीविजन की दुनिया में भी अपनी जगह बनाई.
Add as Preferred Source on Google
‘जिंदगी’, ‘घुटन’, ‘साहिल’, ‘मंजिल’, ‘गृहस्थी’ और ‘कथा सागर’ जैसे टीवी सीरियल्स में काम करके उन्होंने छोटे पर्दे पर भी अपनी पहचान मजबूत की. अपने लंबे करियर में वह हिंदी, गुजराती और भोजपुरी समेत अलग-अलग भाषाओं की 300 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके हैं.
किरण कुमार के करियर में एक समय ऐसा भी आया, जब उन्हें हिंदी फिल्मों में पहले की तरह मौके नहीं मिल रहे थे. ‘जंगल में मंगल’ जैसी फिल्मों के बाद उनका करियर कुछ धीमा पड़ गया. इस मुश्किल दौर में उन्होंने हार मानने के बजाय गुजराती फिल्मों में काम करने का फैसला किया.
गुजराती सिनेमा में भी किरण कुमार ने अपनी मेहनत और अभिनय से खूब नाम कमाया. वहां उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि उन्हें ‘गुजराती सिनेमा का बच्चन’ तक कहा जाने लगा. इस दौर ने उनके करियर को नया सहारा दिया और उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए एक नया मंच मिला.
गुजराती फिल्मों में सफलता हासिल करने के बाद किरण कुमार की हिंदी सिनेमा में वापसी का रास्ता फिल्ममेकर राकेश रोशन ने खोला. राकेश रोशन की फिल्म ‘खुदगर्ज’ उनके करियर के लिए अहम साबित हुई. इस फिल्म के बाद उन्हें बॉलीवुड में फिर से काम मिलने लगा और धीरे-धीरे उन्होंने खलनायक के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना ली.
इसके बाद ‘तेजाब’, ‘खुदा गवाह’ जैसी फिल्मों में उनके नेगेटिव रोल को काफी पसंद किया गया. उनके अभिनय में ऐसा दम था कि वह पर्दे पर हीरो के सामने एक मजबूत चुनौती बनकर उभरे. खलनायक के रूप में उनके काम को सराहना मिली और उन्हें कई पुरस्कार भी हासिल हुए. किरण कुमार ने अपने करियर में कई यादगार फिल्मों में काम किया है. ‘राम लखन’, ‘थानेदार’, ‘आज का अर्जुन’, ‘पत्थर के फूल’, ‘हिना’, ‘बोल राधा बोल’, ‘दरार’, ‘धड़कन’, ‘एलओसी कारगिल’ और ‘बॉबी जासूस’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए.
लेटेस्ट कॉमर्स डील्स, खास डिस्काउंट और बेहतरीन शॉपिंग ऑफर देखने के लिए कंपेयर इंडिया✅देखें.First Published :
October 20, 2026, 05:01 IST



