रिटायरमेंट के बाद भी नहीं थमा देशसेवा का जुनून: झुंझुनूं के जीतू फौजी ने मुफ्त ट्रेनिंग देकर 25 युवाओं को पहनाई सेना की वर्दी

Last Updated:October 26, 2026, 08:27 IST
Read inspiring story of retired Indian Army soldier Jeetu Fauji: झुंझुनूं के सेवानिवृत्त सैनिक जितेंद्र सिंह उर्फ जीतू फौजी ने रिटायरमेंट के बाद युवाओं को सेना में भेजने का अनूठा बीड़ा उठाया है. वे रोज सुबह 4:30 बजे मैदान में पहुंचकर 30-40 युवाओं को बिल्कुल मुफ्त फिजिकल ट्रेनिंग देते हैं, ताकि आर्थिक तंगी किसी के सपनों में बाधा न बने. उनके मार्गदर्शन और कड़े अनुशासन से अब तक 25 युवा सेना और अग्निवीर के रूप में देश सेवा में चुनकर जा चुके हैं. जीतू फौजी की यह निःशुल्क पहल ग्रामीण युवाओं के लिए एक बड़ी उम्मीद बन चुकी है.
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Jhunjhunu: सुबह के ठीक 4:30 बजे हैं और चारों तरफ अभी अंधेरा छाया हुआ है, लेकिन खेल के मैदान में एक पूर्व सैनिक अपने मिशन के साथ मुस्तैद खड़ा है. धीरे-धीरे गांव के युवा भी वहां जुटने लगते हैं. किसी के कदमों में दौड़ने का बेजोड़ जुनून है, तो किसी की आंखों में देश की रक्षा के लिए सेना की वर्दी पहनने का सपना. वार्मअप से शुरू होने वाली इस ट्रेनिंग में पसीना बहता है, हौसले मजबूत होते हैं और देशसेवा का संकल्प आकार लेता है. यह कहानी है भारतीय सेना से सेवानिवृत्त जितेंद्र सिंह उर्फ ‘जीतू फौजी’ की, जिन्होंने रिटायरमेंट के बाद आराम भरी जिंदगी चुनने के बजाय ग्रामीण युवाओं को सेना में भर्ती कराने का बीड़ा उठाया है.
वीरों की भूमि के रूप में अपनी खास पहचान रखने वाले झुंझुनूं जिले के गांव-ढाणियों से लंबे समय से युवा सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करते आए हैं. इसी गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने में जुटे जीतू फौजी रोजाना सुबह 30 से 40 युवाओं को पूरी मेहनत के साथ फिजिकल ट्रेनिंग देते हैं. इस नेक काम की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वे युवाओं से इसके बदले एक भी रुपया फीस नहीं लेते. उनका मुख्य उद्देश्य यह है कि किसी भी प्रतिभाशाली गरीब युवा की आर्थिक तंगी उसके सेना में जाने के सपने के आड़े न आए.
साल 2021 में हुए सेवानिवृत्त, जारी है देशसेवाजितेंद्र सिंह वर्ष 2021 में भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हुए थे. सेना में रहते हुए उन्होंने अनुशासन, कड़ी मेहनत और समर्पण को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाया था. रिटायरमेंट के बाद भी उनकी दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं आया. वे आज भी सुबह जल्दी उठकर मैदान में पहुंच जाते हैं. जीतू फौजी बताते हैं कि उनका परिवार पीढ़ियों से सेना से जुड़ा रहा है. जब वे सेना में थे, तब भी भर्ती रैलियों के समय छुट्टी लेकर गांव आते और युवाओं को तैयारी करवाते थे.
गरीब परिवारों के बच्चों को मिल रहा बराबरी का मौकासेना में सेवा के दौरान उन्होंने महसूस किया कि कई युवा बेहद प्रतिभाशाली होने के बावजूद तंगहाली के कारण कोचिंग और बेहतर ट्रेनिंग का खर्च नहीं उठा पाते. हर परिवार के लिए मोटी फीस देना मुमकिन नहीं होता. माता-पिता खेती या मजदूरी करके परिवार चलाते हैं. इसी लाचारी को दूर करने के लिए उन्होंने ठान लिया था कि वे सेवानिवृत्ति के बाद अपना पूरा समय ग्रामीण युवाओं को मुफ्त शारीरिक प्रशिक्षण देने में लगाएंगे.
अग्निवीर योजना समेत 25 युवा पहुंचे सेना मेंजीतू फौजी के सख्त अनुशासन और मार्गदर्शन का नतीजा यह रहा है कि उनके यहां तैयारी करने वाले करीब 25 युवा अब तक भारतीय सेना में चयनित हो चुके हैं. इनमें हालिया ‘अग्निवीर’ योजना के तहत चयनित होने वाले युवा भी शामिल हैं. उनके लिए सबसे गर्व का पल वह होता है, जब मैदान में धूल फांकने और पसीना बहाने वाला कोई युवा सेना की पक्की वर्दी पहनकर देशसेवा के लिए आगे बढ़ता है. जीतू फौजी की यह पहल साबित करती है कि देशसेवा के लिए केवल वर्दी में होना ही ज़रूरी नहीं, बल्कि नेक नीयत और मार्गदर्शन से भी देश का भविष्य गढ़ा जा सकता है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Jhunjhunu,Jhunjhunu,Rajasthan
First Published :
October 26, 2026, 08:16 IST



